Sunday, 16 September 2018

तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

  तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा" 

                                ( ये ग़ज़ल अटल जी के नाम )

तुम बताओ है कहीं ऐसा जहां ,
राजनेता दर्द को समझें कहां। 

जब सितारा टूट कर गिरने  लगा ,
चुप रहे दोनों ज़मीं औ आस्मां। 

लोग मानेंगे नहीं कोई कभी  ,
एक नेता आदमी सा था यहां। 

अब किसी से पूछता कोई नहीं ,
बस्तियों से उठ रहा कैसा धुआं। 

सबको अपनी बात कहनी आ गई ,
बेज़ुबांनों  की , नहीं कोई   ज़ुबां। 

कर गया कितना अंधेरा मुल्क में ,
वो जला करता था खुद बन कर शमां। 

कौन था "तनहा" सभी को कर गया ,
पूछता है धूल से खुद कारवां।

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