Wednesday, 5 February 2020

कौन करता भला उसूल की बात ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

 कौन करता भला उसूल की बात ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

कौन करता भला उसूल की बात , 
सब यहां  कर रहे फ़ज़ूल की बात। 

पतझड़ों ने बहार से कही आज , 
एक मसले हुए  से फूल की बात। 

उनकी खातिर बिछा हुआ है कालीन , 
उनको मालूम क्या है धूल की बात। 

कह रहे हम बहार की हैं सरकार , 
हर ज़ुबां बोलती है शूल की बात। 

ख़वाब टूटे हुए की देख ताबीर , 
याद उनको कहां है तूल की बात।

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