Wednesday, 8 January 2014

मृत्त्युलोक का सीधा प्रसारण ( तरकश ) डा लोक सेतिया

यमराज उस परेशान आत्मा को लेकर सीधे धर्मराज जी की कचहरी में आये। चित्रगुप्त ने बही खाता खोल कर उनके कर्मों का विवरण प्रस्तुत किया। और धर्मराज को बताया कि इस आत्मा ने सदा सदकर्म ही किये हैं जीवन भर , मगर हमेशा ही परेशान होते रहे हैं धरती पर लोगों को अपकर्म करते देख कर। लेकिन इनके मन में ईश्वर के न्याय के प्रति हमेशा सवाल उठते रहे हैं। यहां तक कि मरने के बाद जब यमराज इनकी आत्मा को ला रहे थे तब भी इनकी आत्मा यही सोचती आ रही थी कि अगर ईश्वर से सामना हुआ तो पूछेंगे कि अपनी बनाई हुई सृष्टि की व्यवस्था को सुधारने का कोई कारगर उपाय क्यों नहीं करते आप हे ईश्वर। परेशान आत्मा की बात समझ धर्मराज जी को भी उचित  लगा उसे उसके सवालों के जवाब स्वयं भगवान से दिलवाना। ईश्वर के निजि कक्ष में धर्मराज जा पहुंचे उस आत्मा को साथ लेकर , ईश्वर ने जानना चाहा ऐसी क्या परेशानी है जो आपको मेरे पास आना पड़ा। धर्मराज बोले कि इस आत्मा के कुछ सवाल हैं जो सुन कर मुझे भी चिंता करने वाले ही लगे और उनका जवाब आप ही दे सकते हैं। ये आत्मा आपकी बनाई सृष्टि की खराब व्यवस्था से बेहद चिंतित है और चाहती है आप उसको सुधारने को कोई कारगर उपाय शीघ्र करें। ईश्वर कहने लगे हे परेशान आत्मा आपकी परेशानी सही है और मैं भी बहुत ही बेचैन रहता हूं इस बात को सोच सोच कर। मगर कोई उपाय सूझ ही नहीं रहा है। जिनको सत्य का धर्म का मार्ग दिखलाना था सभी को वही खुद भटक गये हैं , लोग उनको धर्मगुरु मान सर झुकाते हैं जबकि वो लोभ मोह अहंकार में डूबे रहते हैं। बात एक कंस या एक रावण की होती तो मैं खुद अवतार लेकर उसका अंत कर देता , मगर वहां तो तमाम कपटी लोग खुद को मेरा ही अवतार घोषित करने लगे हैं और करोड़ों लोग उनके झांसे में आ उनकी जयजयकार करते हैं। अब इतने लोगों के इस अंधविश्वास का अंत कैसे करूं और कैसे सच और झूठ उनको समझाऊं ये मेरी भी समझ में नहीं आ रहा है। परेशान आत्मा बोली ईश्वर मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं , हमारे देश में जब किसी समस्या का कोई हल नज़र नहीं आता है तब सरकार एक प्रतिनिधिमंडल अपने नेताओं एवं अफ्सरों का विदेश भेजती है कि वे देख कर आएं कि उस देश में ये सब क्यों नहीं है। क्या उपाय किया हुआ है उन देश वालों ने। वो अलग बात है वो नेता अफ्सर वहां ये जानने का प्रयास नहीं करते , बस सैर सपाटा कर लौट आते हैं। आने के बाद कोई एक नई समस्या खड़ी कर देते हैं , पहले चल रही कितनी ही असफल योजनाओं जैसी एक और योजना प्रस्तुत कर , जिसका कार्यभार उनको सौंप दिया जाये। नतीजा वही ढाक के तीन पात , लेकिन आप ऐसा नहीं हो इसलिये अपने ऐसे ईमानदार देवी देवताओं को पृथ्वी का भ्रमण करने को भेजें जिनको अपनी पूजा , अपने नाम पर बनाये मंदिरों के चढ़ावे और वहां आये भक्तों की भीड़ को देख प्रसन्न होने की बुरी आदत नहीं हो। जो किसी पापी या अधर्मी को क्षमा नहीं करते हों प्रार्थना सुनकर।
