Wednesday, 9 December 2020

किसी को माया किसी को राम-नाम दिया ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

 किसी को माया किसी को राम-नाम दिया ( तरकश ) 

                                            डॉ लोक सेतिया 

उसने सबको दिया है किसी की चाहत धन दौलत की थी उनको सब कुछ मिला सुनहरे भविष्य की शानदार इमारत बनाने को। बाकी जिनको इस जन्म की नहीं अगले जन्म ख़ास घराने में जन्म मिलने की चाहत है उनको राम नाम जपने को माला थमा दी है। भजन कीर्तन मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरूद्वारे जाकर ऊपर वाले से मुक्ति मोक्ष अथवा जन्नत स्वर्ग मांगने को है। अब किसको क्या मिला है ये नसीब की बात है। काम मिल गया सभी को कोई अपने कारोबार को लाख करोड़ गुना बढ़ाने में लगा है कोई ताली थाली बजाने दिन में दिया जलाने का महान कार्य कर रहा है। भगवान हैरान है उसके धर्मस्थल जाने से कोरोना होने का डर भगवान बचा सकता है के विश्वास से अधिक होने के बावजूद अस्पताल नहीं मंदिर मस्जिद बनाने लगे हैं। हर शाख पे उल्लू बिठाने लगे हैं रुलाकर औरों को मुस्कुराने लगे हैं। उनकी कहानी बताने लगे हैं समझने में जिनको ज़माने लगे हैं लो आज खुद खुद राज़ की बात खोलने आने लगे हैं सच क्या है झूठ क्या फ़रमाने लगे हैं। महल शासक अपने बनाते हैं लोग बेघर बदनसीब कहलाते हैं झौंपड़ी सलामत रहे खैर मनाते हैं। उनके दफ़्तर बनते जाते हैं संसद वाले जनसेवक कहलाते हैं मुफ्त का माल है देश का खज़ाना मौज मनाते हैं। लोग फुटपाथ पर सर्द रातें बिताते हैं नेताओं को संसद भवन भी छोटा पुराना लगता है बड़ी जल्दी जल्दी बनाना है अदालत वाले पूछते हैं इतनी जल्दी क्या है खामोश हो मन की करते जाते हैं। अर्थव्यवस्था उनके लिए खराब नहीं क्योंकि उनकी किसी बात का कोई जवाब नहीं।  कौन कहता है बिगड़े नवाब नहीं इन के कारनामों का कोई हिसाब नहीं।
 
राजनेता अधिकारी धनवान लोग उद्योपति बड़े कारोबार करने वाले जानते हैं उनका भगवान ऊपरवाला नहीं है सत्ता पर जो भी जब भी विराजमान है वही उनको बनाता है मिटा भी सकता है। उस को खुश रखना है वही जितना कोई उसको देता है उस से कई गुना देने वाले को दिलाता है। भगवान के मंदिर का चढ़ावा सभी भक्तों में बांटा जाता है उपरवाले के दर कोई क्या देकर क्या पाता है न कोई बही है न कोई खाता है। मंदिर मस्जिद लोग जाते हैं आरती पूजा इबादत कर उसको मनाते हैं कोई शिकायत अपनी सुनाते हैं कोई मांग अपनी रखते हैं वापस घर आते हैं। भला रईस लोग क्या उस उपरवाले से मांगें क्या शिकायत करें क्यों धर्म की शिक्षा समझ जितना है उस पर संतोष करें गरीब दुखियारे लोगों की सहायता करें। उनको ये सब नहीं करना है उनको जीना है बेमौत नहीं मरना है। लेकिन हमारी बात उलटी है। दो शेर अर्ज़ हैं।
 

                                          इस कदर भा गया है कफस हमको
                                          अब रिहाई की हसरत नहीं करते।

                                        हम भरोसा करें किस तरह उन पर
                                        जो किसी से भी उल्फत नहीं करते।

 
आजकल दुनिया के दो भगवान हैं अमीरों का भगवान सरकार गरीबों का ईश्वर का कोई अवतार। आम लोग होना बदनसीबी है विधाता की मर्ज़ी है सत्ता की भी अपनी खुदगर्ज़ी है जनता का जनता होना सरकार का सरकार होना है। शहंशाह को हंसना है बस तभी आमजन को रोना है आदमी आदमी नहीं बस खिलौना है हर खिलौना इक दिन चूर होना है। ये दोनों भगवान जानते हैं बनाया है किसने पहचानते हैं मगर करते वही जो खुद ठानते हैं पानी मिलाकर दूध में अलग अलग करने को ताकत की चलनी से छानते हैं। जो लोग ज़्यादा जानते हैं भगवान को कम पहचानते हैं। भगवान तुमने हम पर बड़ा ज़ुल्म किया है कहने के बाद कोई भूल हुई माफ़ करना दया की भीख मांगते हैं। ख़लनायक होते हैं जो डराते धमकाते हैं छीनते हैं अगर हम झुककर देते नहीं हाथ जोड़कर उनसे रहम की उम्मीद करते हैं। ऐसे ऐसे खुदा बनाये हैं किस किस से धोखे खाये हैं बस समझना है और समझाना है। खुदाओं को सबक सिखाना है खुदा तुमको नहीं माना है तुझको हमने आज़माना है। नहीं सुंनना कोई बहाना है खुदा हो भगवान हो ईश्वर अल्लाह यीशु जो भी हो ज़ालिम के ज़ुल्म को मिटाना है सब करते हो ये कर दिखाना है। जो सही इंसाफ नहीं करे ज़ालिम को ज़ुल्म ढाने दे ऐसा भगवान मंज़ूर नहीं है। इक शायर कहता है उनसे जो मज़लूमों गरीबों भूखे बेबस लोगों की विनती नहीं सुनता उन को जीने नहीं देता मांगने पर मौत भी नहीं देता उनको ये दो और शेर अर्ज़ है। 

                          तुम खुदा हो तुम्हारी खुदाई है

                          हम तुम्हारी ईबादत नहीं करते। 

                         ज़ुल्म की इन्तिहा हो गई लेकिन

                         लोग फिर भी बग़ावत नहीं करते।

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