Sunday, 31 January 2021

मिलाओ कॉल सत्ता का जूता तुम्हारी खाल बिछा है जाल ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

मिलाओ कॉल सत्ता का जूता तुम्हारी खाल बिछा है जाल ( व्यंग्य )

                                 डॉ लोक सेतिया 

ढंग वही पुराना है मौसम आशिकाना है दिल को बहलाना है आपका ठिकाना है हमको अपना बनाना है कोई छुपा खज़ाना है ढूंढ कर दिखाना है। चलो इशारों में नहीं साफ बात करते हैं जहां से सबसे हुई शुरआत बताते हैं। एसएमएस आपको मिलते हैं मेरा नाम शीला है मैं अलबेली अकेली आपकी सहेली मुझसे प्यार भरी बातें करो इंतज़ार करती हूं बेकार होकर बार बार करती हूं। जिस किसी ने नंबर मिलाया है बैलेंस लुटाकर बड़ा पछताया है। मुहब्बत की बातों की कीमत चुकानी पड़ती है बस कोई नई कहानी बनानी पड़ती है। आयुष्मान खुराना लड़की बनकर बातें करता है पूजा नाम से ड्रीम गर्ल फिल्म में पहले दिन दस करोड़ अगले दिन सोलह करोड़ की कमाई कॉल सेंटर का जाल कमाल है। कॉल करने वाला हो जाता कंगाल है कोई नहीं जानता कौन कैसे हुआ मालामाल है। बड़े बड़े लोग जितना कमाते हैं कोई न कोई जाल ऐसा बिछाते हैं उनसे बात करने उनसे मुलाक़ात करने बदनसीब बातों में आकर ज़हर भी ऊंचे दाम खरीद कर खाते हैं। जो कुछ नहीं करते कमाल करते हैं भिखारी से राजा बन जाते हैं बर्बाद देश का हाल करते हैं समझना मुश्किल है क्या क्या सत्ता के दलाल करते हैं। 

बस कोई रॉंग नंबर से बात होती है हसीं बात बार बार गलती से फोन नंबर मिलने से आखिर मुलाक़ात होती है। नसीब मिलता है इश्क़ होता है चांदनी रात होती है अंजाम दुल्हा दुल्हन डोली बारात होती है। ज़िंदगी से मिलना था कयामत से मुलाक़ात होती है। खत लिखा बिना पता लिखे भेज दिया जवाब का इंतज़ार किया उस माशूका का हाल मत पूछो डाकिया करता है क्या कमाल मत पूछो बैरंग लौटा खत मौत के बाद अब अगले जन्म होगा जुर्माने का हिसाब भरना पड़ा जो रकीब को अर्थी उठाने के बाद। बस एक कॉल आपको वादा उपहार का यही सादा ढंग है सरकार का खुले दरबार का देखा तमाशा लंबे इंतज़ार का। आपको संदेश आता है दिल ख़ुशी से झूम जाता है घर बैठे करोड़पति बनाता है कौन सच किसी को बतलाता है फ़र्ज़ी का बहीखाता है। कौन घर अपना लुटाता है देता है कोई कोई पाता है हर शख़्स चलता इठलाता है। बस इक मिस कॉल हमको देनी है सदस्यता बंट रही मुफ्त में लेनी है आंकड़ों का खेल नया है घर घर गली गली जाकर निवेदन करना फॉर्म भरना धंधा पुश्तैनी है। 
 
क्या लैंडलाइन का ज़माना था फोन नंबर कितना सुहाना था छीन लिया मोबाइल नंबर ने रिश्ते बचपन जवानी के। लोग बदलते थे शहर वही नंबर वही रहते थे याद आई बहुत मुद्द्त बाद कहते थे। जब बदलने लगे मोबाइल नंबर बाहर रहते बताते होते घर अंदर।  मेसेंजर कॉल वीडियो कॉल सभी हैं क्यों किसने किया ब्लॉक सवाल भी हैं। पूछना मत हालचाल किसी का हाल अच्छा मगर बेहाल भी हैं। आयकर विभाग से फोन आया है सच्चा होकर भी दिल घबराया है पुलिस थाने क्योंकर बुलाया है साहूकार को पसीना आया है। अस्पताल से कोई बताता है कौन है नहीं जो घबराता है। डॉन ने घुंघरू को नचाया है आदमी से औरत बनाया है हफ़्ता मांगा था बढ़ाया है चलकर खुद वसूली पर आया है। भगवान भी आखिर बुलाते हैं साइलेंट मोड पर खबर नहीं होती लोग बिन बुलाये नहीं जाते हैं। जाने किस बात की मज़बूरी है राज़ की बात समझना ज़रूरी है उनका ऐलान है या फरमान है बस इक फोन कॉल का अरमान है। घर का मालिक कौन है और न जाने कौन घर का महमान है। बिखरा बिखरा सारा सामान है मेरी जान उनकी अदाओं पर कुर्बान है। जलते हैं जिस के लिए तेरी आंखों के दिये ढूंढ लाया हूं वही गीत मैं तेरे लिए। इज़हार ए इश्क़ अब कॉलर ट्यून बन गया है।