जुलाई 14, 2026

POST : 2083 हर किसी के अहसान बहुत ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया

       हर किसी के अहसान बहुत ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया 

 
हर किसी के अहसान बहुत
दिल के बाक़ी अरमान बहुत । 
 
सीखना क्या है , सीख लिया 
झूठ - सच की , पहचान बहुत । 
 
बस हमीं रहते घर पे सदा 
आते - जाते महमान बहुत । 
 
हमको महफ़िल में देख वहां  
हो गए सब , हैरान बहुत । 
 
मिल रहा बस इंसान नहीं 
मिल ही जाते शैतान बहुत । 
 
कुछ शराफ़त का मोल नहीं 
बिक रहे हैं , ईमान बहुत । 
 
ग़म - ख़ुशी ' तनहा ' एक यहां 
भावनाएं ,  बेजान बहुत ।     
 

 

1 टिप्पणी:

Sanjaytanha ने कहा…

Bahut pyari ghazal 👌👍