Monday, 8 June 2020

स्वर्ग में सेवक नहीं नर्क में शासक ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

  स्वर्ग में सेवक नहीं नर्क में शासक ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया 

     क्या ख़्वाब था कोरोना को अवसर समझने की बात करते करते गहरी नींद आई तो कोरोना सपने में खुद दर्शन देने चले आये। राजन कोरोना ने संबोधित किया , आपने कमाल ही कर दिया है मेरी शान को आपने खुद अपनी शान की तरह से ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। मुझे खुश किया है जो भी वरदान चाहो मांग सकते हो आपको अवश्य मिलेगा। नेता जी ने विश्व में परचम लहरा लिया था अब लगा स्वर्ग नर्क पर भी उनका आधिपत्य स्थापित हो जाये तो कितना अच्छा हो। कोरोना ने कहा आपको किसी एक का चुनाव करना पड़ेगा स्वर्ग में आपको सेवक बनकर रहना मंज़ूर है अथवा नर्क में शासक बनकर रहना चाहते हैं। नेता जी उलझन में पड़ गये सेवक होने से कब की तौबा कर चुके हैं मगर नर्क के शासन में जाने क्या होगा। कोरोना उनकी मन की बात जान गया और कहने लगा राजन स्वर्ग में आपको केवल सच बोलना होगा और इक झूठ पकड़ा गया तो सेवक भी नहीं रहोगे मगर नर्क में हज़ार झूठ भी आपको माफ़ हैं वैसे भी नर्क में आपको चाहने वाले तमाम लोग मिलेंगे कुछ जानते हैं कुछ जानने को उत्सुक हैं। तभी कोई आवाज़ हुई जैसे बिजली गिरी कहीं और नींद खुल गई। लेकिन नेता जी को स्वर्ग नर्क के शासन का आईडिया जंच गया और सुबह होते ही उन्होंने यही घोषणा कर दी अंतरिक्ष के मिशन की तरह चांद और मंगल अभियान जैसा मिशन 2020 स्वर्ग नर्क की खोज को लेकर भेजना तय है।
     
     नामुमकिन कुछ भी नहीं है चुनावी सभा में भाषण देते हुए नेता जी ने सब देशवासियों को इक नया मिशन 2020 का ऐलान किया है। आपको स्वर्ग नर्क को देखना है बताओ किस किस को देखना है मरने के बाद कहां जाना चाहिए सभी को मालूम होना चाहिए , बताओ होना चाहिए। चांद मंगल सबको पता है मगर स्वर्ग नर्क कोई नहीं जानता कहां हैं। हमारे साईंसदान और पंडित ज्योतिष जानकर मिलकर इस की खोज कर रहे हैं। आपको नहीं मालूम इसका कितना महत्व है हम जो भी खोज करते हैं उसका पेटंट अपने नाम करवा सकते हैं और उसके बाद उसका उपयोग पर्यटन से लेकर वहां जाने की आवास की व्यवस्था करने से होने वाली आमदनी देश का नाम ऊंचा करने और विकास को बढ़ावा देने पर खर्च की जा सकती है। जो कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी हमने उसे कर दिखाने का संकल्प लिया है। बजट की क़र्ज़ की व्यवस्था की बात मत करना जब अर्थव्यवस्था डूबने लगती है तो कोई ऐसा ही बड़ा कदम उठाना पड़ता है। जुआ खेलना अच्छा है खराब है कुछ भी है ये बाज़ी शतरंज की नहीं है मोहरे मात खा सकते हैं मगर जब कोई शकुनि मामा पासे फैंकता है तब वही होता है जो उसकी मर्ज़ी होती है। ये भी जुआ ही है मगर इस में मिशन की सफलता से हमारा देश विश्व गुरु ही नहीं महाशक्ति बन सकता है। अभी मेरे साथ महापंडित जी हैं जो आपको विस्तार से स्वर्ग नर्क की बात समझाएंगे।

        महापंडित जी ने बताना शुरू किया , स्वर्ग वही है जो आपके सामने इस धरती पर आपको नज़र आता है जिस में नेता जी जैसे लोग रहते हैं धनवान लोग उद्योगपति बड़े बड़े धंधे वाले कर्म कुछ भी नहीं करते हैं फल सभी उनकी झोली में होते हैं। नर्क भी आपको मालूम है देश की जनता ऐसे मतलबी लोगों पर भरोसा करती है और हमेशा नर्कीय जीवन जीने को विवश है। स्वर्ग नर्क मिलता है अच्छे बुरे कर्म से समझाया गया है मगर देखने को कुछ और मिलता है। स्वर्ग नर्क की खोज करना ही काफी नहीं होगा वहां का शासन भी अपने हाथ में होगा तभी बात बनेगी और नेता जी का आकाश से ऊंचा ख्वाब है स्वर्ग नर्क दोनों ही जगह अपनी सरकार स्थापित करना। अर्थात ऊपर जो भी दुनिया है वहां भी चुनाव करवाने और अपनी सरकार बनवाने की योजना है। अगर ये असंभव संभव हो गया तो नेता जी आपको अपनी इच्छा से जहां चाहोगे वहीं भेजने का वादा करेंगे अगर आपने उनको वोट देकर यहां राज्य में जितवाया और सरकार बनवाई तो आपको सीधे स्वर्ग भेजने का उपाय सोचा हुआ है। नेता जी की योजना है नर्क के शासक खुद बनकर स्वर्ग में अपने खास भरोसे के व्यक्ति को पदभार संभलवा दोनों हाथ में लड्डू रखने हैं।

      ये नेता जी का ही असर है जो लोग उनकी हर बात पर वाह वाह कहते हैं। सोचते तक नहीं कि चाहे स्वर्ग हो या नर्क हो मिलेगा तो मरने के बाद ही। ज़िंदा रहते कोई स्वर्ग नहीं जा सकता और नर्क भी मौत के आने के बाद ही मिलेगा। हां अच्छी बात है नेता जी सभी को मर्ज़ी जानकर भेजा करेंगे मगर कोई कभी उनका विरोध करेगा या आलोचना तब उसके लिए मर कर भी कहीं भी जगह नहीं होगी। उनको स्वर्ग नर्क दोनों के दरवाज़े बंद मिलेंगे। नेता जी को लगता है कोरोना को अवसर से भी बढ़कर अपने लिए उपलब्धि साबित किया जा सकता है।

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