Wednesday, 26 March 2014

भगवान का पेटेंट ( हास-परिहास ) डा लोक सेतिया

अभी पिछली पोस्ट पर मैंने भगवान नहीं आदमी को इंसान बनाने की बात कही थी। इक महिला मित्र ने उसको तुरंत हटा दिया अपनी टाइम लाईन से। ऐसा नहीं कि उनको मेरी बात अनुचित लगी , उनका कहना था कि कोई भगवान नाराज़ हो जाएगा। ये कितनी हैरानी की बात है कि हम ये सोच रहे कि सच बोलने से भगवान नाराज़ हो सकता है। आपको बता दूं मैं जिस धर्म को जानता हूं उसका आदर्श वाक्य ही यही है सत्य ही ईश्वर है। बहुत सारे सिख भाई नहीं जानते कि जब वो सात सिरी अकाल बोलते हैं तो उसका अर्थ क्या है। सत्य ही ईश्वर है , यही उसका अर्थ है। जो बोले सो निहाल सत सिरी अकाल का अर्थ है कि जो कोई भी ऐसा बोलता है कि सत्य ही ईश्वर है भगवान उस पर कृपा करते हैं। मैंने ये पहले भी ज़िक्र किया है बार बार कि मेरी माँ इक भजन गाती रहती थी। भगवन बन कर तूं मान न कर तेरा मान बढ़ाया भक्तों ने , तुझे भगवान बनाया भक्तों ने। मेरा विचार है ये वही कह सकता है जो ईश्वर को अपना और खुद को उसका मानता हो। मुझे माँ जैसा निश्छल सवभाव , किसी के प्रति कोई दुर्भावना न रखना , किसी से कभी कटु वचन नहीं कहना और हमेशा मुस्कुराते रहना विरला ही कभी दिखाई देता है। मेरी धर्म पत्नी अक्सर जब भी सास बहू की बात आती है किसी से चर्चा में तब यही बोलती है कि उनको तो सासू माँ ने कभी एक बार भी कोई बात गुस्से या नाराज़गी से नहीं की थी। ये तो केवल परिभाषा थी , अब विषय की बात। व्यंग्य है भगवान का पेटेंट।
             खबर छपी थी कि पेटेंट कानून पास हो गया। अमेरिका वाले नीम का हल्दी का तुलसी का और जाने किस किस की खोज का पेटेंट पहले ही करवाये बैठे हैं। खेती के बीज तक उनके नाम पर पेटेंट हैं और दवायें भी। अब इनका उपयोग उनको रायल्टी चुका कर ही कर सकते हैं। कल ऐसा भी मुमकिन है कि कोई खुद को भगवान घोषित कर दे ये पेटेंट करवा कि ये दुनिया उसी की बनाई हुई है। दूर की कौड़ी लगती है आपको , पर सब कुछ मुमकिन है। देखा नहीं टीवी पर कोई करोड़ों कमा रहा है अपने तथाकथित भक्तों को यही बतला कर कि आप पर अमुक देवी देवता की कृपा क्यों नहीं हो पा रही और कैसे होगी। बहुत आसान सी बातें बताता है जो कोई भी कर सकता है। जलेबी खाना क्या कठिन है , रोज़ खा सकते अगर शुगर नहीं हो। सोचो कोई भगवान बन कर सभी से हवा में सांस लेने , सूरज की रौशनी , पीने का पानी , धरती पर कदम रखने तक की रायल्टी वसूल सकता है अगर उसके नाम पेटेंट हो जाये कि वही ईश्वर है। ये फज़ूल बात है कि ये उसने बनाया था कि नहीं। ऐसे तो हज़ारों साल से अपने देश के घर घर में देसी घरेलू इलाज दादी मां के बताये नुस्खे से होता ही है। हमारे आयुर्वेद के विद्वानों ने कोई रायल्टी मांगे बिना ये जानकारी हर खास-आम तक पहुंचा दी। अब इनकी रायल्टी उसी को मिलेगी जिसने इनका पेटेंट करवा लिया अपने नाम। हम अब भी सोचते ही रहे तो कोई अमेरिका वाला पेटेंट करवा लेगा भगवान को खोजने का अपने नाम पर। तब सब मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरुद्वारा उनका अधिकार क्षेत्र में आ जायेगा , उनको अपनी आमदनी से रायल्टी के रूप में हिस्सा देना होगा। तब हम क्या करेंगे।  क्या वही दोहरायेंगे जो डंकल प्रस्ताव पर किया था। कुछ दिन विरोध सभायें कर भाषण देने के बाद खुद ही हस्ताक्षर कर हथियार डाल देंगे अमरीका वालों के दबाव में। जो वामपंथी कसमें खाते थे कभी गैट समझौते को न मानने की , खुद शामिल थे उस सरकार को समर्थन करने वालों में जिसने उसको स्वीकार किया। चुपचाप मोहर लगा दी संसद में। ये अब कोई मुद्दा ही नहीं रह गया , किसी भी दल को नहीं लगता कि इसको उठा कर कोई सरकार बनाई या गिराई जा सकती है या इसको उठाने से वोट मिल सकते हैं। जो ये नहीं कर सके वो विषय वो मुद्दा नेताओं को फज़ूल लगता है।
                     मैंने कहा था कि अगर कोई ईश्वर होने का पेटेंट करवा ले , मगर हम भारत वासी खुद को भगवान हरगिज़ नहीं कह सकते।  भले है बहुत जो भगवान कहलाते हैं , मीडिया ने बना दिया अपने मकसद से , कुछ ताकत शोहरत मिलते ही खुदा बन जाते हैं इंसान नहीं रहते। मगर भगवान हैं ये नहीं कहते क्योंकि भगवान से उनको भी डर लगता है। मगर इतना तो हम कर ही सकते हैं कि ये पेटेंट अपने नाम करवा लिया जाये कि भगवान को हमने ही खोजा था। ये झूठ भी नहीं है , हम साबित कर सकते हैं। हमारे साधू संत , सन्यासी , ऋषि मुनि , देवी देवता तक वर्षों बन बन भटकते रहे , तपस्या करते रहे पर्मात्मा को पाने को। इस अपने देश में करोड़ों देव वास किया करते थे , तो बहुमत भी अपना ही साबित किया जा सकता है। अब वो सब किधर गये ये सवाल मत पूछना , कलयुग में राक्षस ही मिलते हैं उनके रूप में। लेकिन जब हमने खोजा था भगवान को तो इसका पेटेंट अपने नाम होना ही चाहिये। अब आप सोचोगे कि ऐसा करने से क्या हासिल होगा। तो समझ लो जब भगवान पर अपना पेटेंट होगा तब उसकी बनाई हर चीज़ पर अपना अधिाकर खुद ही हो जायेगा। तब उनको पता चलेगा जिन्होंने हमसे गैट समझौते पर हस्ताक्षर लिये थे। हवा पानी चांद सूरज , रौशनी अंधेरा सब की यहां तक कि बरसात की रायल्टी देनी होगी , इंद्र से लेकर सभी देवता अपने ही हैं। तब पता चलेगा उनको भी कि पेटेंट करवाना क्या होता है।

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