Monday, 19 June 2017

वास्तविक भावना भी जगाओ , देश से प्यार को खेल की जीत हार से नहीं आंको आलेख :- डॉ लोक सेतिया

                  वास्तविक भावना भी जगाओ 

                देश से प्यार को खेल की जीत हार से नहीं आंको

                              आलेख :- डॉ लोक सेतिया 

  मुझे भी इसकी उम्मीद नहीं थी , भारत की ऐसी हार वास्तव में स्तंभित करती है। मगर खेल की जीत का जश्न या हार का मातम मनाना कितना उचित है वह भी उसको दुश्मनी से जोड़कर किसी देश की। आपको दुश्मनी निभानी भी नहीं आती न ही दोस्ती करना। कभी उसी देश से कोई आता है और आप पलकें बिछाते हो , कभी खुद उसी देश जाते हो खुश होकर। कोई उसी देश से व्यापार करता है , कोई कलाकार रिश्ते निभाता है। और आपको देशभक्ति का दिखावा भी करना होता है तो टीवी चैनल वालों के सामने अपने पुराने खराब टीवी लेकर तोड़ कर। कितनी बार देखा यही होता है , आप जाओ इन के घरों में एलईडी एलसीडी टीवी बड़ी स्क्रीन वाले ही मिलेंगे। जिन के पास वही पुराना टीवी है वो चाहें भी तो उसको भी तोड़ नहीं सकते , क्योंकि उनकी हालत ही नहीं होती आजकल का नया टीवी खरीदने की। हमारी आदत ही अजीब है हम किसी को कभी खुदा बना देते हैं सफल होता देख कर फिर उसी को असफल देखते उसको रौंदते हैं पांवों तले। 
            रोज़ खुद भी कितने काम करते हैं जिनको देश हित नहीं समझा जाना चाहिए , जब जो मर्ज़ी अपनी सुविधा की खातिर। आपके दल की सरकार है तो आपको आंखे बंद कर अपने नेताओं अधिकारीयों का अनुचित आचरण अनदेखा कर उसकी जयजयकार करनी है। इसे देशभक्ति कहते हैं , अभी भी वही जुमले बोलते हैं सत्तर साल में केवल विनाश हुआ है। उन सत्तर साल में आपकी बनी सरकार के तीन साल भी खुद शामिल करते हैं , इतना ही नहीं बाकी की खुद अपने दल की ही या अन्य दलों की पहली सभी सरकारों को ख़िताब दे देते हैं लूट करने में लगे होने का। वही लूट अभी भी जारी है , आपने भी कहां तौर तरीका बदला है। क्या झूठा प्रचार ज़रूरी है या जनता की बदहाली को मिटाना जो आपने भी विज्ञापनों की बाढ़ ला दी है। गरीबी की बात करते खुद रहना अमीरों की तरह , इसको कोई अच्छा बताता है तो फिर बुराई क्या है। 
       देश का प्रशासन पुलिस कार्यपलिका न्यायपालिका सब को अमीरों की चिंता सताती है। आप जो कहने को भीड़ में शामिल होकर सब करते हैं खुद हर अनुचित बात सामने होते भी देखना नहीं चाहते। आपके देश को समाज को ये सब भीतर से खोखला कर रहा है मगर आप चैन की नींद सोते हैं। आपको सच नहीं बोलना क्योंकि नेता अधिकारी या फिर वो लोग जो आपराधिक प्रवृति के हैं नियम कानून को नहीं मानते उनसे डरते हैं कि कहीं आपको कोई नुक्सान नहीं दे सके। देशभक्ति तब खुद के स्वार्थ से छोटी लगती है। आप को अच्छा लगता है देशभक्त समझे जाना ये ठीक बात है लेकिन आपकी देशभक्ति किसी खास अवसर पर नहीं हर दिन दिखाई दे तभी सच्ची है। चलो इक बार दोबारा याद करते हैं देशभक्ति का असली अर्थ देश पर खुद को न्यौछावर करना है और हर उसका विरोध करना जो देश के लिए अपना कर्तव्य निभाता नहीं चाहे उस में आपके दल क्या घर का कोई सदस्य ही नहीं खुद आप भी हों तब अपने आप का भी विरोध करें ताकि देशभक्ति केवल दिखावा बनकर नहीं रह जाये।

No comments: