Saturday, 13 July 2019

बनाकर दुनिया क्या मिला ( दास्ताने खुदा ) डॉ लोक सेतिया - ( भाग दो )

   बनाकर दुनिया क्या मिला ( दास्ताने खुदा ) डॉ लोक सेतिया 

                                         (  भाग दो  )

भगवान की कथा नारद मुनि जी से वार्तालाप से शुरू हुई थी। नारद जी को भगवान ने यही देखने को नियुक्त किया हुआ था वैसे उनकी हंसी ठिठौली सभी देवी देवताओं से चलती रहती है। देवियां अपनी बात कहती हैं जानती हैं उनके देवों तक बात पहुंचनी ही है। ऊपर वाले को चिंता थी अपनी दुनिया की इसलिए नारद जी को हालचाल जानने को भेजा था धरती पर। साथ चलते आप भी कहा था नारद जी ने तो बताया था खुद जाकर देखने का जतन किया था मगर धरती पर जिन जगहों पर उनके घर होने का यकीन लोगों को है जब ऊपर वाला देखने गया तो भीतर नहीं जाने दिया। सवाल करते ही बाहर जाने को आदेश जारी कर दिया संचालन करने वालों ने। परिचय देने पर उपहास किया गया कि ईश्वर भला सामने दिखाई देते हैं कभी। मुझे जानते नहीं पहचानते नहीं बस मुझे बेचते हैं उनका कारोबार है अपमानित होकर लौट आया था और लगा था अगर और समझने समझाने की कोशिश करता तो धर्म और भगवान के नाम पर बांटने वाले फसाद ही करवा देते। नारद जी ने जो बताया वो बेहद भयानक था भगवान भी डर गये सुनकर। कोई उपाय सूझ नहीं रहा है समय बिताने को दुनिया बनाने की दास्तान बताने लगे थे।

   सुनकर आपको कुछ भी समझ नहीं आएगा कि जितने भी लोग हैं जिन्होंने ईश्वर खुदा अल्लाह कितने नाम दे रखे हैं भगवान को सभी एकमत हैं कि दुनिया बनाने वाला एक ही है। फिर हर धर्म वालों का अलग अलग अपना परमात्मा क्यों है। चलो नाम कोई भी सब एक उसी की बात करते हैं तो फिर आपस में झगड़ा किस बात का है। अब तो लोग किसी किसी इंसान को सफलता दौलत शोहरत मिलने पर भगवान का दर्जा देने लगते हैं। जाने किस किस का मंदिर बना दिया है हद तो इस बात की है कि अहिंसा की बात कहने वाले गांधी को कत्ल करने वाले का मंदिर बना डाला है। सत्ता धन या अन्य भौतिक चीज़ों की जिनकी हवस की कोई सीमा नहीं है जो पैसे लेकर बाज़ार की वस्तुओं को बिकवाने को इश्तिहार विज्ञापन करते हैं टीवी चैनल और अख़बार सोशल मीडिया उन्हें भी भगवान कहते हुए संकोच नहीं करते हैं। ऊपर वाले को कहना ही पड़ा कि अगर आजकल की दुनिया को ऐसे लोग भगवान लगते हैं तो मुझे भगवान कहलाना पसंद नहीं होगा।

तमाम धार्मिक संस्थाएं दान मांगने की बात करती हैं और दानराशि को वास्तविक धार्मिक कार्य , दीन दुखियों की भलाई गरीबों की सहायता बेघर लोगों को छत देने भूखों को खाना खिलाने रोगियों का ईलाज करवाने पर खर्च नहीं करते हैं बल्कि बड़े बड़े ऊंचे मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरुद्वारे बनाने पर खर्च करते हैं। कोई उनको समझा नहीं सकता भगवान को रहने को महल की ज़रूरत नहीं होती और कोई भगवान को कुछ देने के काबिल नहीं हो सकता है। उसने दुनिया बनाई है कण कण में बसता है किसी जगह बंध कर नहीं रहता है। भगवान को गर्मी सर्दी धूप छांव रात दिन आंधी तूफान बरसात से कुछ फर्क नहीं पड़ता है। उसके एक इशारे पर सब होता है हो सकता है। भगवान के नाम पर कितना कुछ बेकार बर्बाद किया जाता है जिस से लाखों लोगों की भूख प्यास मिटाई जा सकती थी नंगे बदन लोगों को तन ढकने को कपड़ा रहने को आवास मिल सकते थे। भगवान को महसूस होने लगा जैसे ये सब करने के दोषी वह खुद हैं आखिर उन्होंने ऐसा करने कैसे दिया। दुनिया बनाने से पहले इसकी कल्पना की होती तो कभी ये दुनिया नहीं बनाई होती। नारद जी आपके सवाल का जवाब नहीं है मेरे पास कि मुझे दुनिया बनाकर क्या मिला। नारदजी चुटकी लेना नहीं भूले बोले आपको भगवान होने का सबूत देना था शायद जबकि ये दुनिया बनाने से पहले आपका अस्तित्व प्रमाणित था इस से आपके होने नहीं होने का संशय पैदा हुआ है। जो नास्तिक हैं यही कहते हैं अगर खुदा ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु यीशु मसीह है तो ये सब क्यों होने देता है।

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