Sunday, 16 September 2018

ग़ज़ल 220 तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां - डॉ लोक सेतिया "तनहा"

  तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" 

तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां
राजनेता दर्द को समझें कहां। 

जब सितारा टूट कर गिरने  लगा
चुप रहे दोनों ज़मीं औ आस्मां। 

लोग मानेंगे नहीं कोई कभी 
एक नेता आदमी सा था यहां। 

अब किसी से पूछता कोई नहीं
बस्तियों से उठ रहा कैसा धुआं। 

सबको अपनी बात कहनी आ गई
बेज़ुबांनों  की , नहीं कोई   ज़ुबां। 

कर गया कितना अंधेरा मुल्क में
वो जला करता था खुद बन कर शमां। 

कौन था "तनहा" सभी को कर गया
पूछता है धूल से खुद कारवां।

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