Saturday, 1 December 2018

मेरी ज़िंदगी से सीखो सबक ( चिंतन ) डॉ लोक सेतिया

     मेरी ज़िंदगी से सीखो सबक ( चिंतन ) डॉ लोक सेतिया 

     इक बोधकथा है जिसमें कोई किसी के पास काम करता है और जब कई साल बाद घर वापस जाने लगता है तो उस से कुछ सलाह देने को कहता है और वो व्यक्ति तीन सलाह देता है जिनका अर्थ उसे बाद में समझ आता है। आज मैं भी अपने जीवन भर की असफलताओं को सोचता हूं तब समझ आया है मुझे क्या करना चाहिए था और क्या नहीं करना चाहिए था। और देर से ही सही मैंने अब ये तय कर लिया है कि उन बातों से सबक लेना है और भविष्य में फिर किसी दोराहे पर रुकना नहीं है। 
          मैं हमेशा अनचाहे बंधन की तरह इक कैद में रहता आया हूं और नहीं चाहते हुए भी उन राहों पर चलता रहा जिन पर कभी कोई कभी कोई मुझे चलने को कहता रहा है। मुझे खुद को जंजीरों से मुक्त करवाना चाहिए था जो किया नहीं और सोचता रहा कोई मसीहा मुझे आज़ाद करवाएगा। किसी के कहने पर गलत दिशा को जाना उचित नहीं होता है इस की जगह उनको अपनी राय और समझ से सहमत करवाने का कार्य करता तो शायद कोई बीच का रास्ता बन सकता था बिना टकराव अथवा अपने निर्णय पर चलने से मन में ये पछतावा नहीं होता कि मुझे अपने विवेक के अनुसार चलना था तब अपनी नाकामी का दोष खुद पर लेते हुए कोई खेद नहीं होता। कोई आपको सलाह दे सकता है कुछ करने की मगर उस काम की सफलता या नाकामी आपको अपनी लगती है किसी दूसरे की नहीं। आत्मविश्वास होना ज़रूरी है मगर अभिमान नहीं और अति आत्मविश्वास जो ज़िद की तरह हो उस से बचना चाहिए। समय के अनुसार सोच समझ कर निर्णय करना चाहिए और जल्दबाज़ी में भावावेश में आवेश में आकर फैसला नहीं करना चाहिए। पिछली बातों से सीख कर उनसे आगे बढ़ना चाहिए और उन पर बार बार निराश नहीं होना चाहिए। ज़िंदगी को हर दिन फिर से शुरुआत करने का अवसर समझना चाहिए बीते समय में जीना उचित नहीं है। कोई भी सभी को खुश कर नहीं सकता है इसलिए सबके साथ संबंध अच्छे रखना अच्छी बात है मगर अपने मर्ज़ी को छोड़ औरों के अनुसार जीना कभी नहीं चाहिए। जो आपको आपकी ख़ुशी से वंचित करते हैं वो आपके नहीं हो सकते बल्कि किसी स्वार्थ से साथ हैं ऐसे में उनकी अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए। समय बदलता रहता है मगर कोई भी पंडित या ज्योतिष विज्ञान कभी सही मार्गदर्शन नहीं दे सकते हैं उनका कारोबार आपको उलझाने का है जो आपको कभी सामने दिखाई नहीं देता है। अगर आपको भाग्य और नियति पर विश्वास भी हो तो कोई इंसान किसी इंसान का भाग्यविधाता नहीं हो सकता है। उनको खुद अपना कल क्या होने वाला है की जानकारी नहीं होती जो दुनिया को भविष्यफल बताते हैं।

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