Wednesday, 22 May 2013

भुला नफरत सभी की हम मुहब्बत याद रखते हैं ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

    भुला नफरत सभी की हम मुहब्बत याद रखते हैं ( ग़ज़ल ) 

                    डॉ लोक सेतिया "तनहा"

भुला नफरत सभी की , हम मुहब्बत याद रखते हैं
सितम जितने हुए भूले , इनायत याद रखते हैं।

तुन्हें भेजे हज़ारों खत मुहब्बत के कभी हमने
नहीं कुछ भेज पाये हम , वही खत याद रखते हैं।

हमेशा पास रखते हैं तेरी तस्वीर को लेकिन
ज़माने से छिपाने की हिदायत याद रखते हैं।

मुहब्बत में कभी कोई शरारत की नहीं हमने
सताया ख्वाब में आकर शिकायत याद रखते हैं।

बनेंगे एक दिन मोती हमारी आंख के आंसू
तेरा दामन इन्हें पौंछे ,ये हसरत याद रखते हैं।

किसी को बेवफ़ा कहना हमें अच्छा नहीं लगता
निभाई थी कभी उसने भी उल्फ़त याद रखते हैं।

तुम्हारी पास आने दूर जाने की अदा "तनहा"
वो सारी शोखियां सारी नज़ाकत याद रखते हैं। 

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