सितंबर 20, 2018

POST : 908 ज़िंदगी में ख़ुशी नहीं तो क्या ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

ज़िंदगी में ख़ुशी नहीं तो क्या ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया ' तनहा '

 
ज़िंदगी में ख़ुशी नहीं तो क्या 
इन लबों पर हंसी नहीं तो क्या । 
 
जानते लोग सब कहानी को  
खुद जुबां से कही नहीं तो क्या ।
 
अब  फ़रिश्ते यहां  बहुत मिलते  
मिल रहा आदमी नहीं तो क्या ।
 
फिर से उनको कभी परखना मत  
कर सके  दोस्ती नहीं तो क्या ।
 
जानपहचान दर्द से गहरी  
आंख में गर नमी नहीं तो क्या ।
 
सब ही आये मेरे जनाज़े पर 
एक आये तुम्हीं नहीं तो क्या ।

यूं ही मशहूर हो गए  ' तनहा '
दास्तानें कही नहीं तो क्या । 
 

 

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