                   ईश्वर बोले परेशान आत्मा आपने मेरे सामने उस लोक से लेकर इस लोक तक की सही तस्वीर प्रस्तुत कर दी है। मैं आपको अपना विशेष सलाहकार नियुक्त करना चाहता हूं इस समस्या को समाप्त करने के उपाय खोजने के काम में योगदान दें आप भी। परेशान आत्मा बोली कहीं आप वही जल्दबाज़ी तो नहीं करने जा रहे जो हमारे प्रदेश में मुख्यमंत्री किया करते हैं। जिसको अपना विश्वासपात्र समझ ओ एस डी नियुक्त करते हैं वही उनके नाम पर सत्ता के जमकर दुरूपयोग करता है। सब से अधिक भ्रष्टाचार , घोटाले ऐसे ही लोग करते हैं , आप ऐसे आंख मूंद किसी का भी ऐतबार नहीं कर सकते। अधिकार मिलते ही सब बदल जाया करते हैं , मुझे खुद अपने आप पर भरोसा नहीं कि आपने मुझे इतनी शक्ति दे दी तो मैं क्या करूंगा , हो सकता है आपको भी धोखा देने लग जाऊं , इस कलयुग में कुछ भी संभव है हे ईश्वर। ये सुन ईश्वर की चिंता और अधिक बढ़ गई , उन्होंने पूछा परेशान आत्मा आपने तो मुझे दुविधा से निकालने की जगह मेरी दुविधा को और बढ़ा दिया है। आप क्या ये कहना चाहते हैं कि मैं अपने ही घर के सदस्य सभी देवी देवताओं पर भी भरोसा नहीं किया करूं। भला मैं ऐसा किस तरह कर सकता हूं , इस कदर अविश्वास करके हम एक साथ कैसे रह सकते हैं। परेशान आत्मा ने कहा कि अगर मेरी बात का बुरा नहीं मानें तो मैं आपको सुझाव दे सकता हूं। ईश्वर बोले अवश्य बताओ और अगर उचित लगा तो हम उस पर अमल भी करेंगे। परेशान आत्मा ने कहा हे ईश्वर आप सब कि पल पल की निगरानी की व्यवस्था करें। ईश्वर बोले ये सच है कि ऐसा माना जाता है कि मुझे सब की हर बात की खबर है , मगर मैं ऐसा नहीं कर सकता हूं , मुझे एक सीमा से अधिक किसी की निज्जता में झांकना अनुचित प्रतीत होता है। पल पल की बात पूछना या जानना तो मुमकिन नहीं है किसी भी तरह , आखिर मुझे भी कुछ समय चाहिये खुद के लिये। परेशान आत्मा कहने लगी मैं उपाय बताता हूं जिससे आपको कोई परेशानी नहीं होगी न किसी को कुछ मालूम होगा कि उनकी निज्जता में कोई दखल है , सब गोपनीय तरीके से होगा , आपको छोड़ किसी को भी कोई भनक नहीं लगेगी। बस आपको ये पुराने ढंग छोड़ नई तकनीक का सहारा लेना होगा। ईश्वर हैरान हो कर बोले बताओ ऐसी क्या तकनीक हो सकती है। तब परेशान आत्मा ने बताया बिग बॉस नामक टीवी शो में यही होता है , बिग बॉस किसी को दिखाई नहीं देता मगर उसको सब नज़र आता रहता है। वह आदेश देता है , निर्देश देता है , कैमरे और माईक से पल पल की खबर रखता है। घर में रहने वाले अगर चाहें भी झूठ नहीं बोल सकते , ज़रूरत होने पर उनको उनकी असलियत दिखाई जा सकती है। आप मृत्युलोक से अपने पास सीधा प्रसारण करवाने की व्यवस्था करें , और खुद देखते रहें सब कुछ। आपको नज़र आएगा किस तरह नेता , अफ्सर देश को लूट रहे हैं , सरकार और प्रशासन कितना अमानवीय कर्म कर रहे हैं। जब सभी के अपकर्मों को आप खुद देख सकेंगे तब अपने सभी देवी देवताओं को भी निर्देश दे सकेंगे कि वे अपने अपने भक्तों को अपकर्मों की कड़ी सज़ा दें न कि अपनी स्तुति से प्रसन्न हो उनके अपराध क्षमा करते रहें। जब ईश्वर ने अपने लोक में नये टीवी चैनेल स्थापित करने की योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी तब परेशान आत्मा ने कहा हे ईश्वर एक अंतिम बात और बतानी ज़रूरी है। सावधान रहना , अपना चैनेल किसी मुनाफाखोर को ठेके पर कभी मत देना वर्ना कोई हमारे देश के टीवी चैनेलों की तरह झूठे विज्ञापनों द्वारा पैसा कमाने के लालच में अपने ध्येय से भटक सकता है। ईश्वर ने इस कार्य के लिये महाभारत वाले संजय की सेवायें लेने का निर्णय लिया है। नेता , अपराधी , पाप - अधर्म करने वालों के साथ साथ धर्मोपदेशक भी संभल जायें , क्योंकि ईश्वर न केवल खुद सब देखेगा बल्कि इनके अपकर्मों को सभी को दिखाया भी करेगा , बिग बॉस की तरह। अब पता चलेगा असली बिग बॉस कौन है।  

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