Sunday, 14 April 2019

खुद को कितना तबाह किया ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

    खुद को कितना तबाह किया ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

         ये हम पर है क्या सबक किस से सीखा है। उपदेशक लोग जो हम लोगों को कहते हैं खुद अमल नहीं करते हैं। इक बात तय है भगवान खुदा जो भी कोई जहां भी है उसने दुनिया बनाई होगी अच्छी बनाई होगी इसको खराब किसी अल्लाह ईश्वर ने किया हो संभव नहीं है। हम इंसानों ने बर्बाद किया है नर्क किसी और जगह नहीं है यही हमारा बनाया हुआ नर्क ही बहुत है। हम मतलब की बात समझते हैं बिना मतलब की नहीं समझना चाहते हैं। चालाक लोग धर्मगुरु बनकर उपदेशक बनकर राजनेता बनकर हमसे जिन राहों पर चलने की बात कहते हैं खुद उन पर कभी नहीं चलते। हम देख कर नहीं देखते समझ कर नहीं समझते और बेकार जिन बातों को करना अच्छा लगता है नहीं करते किसी डर से कि मौत के बाद कोई सज़ा मिलेगी। हम जिस तरह ज़िंदगी जीते हैं उसको क्या समझते हैं किसी सज़ा से कम तो नहीं है। और जो लोग मनमानी करते हैं जैसे चाहते हैं जीते हैं उनको मरने की चिंता नहीं होती मौत के बाद क्या होगा इसी चिंता में जीना छोड़ना भला समझदारी की बात है। भगवान किसी को कोई रोक टोक लगाना चाहता तो खुद वो नहीं संभव होने देता जब उसी ने सभी कुछ बनाया है तो उपयोग करने को बनाया है। समझाने वाले कह भी गये सकल पदार्थ हैं जग माहीं कर्महीन नर पावत नाहीं। मरने की चिंता छोड़ जीना शुरू करते हैं। मेरी बात मानों साधु संतों की बातों का कोई भरोसा नहीं भरोसा किया जा सकता है तो उन पर जिनको जीना आया और जिन्होंने ज़िंदगी को जिया भरपूर जिया हम तो जीते जी भी मरते रहे हैं। ज्ञान व्यान की बातें किताबी हैं लिखी रहने दो क्या करना क्या नहीं अपने आप से पूछो। ये नहीं खाना उधर नहीं जाना जाने कितनी बंदिशें बंदों पर बंदों की लगाई हुई हैं ऊपर वाले की कोई बंदिश नहीं उसने अपनी मर्ज़ी से सोच समझ से अच्छाई बुराई को परखना और सही राह चलने को दुनिया में भेजा था। सरकारी कनून अपनी तिजौरी भरने को बनाये हुए हैं जैसे उसी तरह से कुछ लोग भगवान की दुकानदारी करने लगे खुद भगवान से नहीं मिले आपको हमको मिलवाते हैं इसकी कमाई खाते हैं। ये बिचौलिये का दलाली का धंधा किसका बनाया हुआ है ,उनकी दुकानों पर वो सामान है ही नहीं जिसको बेचते हैं। सच बताओ किसी जगह आपको ईश्वर खुदा अल्लाह वाहेगुरु मिला कभी न मिलेगा कभी। 

           इंसानियत से अच्छा धर्म कोई नहीं मगर उसकी शिक्षा कोई नहीं देता क्योंकि उस में मुनाफा कुछ भी नहीं है। कमाई और खुद सब हासिल करने को हमको धर्म के नाम पर लड़वाते हैं बांटते हैं क्या ऊपर से कोई लेबल लगा आया है कौन किस धर्म का है। आदमी आदमी बनकर नहीं रहता खुदा बनने की चाहत रखता है , आपको भय दिखला अपने को ऊंचा बनाने वाले कोई साधु संत सन्यासी नहीं होते हैं। जिनको दुनिया की चाह नहीं जाकर पहाड़ों पर जंगल में धूनी रमायें देवी देवताओं की कथाओं की तरह , मगर खुद विलासिता की चाहत आपको सादगी की नसीहत ये हेराफेरी है। हम सब जान सकते हैं अच्छा क्या है बुरा क्या है किसी के समझाने की ज़रूरत नहीं है ऊपर वाले ने विवेक देकर भेजा है मगर अपनी समझ से नहीं चलना किसी और की समझ से आंख बंद कर चलना क्या अनुचित नहीं। भगवान ने आपको दिमाग दिया है उसका उपयोग करने को न कि अपनी सोच समझ ताले में बंद कर किसी के झांसे में आकर अनचाही राहों पर चलते जाने से। किस मंज़िल की चाहत है जिसका कोई अता पता ही नहीं इक सपना बेचते हैं सपनों के सौदागर। मगर हम देखते हैं हमारे बीच कुछ लोग अपनी राह चलते हैं जीते हैं ज़िंदगी गुज़र मर भी जाते हैं पर हम क्या करते हैं जीते ही नहीं मरने की आहट से घबराते हैं जबकि मौत आनी है आती है। सोचना कोई मौत का फरिश्ता खुदा ईश्वर का अल्लाह का भेजा लेने आएगा तो ऊपर वाला मिलते क्या सवाल करेगा जी लिया जी भर के। नहीं हम तो स्वर्ग जन्नत की चाहत में जी सके ही नहीं ये कहोगे तो हंसेगा वो भी। बेकार आयु गुज़र दी खाया पीया कुछ नहीं गलास तोड़ा बारह आना वही बात है। गाइड फिल्म देखी थी कांटों से खींच कर ये अंचल तोड़ के बंधन बांधी पायल कोई ना रोको दिल की उड़ान को , दिल वो चला ओ ओ आज फिर जीने की तमन्ना है आज फिर मरने का इरादा है। मरने की घड़ी आएगी मर लेंगे अभी तो जीना चाहिए खुद को मार मार जीना ज़िंदगी नहीं है। जियो खुद सबको जीने भी दो यही मानवता कहलाती है लेकिन हर कोई न खुद जीता है न औरों को जीने देते हैं सब लोग। खुद को कितना तबाह किया है और कितना करना है आपकी मर्ज़ी है।

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