Friday, 7 September 2018

सच का आना बंद किया है ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

    सच का आना बंद किया है ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

      झूठ का धंधा खूब चल रहा है , सच तो कोई बेचता भी नहीं बिकता भी नहीं खरीदने की औकात ही नहीं। फिर भी सच को घर में घुसने क्या अपनी गली तक नहीं आने देते। सीसी टीवी कैमरे से देख लेते हैं और द्वार बंद कर लेते हैं फोन पर उपलब्ध नहीं है सुनाई देता है। घर दफ्तर की कॉलबेल बजती नहीं सुनाई देती। सोशल मीडिया पर ब्लॉक किया इतना काफी नहीं था जो अब ईमेल भी ब्लॉक करने लगे हैं। दावा फिर भी है हम आपकी आवाज़ सुनना चाहते हैं और आपकी बात समझना चाहते हैं। मुझे ये जानकर बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई न बुरा लगने की बात है। यही वास्तव में सच की जीत है और झूठ के हारने की बात है , उजाले की किरण भी है और अंधियारी भी रात है। खेल नहीं जंग है शह -मात है। आप बताओ क्या हालात है। सच की अर्थी है कि झूठ की बरात है। सूखा मचा रही है अजब ये बरसात है , जी हां दुष्यंत की बात है। 
      झूठ काहे डरता है जब सभी कुछ उसी के हाथ है। तलवार बंदूक चाकू छुरी सब अपने साथ है। जिसे चाहें कत्ल करें कानून का जब साथ है। फिर घबराहट क्यों है किस बात का पसीना माथे पर चमक रहा है धड़कन रुकी है कि और बढ़ी हुई दिल का कैसा उत्पात है। सांस को सांस आती नहीं दम घुटने की हालात है। सच का दर इतना है कि सोना भी दुश्वार है , ख्वाब में दिखती लटकती सच की तलवार है। झूठ मुझे कहता है आकर सच तू तो मेरा पुराना यार है। मैं क्या बताऊं तुझे मेरा अपने पर नहीं इख़्तियार है , झूठ की आदत है झूठ से व्यौपार है। सच तुम बताओ तुम्हारा तो बंटाधार है। झूठ की जब हर तरफ हो रही जय जयकार है , न जाने किस बात से फिर भी शर्मसार है। सच को माना नहीं सच है क्या जाना नहीं सच को अपनाना नहीं , कोई भी नया बहाना नहीं। सच की हर राह रोक कर भी चैन नहीं करार नहीं , बेगुनाह करार होकर भी मिला दिल को करार नहीं। सच का कसूर नहीं है जनाब आपको खुद अपने पर ऐतबार नहीं। झूठ होता कभी सच का तो पैरोकार नहीं। आपकी किसी बात पर मैं कर सकता तकरार नहीं। और कोई झगड़ा हमारा तो मेरे यार नहीं। हर बार माना जो चाहा तुमने मगर नहीं इस बार नहीं।

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