Saturday, 4 January 2014

आईना बेमिसाल ( व्यंग्य ) डॉ लोक सेतिया

आज मैं इक नये मंदिर में खड़ा हूं , जहां किसी भगवान की कोई मूर्ति नहीं है , हर तरफ दर्पण ही दर्पण हैं। हर दर्पण अपनी तरह का है , सब की अपनी अपनी विशेषता है। एक ऐसा दर्पण है जिसमें आप जिस शहर जिस गांव जिस जगह को देखना चाहते हैं वही आपको दिखाई देता है। दूसरा दर्पण आपको फिर से अपना बचपन भी दिखला सकता है और ये भी कि बीस वर्ष बाद आप कैसे नज़र आयेंगे। देखते देखते मैं आईनों के देवता के सामने आ गया हूं , वहां जो आईना टंगा है उस पर लिखा हुआ है , आईना बेमिसाल। मैं उस देवता से सवाल करता हूं कि इस बेमिसाल आईने की विशेषता क्या है। वो बताता है कि इसमें सब कुछ अच्छा दिखाई देता है। बदसूरत से बदसूरत को भी ये सब से खूबसूरत दिखलाता है , पतझड़ भी इसमें बहार नज़र आती है। मुझे लगा कि ये तो सरकार के बजट जैसा , राजनैतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र जैसा और प्रशासन की फाईलों जैसा है , उनमें भी जनता को खुश करने को यही तो होता है। मैंने आईनों के देवता से वही आईना मुझे देने को कहा , देवता ने पूछा उस आईने से जाना चाहते हो इसके साथ इसके देश में। आईना बेमिसाल मान गया और देवता ने मुझे देते हुए हिदायत दी कि इसका सही उपयोग ही करना। जब लोगों को पता चला कि मेरे पास ऐसा दर्पण है तो बहुत सारे लोग उसे मांगने लगे हैं। हर किसी का दावा है कि वही इसको पाने का हकदार है। पर्यावरण विभाग वाले चाहते हैं कि उन्हें ये मिल जाये ताकि वो हर तरफ हरियाली दिखा अपने झूठे आंकड़े सही साबित कर सकें। प्रशासन भी इसको लेकर वो विकास दिखाना चाहता है जो अभी तक उसने फाईलों में किया दिखा रखा है। पुलिस वाले इसको अपने हैड आफिस में लगाना चाहते हैं कानून और न्याय व्यवस्था को चाक चौबंद दिखाने के लिये। वो चाहते हैं कि दर्पण में नज़र आये कि पुलिस वाले रिश्वत नहीं लेते न ही शराब पी कर ड्यूटी पर गलत आचरण ही करते हैं। नगरपालिका के लोग चाहते है कि उनको ये मिल जाये ताकि वो दिखा सकें कि कहीं पर भी गंदगी के ढेर नहीं हैं , कोई सड़क टूटी फूटी नहीं है , किसी गली में भी अंधेरा नहीं है और सब को साफ़ पीने का पानी मिल रहा है। सत्ताधारी दल चाहता है इसको मुझसे मुंह मांगी कीमत में खरीद कर जनता को दिखाना कि उसके शासन में कोई भ्रष्टाचार नहीं है , महंगाई नहीं है , लोग असुरक्षित नहीं हैं , कोई भूखा नहीं है , कोई बेघर नहीं है , कोई अशिक्षित नहीं है न ही कोई बेरोज़गार है कोई भी। जो जो वादे किये थे जनता से वो सब के सब पूरे कर दिये गये हैं। और ये देख कर लोग फिर से सत्ता सौंप दे। जनता को नज़र आये कि सब को मूलभूत सुविधायें मिल रही हैं , प्रशासन ईमानदारी से कर्त्तव्य निभा रहा है , कल्याण राशि शत प्रतिशत जनता तक पहुंच रही है , किसी नेता ने चुनाव जीत कर फार्महाउस नहीं बनाये न पैट्रोल पंप उनको मिले हैं। आतंकवाद का नामोनिशान तक मिटा दिया गया है और लोग निडर हो चैन से रहते हैं। जो दुश्मन देश बुरी नज़र से देखता था उसको सबक सिखा दिया गया है , वो फिर कभी इधर देखने का सहस नहीं कर सकता है।
                           इन सभी के सामने मैंने आईने से पूछा कि किसके पास जाना पसंद करोगे तुम। उसने इन में किसी के भी साथ नहीं जाने की बात कह कर इनको वापस लौटने को कह दिया है। उसका कहना है वो कोई झूठ छल फरेब नहीं कर सकता है। ये सब जो करते हैं वो मैं दर्पण कहला कर कभी नहीं कर सकता हूं। आईना बेमिसाल चाहता है मैं उसे बच्चों को ले जाकर दिखाऊं , उनको आशावादी बना सकूं ये देश की खूबसूरत तस्वीर दिखा कर और बताऊं कि आप ही ऐसा कर सकते हो , बस तय कर लो कि जागरुक रहना है और ठान लेना है छिहासठ सालों की निराशा का ख़त्म करना है। आईना बेमिसाल ने मुझसे वादा लिया है उसको देश के गांव गांव गली गली ले जाने का ताकि अपने देश की बदहाली का अंत कर सकूं। अचानक मैं नींद से जाग गया हूं और वो सपना अधूरा रह गया है। मगर मुझे लगने लगा है , अंधेरा छटने को है , सुबह होने वाली है।

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