Monday, 6 April 2020

बात काम की या समय की बर्बादी ( संदेश ) डॉ लोक सेतिया

   बात काम की या समय की बर्बादी ( संदेश ) डॉ लोक सेतिया 

विषय फेसबुक व्हाट्सएप्प और आपसी चर्चा में बातचीत को लेकर है। सबसे पहले आपको विचार करना है किस संदेश से आपको क्या हासिल होता है। आपको अधिकतर संदेश ऐसे मिलते हैं जिनका कोई महत्व नहीं होता आपका समय बीत जाए या थोड़ा हंसी मज़ाक चुटकले जैसे आपको कोई सोच विचार नहीं देते हैं। जो लोग आपको बीस संदेश फॉरवर्ड करते हैं कभी पूछना उन्होंने खुद देखे सुने या समझे भी हैं। और कुछ लोग जो किसी राजनितिक विचारधारा या अपने फायदे के मकसद से भेजते हैं उनकी सोचने समझने की शक्ति जंग लगे हथिहार या सामान की तरह हानिकारक होती है खुद रोगी हैं आपको भी बीमार बना सकते हैं। अगर आपको अपनी पसंद की बात ही सुनना अच्छा लगता है तो ये खुद अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना है। भले कोई शासक हो या अधिकारी या धनवान अपना गुणगान उसी को वास्तविकता से दूर करता है और कभी बाद में उसको खेद होता है जब अहंकार में अपना ही नुकसान करता हुआ पछताता है कि काश कोई पहले उसको सच बताता। अपने सुना तो होगा निंदक नियरे राखिये आंगन कुटी छुवाये , बिन साबुन पानी बिना मैल साफ कर जाए। शब्द अलग हो सकते हैं भाव ये है कि आप अपनी कमी बताने वाले से दूरी मत रखना उनका साथ उसी तरह है जैसे साबुन पानी से आप अपना मैल साफ करते हैं। आपने सुना होगा कभी फकीर गली गली कोई गीत गाते थे नानक कबीर की वाणी सुनी है तब धर्म वाले उनको जाने क्या क्या कहते थे क्योंकि वो निडरता से धर्म के नाम पर अंधविश्वास या आडंबर को गलत कहते थे। ईश्वर को वास्तव में वह अधिक जानते मानते थे अन्यथा उनकी कही बात जन जन तक नहीं पहुंचती और किसी धर्म की किताब में दर्ज होती नहीं कभी। मंदिर मस्जिद गिरिजाघर गुरूद्वारे जाना कोई धर्म नहीं है धर्म है उस जगह से आपको संदेश क्या मिलता है अच्छा क्या बुरा क्या है ये चिंतन करने की बात है केवल जाकर सर झुकना माथा टेकना या कुछ पैसे वस्तु कोई खाने को चढ़ाना धर्म नहीं धार्मिकता का दिखावा भर है। 

अब बात इस युग के समय की , होना तो यही संभव था कि कोरोना जैसी आपदा पर जब हम घर में बैठे हैं तो विवेक से काम लेते सोचते समझते कि आज कोई भगवान धर्म मंदिर मस्जिद का उपदेश नहीं विज्ञान और शिक्षा डॉक्टर अस्पताल और हमारा वास्तविक विकास उपयोगी है। शायद अगर हम विचार करते तो व्यर्थ के कार्यों या धार्मिक आडंबरों से बाहर निकलते और साहस से सामना करने समाधान खोजने की बात करते। मगर जिन लोगों को अपना धंधा ही देश की जनता को मूर्ख बनाने से चलाना है उन्होंने अपने मकसद के लिए फिर आपको वापस भूलभुलैयां में उलझाने का कार्य किया है। आपको ताली बजानी है या दिया जलाना है कोई बुराई नहीं है लेकिन जिन उद्देश्यों को लेकर ये करने की बात है क्या वो सच में होते हैं। अपने ताली बजाई उनको आभार जताने को जो आपकी जान की रक्षा करते हैं मगर क्या ये आपको पहले भी नहीं मालूम मगर आप तो जाने क्या क्या समझते हैं कहते हैं। क्या आपको नहीं लगता अपने उनको फीस या पैसा दिया है जबकि आपकी जान की कीमत किसी पैसे से आंकी नहीं जा सकती और न ही जिनको अपना कर्म धर्म केवल धन कमाने को करना है उनका भी बचाव मुझे करना है। समझना है कि डॉक्टर और रोगी या हमारे समाज का संबंध आपसी विश्वास और ईमानदारी का हो। उपचार करने का पैसा लेकर अपनी आजीविका चलाना सही है मगर पैसे कमाने को ही उपचार करने को साधन बनाना अनुचित है। इनमें अंतर है। कुछ इसी तरह अपने दिया जलाया एकता के नाम पर मगर दिन भर भेदभाव और बड़े छोटे या समर्थक विरोधी की चर्चा से मन नहीं मिलते हाथ मिलाने की औपचारिकता निभाते हैं। 

उधर आपको रामायण महाभारत दिखाने की बात हो रही है मगर सवाल ये है कि अपने गीता रामयण अन्य धार्मिक किताबों से कोई सबक सीखा है शायद आपके घर पर धूल चाटती हैं ये किताबें जिनको अपने पढ़ा ही नहीं समझने की बात क्या करें। फिर भी अगर आपको इन सीरियल को देखना है तो विचार करना उनसे क्या हासिल होता है और अवश्य आपको समझ आएगा कि देश में शासन और न्याय कैसा होना चाहिए। ये मुझे भी रामायण देख कर पता चला कि तब राजा होते थे मगर जनता को विरोध करने की मनाही नहीं थी और जब कोई सामने खड़ा होकर दरबार में सवाल करता था तब राजा उसको ताकत भय सत्ता से अधिकार का उपयोग करवा खामोश नहीं करता था बल्कि न्याय और सत्य का पक्ष लिया जाता था। महाभारत से खुद कृष्ण संदेश देते हैं कि राजा को कर देने नहीं देने का औचित्य क्या है और इतना ही नहीं किसी भी देवता की पूजा उसके कोप से डरकर नहीं करनी चाहिए। देवता या जो भी आपको सुरक्षा देता है आपको प्यार देता है वही आदर योग्य है और देवराज इंद्र का अभिमान समाप्त कर उसको अपनी गलती मानने पर विवश करते हैं। अपने समझा किसकी पूजा की जानी चाहिए जिनसे हम को जीवन मिलता है उन सभी की। कोई कह सकता है ये नास्तिकता की बात है जो आपके ही धर्म की किताब की कथा है किसी ने लिखी होगी कोई आज नहीं बदल रहा है। महभारत की विशेषता है कि समय का पहिया घूमता है जो अपनी बात बताता है और समय कभी किसी के आदेश से वापस नहीं लौटता है। लेकिन शायद कुछ लोग समय को बांधना ही नहीं चाहते पीछे ले जाना चाहते हैं। 

( बहुत कुछ और भी विस्तार से बताया जा सकता है मगर अब इतना आपको स्वयं चिंतन करने को काफी है।  अन्य विषय अगली पोस्ट पर बाद में। )



No comments: