Saturday, 24 November 2018

चुनाव जीतने का शर्तिया घोषणापत्र ( व्यंग्य विनोद ) डॉ लोक सेतिया

चुनाव जीतने का शर्तिया घोषणापत्र (व्यंग्य विनोद)  डॉ लोक सेतिया 

    ( इस रचना के सभी अधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं कोई भी दल कीमत 

         दे कर हासिल कर सकता है। पहले आओ पहले पाओ की नीति है। ) 

    ................  दल शपथ पूर्वक वादा करता है कि जनमत मिलने और जीतने के बाद सरकार बना कर सुनहरे दिन लाएंगे। सुनहरे दिन को आप कोई झूठा सपना अथवा जुमला समझने की भूल नहीं करें क्योंकि ऐसा हमने चुनाव आयोग को बंद लिफाफे में दस्तावेज़ सौंपा है ठीक उसी तरह जैसे अदालत को कोई विभाग गोपनीय रिपोर्ट देता है। आपको सोशल मीडिया और टीवी अख़बार की झूठी खबरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए क्योंकि उनको कुछ भी मालूम नहीं है इस बारे में। सुनहरे दिन में आपकी कोई भी समस्या समस्या नहीं रहेगी बल्कि समस्या खुद समाधान बन जाएगी। आप सोचेंगे ऐसा कब तक संभव होगा तो हम पांच साल क्या पांच दिन भी नहीं मागेंगे अपनी योजना को लागू करने को। आप सभी मानते हैं कोई भी इंसान सब कुछ नहीं कर सकता है मगर ऊपर वाला चुटकी बजाते ही सब कर सकता है। आपको अभी तलक सरकारों पर निर्भर रहना पड़ा है मगर हमारी सरकार आपको भगवान पर भरोसा करने की राह चलाएगी। ऊपर वाला जो भी करता है अच्छे को करता है यहां तक कि हमारे दल की जीत हार भी उसी की मर्ज़ी से होगी। वो चाहेगा तो आप वोट देने को खुद विवश हो जाओगे। देने वाला इक वही है और किसी से मांगना भी उचित नहीं है। सुनहरे दिन कैसे होंगे बताने की ज़रूरत नहीं है बस समझ लो जैसे सुनहरे ख्वाब अपने देखे हैं उसी तरह के। 
        सबको बारी बारी सभी कुछ मिलेगा , सत्ता भी हर दिन बारी बारी हर सांसद को हासिल होगी। एक दिन की बादशाहत का चलन होगा और एक दिन आपको भी शहर में सत्ता का पद अधिकारी नियुक्त करना जैसा किया जाएगा कोई भी स्थाई नहीं होगा। पांच साल में कोई भी वंचित नहीं रहेगा सब को एक दिन चौबीस घंटे मनमर्ज़ी की पूरी छूट मिलते ही हर कोई जीवन भर के लिए सुख सुविधा जमा कर लेगा। संविधान की बात की चिंता मत करें संविधान की भावना यही है कि कोई छोटा बड़ा नहीं हो और सभी को हर अवसर मिलना चाहिए। कौन है जो ऐसा नहीं सोचता कि काश वो सत्ता पर आसीन होता तो सब समस्याओं का समाधान पल भर में कर देता। इस तरह आपको भी अवसर मिलेगा मगर तब आपकी मर्ज़ी है कि पहले के नेताओं की तरह अपने बारे सोचते हैं या बाकी सब के लिए जैसे हमारा दल विचार कर रहा है। एक दिन को किसी को भी कुछ भी बनाया जा सकता है पर आपकी मर्ज़ी है कि आपने सरकारी ऐप्प पर क्या बनने को दर्ज करवाया है नाम अपना। लॉटरी की तरह रोज़ सुबह नाम सामने आता रहेगा कि आज कौन किस जगह किस पद पर नियुक्त होगा। समझदार लोग अधिक ऊंचे पद की जगह ऐसे पद पर नाम दर्ज करवाएंगे जिस में भीड़ अधिक नहीं हो। चिंता उन लोगों को होगी जो खुद को स्थाई समझते रहे हैं जबकि इस दुनिया में कुछ भी स्थाई होता नहीं है। मगर क्योंकि उन्होंने इतने सालों में ज़रूरत से बढ़कर जमा किया हुआ है इसलिए उनको छुट्टी पर भेजा जाएगा आराम करने को। आपको पता ही है सरकार किसी को भी छुट्टी पर भेज सकती है जब भी चाहे भले आधी रात को ही और कब तक छुट्टी पर हैं इसका भी कोई पता नहीं होगा। जब पुराने ढंग से बात नहीं बनती तभी नये तरीके ईजाद किये जाने ज़रूरी हैं। आपने सभी दलों को नेताओं को आज़माया है सब एक जैसे हैं एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। इस बार सबको ताश के पत्तों की फेंट कर देखना बाज़ी पलट सकती है। अब आपको गुलाम नहीं बादशाह बनना है और गलती से किसी नेता के चेहरे का मुखौटा मत लगाना क्योंकि अबकी बार वोटर ही होगा सरकार और राजनेताओं का करना है बंटाधार। आगे आप लोग खुद हैं समझदार , थोड़ा सोचना समझना करना विचार। चिंता करना छोड़ दो मेरे यार चिंता की चिंता है बेकार।


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