Monday, 21 July 2014

झूठ से दोस्ती नहीं करते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

झूठ से दोस्ती नहीं करते ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

झूठ से दोस्ती नहीं करते ,
हम कभी बस यही नहीं करते।

इक खुदा ने सवाल पूछा है ,
आप क्यों बंदगी नहीं करते।

साथ जीना है साथ मरना भी ,
बस तभी ख़ुदकुशी नहीं करते।

बेवफ़ा हम उन्हें कहें कैसे ,
बेवफ़ाई वही नहीं करते।

आज कहने लगे हमें आकर ,
आप क्यों आशिक़ी नहीं करते।

क्यों बुलाते हो तुम रकीबों को ,
यार से दिल्लगी नहीं करते।

याद "तनहा" उन्हें ज़माना सब ,
बात पर आपकी नहीं करते।