Friday, 26 April 2019

मुझको भी सिखला दो अंदाज़ जीने का मोदी जी ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

  मुझको भी सिखला दो अंदाज़ जीने का मोदी जी ( हास-परिहास ) 

                                             डॉ लोक सेतिया 

   किस तरह जीते हैं ये लोग बता दो यारो। ज़िंदगी यही इल्तिजा करते बीती जीने का हुनर नहीं आया। दोस्ती की चाहत रही और दुश्मन बनते रहे। कोई भी नज़र नहीं आया जिस को गुरु बना कर आर्ट ऑफ़ लिविंग सीख सकते। पहले मेरी पसंद का गीत पेश है। 


अब देखा मोदी जी का करिश्मा है जादू है बाज़ीगरी है जादूगरी है। किसी का कोई भला किया दिखाई नहीं देता लोग पहले से अधिक परेशान हैं मगर हर तरफ उनके चाहने वाले भक्त कहलाते हैं। कभी सोचा नहीं था ऐसा भी होगा , किसी को कोई काम को कहो तो सुनाई देता था चपरासी समझ रखा है क्या। आजकल लोग खुद को मैं भी चोकीदार कहते हैं भाई कमाल है नशा हो तो ऐसा हो। मेरी अकेले की बात नहीं है हर पति पत्नी का साथ जीवन भर निभाता है फिर भी नासमझ नाकाबिल किसी काम का नहीं सुनता घबराता है। खुद भगवान तक बीवी को खुश नहीं कर पाता है ये पहला पति है दुनिया में जो घर पर अकेली छोड़ भाग जाता है फिर भी पत्नी को कोई गिला शिकवा नहीं है बिना किसी कर्तव्य पालन पति पर्मेश्वर कहलाता है। अपना कोई अपना नहीं दोस्त नहीं दुश्मन नहीं कोई चाहने वाला तो क्या कोई क़त्ल करने वाला भी नहीं है कुछ भी तो नहीं हासिल ज़िंदगी का। मोदीजी को देखो दोस्त देश विदेश में हैं गले मिलते हैं तो लगता है दोस्ती फिल्म फिर से बनाई जानी चाहिए और दुश्मन कोई क्या मज़ाल है इतने ऊंचे आसमान से कोई क्या मुकाबला करेगा।
     
        लोग सच का सबूत मांगते थे औरों से उनके झूठ पर भी ऐतबार करते हैं आंख बंद कर के। इशारों इशारों में दिल लेने वाले बता ये हुनर तुमने सीखा कहां से। कोई जांच करेगा तो पता चलेगा जनाब के सीने की चर्चा बहुत हुई मगर उस सीने में कोई दिल ही नहीं है। दिल दिया नहीं खोया नहीं दिल सत्ता से लगा तो अपना भी नहीं रहा अब सत्ता ईमान है अरमान है। शोर बहुत है देश को बना दिया महान है सब वही है भगवान है रखवाला है सुलतान है। कहीं कुछ भी अच्छा हुआ नहीं फिर भी कोई सवाल पूछता नहीं , किया क्या है आखिर इस देश की खता क्या है। या इलाही ये माजरा क्या है बेवफ़ा खुद बता वफ़ा क्या है। देश की सेवा कितनी अच्छी है शहंशाह की तरह की हस्ती है। राजसी लिबास शाही अंदाज़ हैं कोई नहीं दूसरा आप ही आप हैं। उसको जो पसंद वही बात करेंगे दिन को रात कहे रात कहेंगे , सूखा है मगर हम सब बरसात कहेंगे। मुर्ख लोग सादगी की बात करते थे बड़े बनकर भी आम आदमी की रहते थे क्या नया फ़लसफ़ा ए शराफत है देखनी है क्या नज़ाकत है। नायक महानायक विश्व सुंदरी खिलाड़ी उद्योगपति कारोबारी सभी उनके सामने भरते हैं पानी , याद दिलवा दी सबको अपनी नानी। कभी सुनी है ऐसी कहानी किसी राजा की थी गरीब रानी , उनकी धुन लगती सबको मस्तानी। कुछ नहीं किया उपकार किया है अपने सब पर सरकार किया है। सब को बुरा बनाया है और खुद अच्छा कहलाया है मगर किसको क्या मिला कोई नहीं जानता है सबको उल्लू क्या बनाया है।

        पांच साल से जितना मोदी जी को लेकर लिखा है कभी किसी नेता पर नहीं लिखा। जेपी जी मेरे आदर्श हैं उन पर भी नहीं ,दुष्यंत कुमार पसंद हैं उनको भी लेखन में इतना स्थान नहीं दिया , सत्येंद्र दुबे जैसे सच की खातिर जान देने वालों से सबक सीखा है उनकी बात भी इतनी नहीं कही होगी। मुझे लोग मोदीजी का विरोधी समझने लगे हैं मगर ऐसा है नहीं , समझने लगा युवक था तभी से कड़वा सच लिखने कहने की खराब आदत पड़ गई और कोई अपना पराया नहीं देखा जिसकी बात अनुचित लगी कहने में हिचकिचाहट हुई नहीं। लोग आलोचक उनको मानते हैं जो किसी जैसा बनना चाहते हैं मगर बन नहीं सकते तो अपनी भड़ास निकालते हैं। लेकिन विश्वास करो मुझे राजनीति पसंद नहीं है राजनेता बनना नहीं किसी से कोई होड़ नहीं है बल्कि साफ कहूं तो मोदी जी जैसा तो कदापि नहीं बनना चाहूंगा। बन सकना आसान नहीं की बात नहीं बनना चाहता भी नहीं या और साफ़ इस तरह का तो हर्गिज़ नहीं बनना है। भगवान नहीं करे कभी उनकी जैसी पढ़ाई पढ़ने की नौबत आये।

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