Sunday, 12 August 2018

चौकीदारों का एक समान वेतन और रैंक ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

 चौकीदारों का एक समान वेतन और रैंक ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

         आपको फिर से याद दिलवाता हूं देश में गधों के भी अधिकार हैं। कवि लोग तो कहते हैं गधों के ही अधिकार हैं , घोड़ों को मिलती नहीं है घास , गधे खा रहे हैं चववनप्राश। मगर नहीं गधों के लिए नियम हैं , गधों को रात अंधेरे में बरसात और उमस के मौसम में काम पर लगाना अपराध है। उनको दिन में भोजन अवकाश और आराम करने देने का भी हक है। जॉनी वॉकर जी तो दिल्ली जाने की भी बात करते थे अपने गधे की जो सब गधों का लीडर था। उस पर दो रचनाएं लिखी जा चुकी हैं मुझे खेद है अभी तक मुझे चौकीदारों की बात पर लिखने की बात कैसे ध्यान में नहीं आई जबकि चार साल से चौकीदार का युग ही जारी है। इस देश में सब से अच्छा काम केवल और केवल चौकीदारी है। अबकी बारी उनकी बारी है।

      देश के चौकीदारों का भी एक संगठन है मुझे पता नहीं था जब तक टीवी चैनल पर हाथ में लाठी और टोर्च लिये चौकीदार की फोटो वाले बैनर उठाये लोगों को अपनी उचित मांगे मनवाने दिल्ली जाने की खबर सुनी और देखी नहीं थी। आप क्या चाहते हैं पूछने पर जवाब देते हैं बराबरी का वेतन और अधिकार। हर चौकीदार को संविधान समानता का हक देता है। अब चौकीदार कोई भी कहीं का भी हो , गांव का हो चाहे शहर का या बेशक आधुनिक आवासीय सोसाइटी का हो , किसी दुकान का हो या कंपनी की मिल का। कुछ भी और नहीं चाहते केवल बराबरी की बात कहते हैं। एंकर नहीं समझा माजरा क्या है। कहने लगा आपको अपने अपने मालिक से बात करनी चाहिए। चौकीदार बोले बड़े नासमझ हो मालिक कौन होते हैं हमारा वेतन सुविधा और क्या करना क्या नहीं करना तय करने वाले। देश का चौकीदार जो है उसने कब जनता से इजाज़त ली किसी बात की। क्या शान से रहता है कितने देशों में घूमता फिरता है संसद या पीएमओ दफ्तर कितनी बार गया कोई पूछता है। क्या वादा किया था जब बना था देश का चौकीदार निभाया कब है। वही चौकिदार बताएगा उसका वेतन क्या हो हमारा भी उतना ही होना चाहिए। हम धन्यवाद करना चाहते हैं कि किसी ने तो हमारे काम को महान कार्य समझा , मगर इक ज़रा सी शिकायत भी है कि हमारे नाम को बदनाम भी किया और सागर की गहराई में डुबोया भी है जो हमें कदापि मंज़ूर नहीं। चौकीदार को झूठ नहीं बताना चाहिए और ये कैसा चौकीदार है जिसका संसद में दिया भाषण भी संसदीय करवाई से निकालने की नौबत आ गई।

         जैसे संगीत कला कारोबार वकील डॉक्टर अध्यापक अभिनेता तक खानदानी लोग होने का दम भरते हैं , उसी तरह से हमारा चौकीदारी का खानदान भी ऊंचा समझा जाता है। चुपके-चुपके फिल्म का नायक खुद शिक्षित है घास फूस का डॉक्टर भी है मगर नायिका को भाता है चौकीदार भेस का धर्मेंदर ही। नकली ही सही उसने चौकीदार बनकर चोरी करने वालों को भगाया तो नहीं। चौकीदार बनना है तो ईमानदारी पहली शर्त है , सच बोलना पड़ता है भले चोर कोई भी हो। अपने ही घर में चोरी करने वाले लोग बदनाम चौकीदार को किया करते हैं। कोई चौकीदार ही चौकीदार की कठिनाई समझ सकता है। ये कैसा चौकीदार है जो रात भर गहरी नींद में सोया रहता है और चार साल बाद जगता है तो घर का सभी सामान चोरी हो चुका है। ऐसे चौकीदार को कौन सज़ा दे जिसका थानेदार अपना हो वकील अपना हो अदालत खुद की और न्यायधीश भी वही हो।

        इस 15 अगस्त पर चौकीदार को युवा वर्ग को रोज़गार हासिल करने को अपना आज़माया नुस्खा बताना चाहिए। सब को पकोड़े बनाने नहीं आते चाय भी सब उन जैसी नहीं बनाते मगर उनकी डिगरियों से बेहतर शिक्षा बहुत युवकों ने पाई है उन्हें चौकीदार बनने से कोई परहेज़ नहीं है। दुनिया देख कर स्तब्ध है जिस देश में चौकीदार की ऐसी निराली शान है उसके मालिक कितने दौलमंद हैं। कोई नहीं यकीन करेगा भारत में गरीबी है भूख है या लोग बेइलाज मरते हैं और शिक्षा भी इतनी महंगी है कि पढ़ने जाना मुमकिन नहीं।

            तू इधर उधर की न बात कर , ये बता कि काफिला क्यों लुटा ,

                हमें रहजनों से गर्ज़ नहीं , तेरी रहबरी का सवाल है।

       दिल का खिलौना हाय टूट गया , कोई लुटेरा आके लूट गया।  चौकीदार जागते रहो कहने की जगह सोते रहो समझाता रहा ताकि चोर चोरी कर सकें। बात मौसेरे भाइयों तक आ ही गई है। ये राफेल विमान की खरीदारी है या चौकीदार की बटमारी है। चौकीदार रखवाली करने को होते हैं इधर खरीदारी करते करते बिकवाली करने लग गए हैं। चौकीदार मालिक बन बैठे मालिक को भिखारी बना दो किलो चावल एक किलो दाल की भीख देने का ऐलान करते हैं। 

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