जुलाई 23, 2026

POST : 2089 हमें जो ज़िंदगी ने ना सताया होता ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

    हमें जो ज़िंदगी ने ना सताया होता ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया 

हमें जो ज़िंदगी ने ना सताया होता 
उसे हमने भी दुल्हन सा सजाया होता । 
 
मुस्कराना हमें भी आ गया होता , गर 
गले हमको कभी अपने लगाया होता । 
 
किसी तस्वीर की तकदीर बनती हाथों 
ब्रश जो हाथ में मेरे थमाया होता । 
 
मेरी आवाज़ से आवाज़ जो मिल जाती 
सुरीला राग मिलकर साथ गाया होता । 
 
तुझी से हम शिकायत क्यों तुम्हारी करते 
था जितना बोझ मिलकर जो उठाया होता । 
 
बिना मांगे मुहब्बत मिल ही जाती हमको  
तुम्हारे सामने सर ना झुकाया होता । 
 
कभी ना मौत को आवाज़ ' तनहा ' देते 
किसी का साथ उनको रास आया होता । 
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Wahh क्या बात👌👍