हर किसी के अहसान बहुत ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया
हर किसी के अहसान बहुत
दिल के बाक़ी अरमान बहुत ।
सीखना क्या है , सीख लिया
झूठ - सच की , पहचान बहुत ।
बस हमीं रहते घर पे सदा
आते - जाते महमान बहुत ।
हमको महफ़िल में देख वहां
हो गए सब , हैरान बहुत ।
मिल रहा बस इंसान नहीं
मिल ही जाते शैतान बहुत ।
कुछ शराफ़त का मोल नहीं
बिक रहे हैं , ईमान बहुत ।
ग़म - ख़ुशी ' तनहा ' एक यहां
भावनाएं , बेजान बहुत ।

1 टिप्पणी:
Bahut pyari ghazal 👌👍
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