Wednesday, 26 June 2013

नहीं मिला तुम सा कोई ( कविता ) 0 ( डॉ लोक सेतिया )

तुन्हें अच्छा लगता था ,
कोई और ,
जिसके प्यार में ,
तुमने छोड़ दिया ,
मुझे ही नहीं ,
सारी ही दुनिया को भी !
बेरुखी से तुम्हारी ,
तड़पता रहा मैं ,
रात दिन बहाता रहा अश्क ,
तुम्हारे प्यार में मैं बरसों !
कर दिया हालात ने ,
जुदा हम दोनों को ,
मगर दिल से नहीं हुए कभी ,
हम इक दूजे से जुदा उम्र भर !
अब नहीं हो तुम ,
अपनी दुनिया में ,
अब नहीं हो तुम ,
किसी दूजे की दुनिया में ,
छोड़ कर चले गये ,
इस जहां को तुम ,
अलविदा कहे बिना किसी से ,
मगर फिर भी रहते हो,
मेरे दिल की ,
दुनिया में  सदा तुम  !
तुम्हें भी कुछ नहीं मिल सका ,
कभी किसी से ,
उम्र भर दुनिया में ,
मैं भी नहीं बसा सका ,
बिना तुम्हारे ,
अपने ख्वाबों की ,
कहीं कोई दुनिया !
आज ,
अकेला बैठा सोचता हूं ,
हम दोनों फिर से ,
मिलें शायद एक बार ,
अगले किसी जन्म में ,
और बसायें ,
अपना प्यार का कोई जहां ,
जिसमें दूजा कोई भी नहीं हो ,
मेरे और तुम्हारे सिवा मेरे दोस्त !

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