Saturday, 2 September 2017

सब कुछ नया आप क्यों पुराने ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

    सब कुछ नया आप क्यों पुराने ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

            हमने बहुत शासक देखे। उनको भी देखा जो कुछ भी नहीं बोले और आपको भी जो बहुत अधिक बोलते हैं बड़बोले हैं। झूठ बोलने में आपकी बराबरी कौन कर सकता है। हर दिन आपने अपनी बोली बात को ही बदल डाला। आपने बहुत लोगों को बदल डाला उनका काम देख कर। आपके काम को कौन देखे जो आपको भी बदल सकता। अभी तक आपका भी काम बढ़िया तो क्या संतोषजनक भी नहीं है , अच्छे दिन दूर दूर तक दिखाई नहीं देते , आपको भी हमेशा अपने दल की सरकार हर जगह होने से अधिक कुछ नहीं लगा है। अभी भी आपको देश की जनता की नहीं अगले चुनाव की चिंता है , शायद इस से अधिक विडंबना की कोई बात नहीं हो सकती कि देश के सब से बड़े पद पर पंहुचा व्यक्ति इसी को महत्व देता रहे कि कैसे वही उस जगह बना रहे। सत्ता का इतना अधिक मोह लोकतंत्र में अच्छा नहीं है। अभी इक उच्च न्यायलय को इस हद तक टिप्पणी करनी पड़ी कि आप देश के प्रधानमंत्री हैं या अपने दल के ही केवल। वास्तविकता और भी खराब है। दल भी कहां है आप और आपके मुट्ठी भर भरोसे के लोग ही सब कुछ हैं। शायद ही कोई उचित समझेगा कि देश का प्रधानमंत्री जनसभा संसद या लाल किले से संबोधन में कुछ भी ऐसी बात बोले जो सच नहीं हो। आपने खुद अपनी ही कही बातों को कितनी बार बदला है शायद ये इक मिसाल है , खुद अपनी बात को झूठ साबित करते रहे हैं। हर दिन नई घोषणा करना काफी नहीं उनका सफल होना ज़रूरी है। स्वच्छ भारत की दशा ये है कि राजधानी में कूड़े के पहाड़ के गिरने से लोग दबकर मर जाते हैं मगर आपको ये किसी और का काम लगता है , क्या दिल्ली उस भारत का हिस्सा नहीं जिसको स्वच्छ भारत करना है। सांसदों को अपना नेता नहीं चुनना है , अगले चुनाव में कौन सांसद होंगे उन पर नहीं आपकी मर्ज़ी है अगला प्रधानमंत्री भी आपको ही बनाया जाये। विधायक नहीं चुनते मुख्यमंत्री कौन हो आप चार लोग तय करते हैं , राष्ट्रपति तक आपकी मर्ज़ी से बनाया जाता है। परिवारवाद और जातिवाद को बुरा बताते थे आप और व्यक्तिवाद स्थापित करना चाहते हैं। आपने देश में आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं और अधिकार देने को क्या किया है , कुछ भी नहीं। देश की आधी आबादी को पीने का पानी साफ नहीं मिलता , शिक्षा की हालत भी बदहाल है , स्वास्थ्य सेवा की दशा बद से बदतर हुई है। बेतहाशा खर्च कर सरकार अपना झूठा गुणगान करती है क्योंकि वास्तविकता कुछ अलग ही है। हर योजना कागज़ों तक है , खुले में शौच के दावे की पोल खुलती है जब शौचालय बने हुए दिखाते हैं जहां पानी ही नहीं। स्कूल जिस देश में शौचालय में बच्चों की क्लास लगती हो का सच भी आपको विचलित नहीं करता है। आपने अपने दल के सांसदों को गांव गोद लेने को कहा मगर असलियत में खुद आपने जिस गांव को गोद लिया उसकी हालत नहीं मालूम। सचिन तेंदुलकर जी ने दो गांव लिए गोद मगर किया कुछ भी नहीं ये सब ने टीवी पर देखा। यही हालत सब जगह है। आपने देश की सरकार को संविधान और लोकतान्त्रिक ढंग से नहीं किसी कंपनी के सी ई ओ या मालिक की तरह चलाना चाहा है जिस के लिए अपने हित और सफलता ही मकसद होता है। लोकतान्त्रिक मर्यादाओं की अनदेखी कर और हर जगह अपराधियों से गठबंधन कर आप किस दिशा को जाना चाहते हैं। आपने नया बनाया कुछ भी नहीं क्योंकि आपका पूरा ध्यान पुराने को ध्वस्त करने पर है। विकास की बात करने से क्या होगा जब आप विकास के नाम पर विनाशक जैसे काम करने लगे हैं।  सब से अधिक दुर्भाग्य की बात ये है कि आपको खुद अपने इलावा किसी पर भी भरोसा नहीं है। आप पर भरोसा कैसे किया जाये हम नहीं जानते , आपकी हर बात खोखली साबित होती रही है।
                     आपको इक सार की बात कहना चाहता हूं। सब को बदलने की बात करना छोड़ खुद अपने आप को बदल लिया जाये तो दुनिया बदल सकती है। धर्म उपदेशक भी खुद को नहीं बदलते औरों को बदलने को उपदेश देते रहते हैं। नतीजा कुछ भी नहीं मिलता।  


No comments: