Saturday, 1 June 2013

कह रहे कुछ लोग उनको भले सरकार हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

     कह रहे कुछ लोग उनको भले सरकार हैं ( ग़ज़ल ) 

                     डॉ लोक सेतिया "तनहा"

कह रहे कुछ लोग उनको भले सरकार हैं
तुम परखना मत कभी खोखले किरदार हैं।

छोड़कर ईमान को लोग नेता बन गये
दो टके के लोग तक बन गये सरदार हैं।

देखकर तूफ़ान को, छोड़ दी पतवार तक
डूबने के बन गये अब सभी आसार हैं।

फेर ली उसने नज़र, देखकर आता हमें
इस कदर रूठे हुए आजकल दिलदार हैं।

पास पहली बार आये हमारे मेहरबां
और फिर कहने लगे फासले दरकार हैं।

हम समझते हैं अदाएं हसीनों की सभी
आपके इनकार में भी छुपे इकरार हैं।

गैर जब अपने बने, तब यही "तनहा" कहा
ज़िंदगी तुझसे हुए आज हम दो चार हैं। 

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