Wednesday, 28 October 2020

मेरे दोस्त दोस्ती और मेरा लेखन ( फ़लसफ़ा ) डॉ लोक सेतिया

  मेरे दोस्त दोस्ती और मेरा लेखन ( फ़लसफ़ा ) डॉ लोक सेतिया 

 ज़िंदगी में इक अच्छा सच्चा दोस्त दुनिया के सबसे बड़े खज़ाने धन दौलत से बढ़कर होता है। मैंने अपने लेखन के बारे पच्चीस तीस साल पहले इक चंडीगढ़ के अख़बार को साक्षात्कार देते समय कहा था कि मेरा लिखना दोस्त की तलाश है। दोस्ती को लेकर बचपन से मेरी सोच यही रही है कुछ लोग समझ नहीं पाते कि भला कोई किसी दोस्त के नहीं रहने पर भी 18 साल बाद हर दिन उसकी बात कैसे कर सकता है। मैंने डॉ बीडी शर्मा को कभी भी भुलाया नहीं है भूलना संभव ही नहीं उसने जो लोग आपकी आत्मा में बस कर आपका हिस्सा बन जाते हैं। कभी साथ लिखने वाले लेखक कहते थे आपको लिखने को दोस्ती विषय क्यों मिलता है। दोस्त दोस्ती शायद कम लोग इसका मतलब समझते हैं। साथ साथ मौज मस्ती करने वाले शाम को मिल बैठ महफ़िल जमाने पीने जाम से जाम टकराने वाले आपके साथ कारोबार धंधा करने वाले कभी मिलकर घूमने जाने वाले वास्तव में दोस्त हों ज़रूरी नहीं। ऐसे रिश्ते दुनियादारी के मतलब और ज़रूरत को बनते बदलते हैं आज साथ हैं कल कोई वास्ता नहीं होता उसको दोस्ती कहना सही नहीं है। कभी ऐसा एहसास हुआ कोई दोस्त आपको याद आया और बिना किसी मतलब आप चले गए उसके पास मिलने या कोई चला आया आपके पास जब आपने सोचा ही था। इक घटना याद आई है कॉलेज में पढ़ते थे मैं किराये पर कमरा लेकर रहता था अकेला ही , जाने क्यों चाय बनाने लगा तो दो कप चाय बनाकर दो कपों में डालकर बैठा था मुझे नहीं पता था दोस्त खिड़की से देख रहा था दो कप चाय डालते और समझा कोई होगा कमरे में साथ जो खिड़की से दिखाई नहीं दे रहा। फिर खुले दरवाज़े से भीतर आकर झांकने लगा कोई भी तो नहीं था , कहने लगा ये चाय दूसरा प्याला किस के लिए बनाया है। मैंने कहा जाने क्यों लग रहा था तुम आने वाले हो यही सोचकर एक नहीं दो कप चाय बना ली है। ये पागलपन दोस्ती होती है मेरी दोस्ती की चाहत हमेशा अधूरी रही है क्योंकि किस्मत में जिन दोस्तों से दिल मिलता उनका साथ अधिक दिन रहता नहीं था। दोस्ती बनी रहती मगर ज़िंदगी और हालात दूरी बनाये रहते मिलते तो लगता ज़िंदगी यही है बिछड़ के भी प्यार और अपनापन घटता नहीं था। कोई समय था चिट्ठी लिखते फिर फोन पर बात होने लगी जब मिल जाते तो लगता कभी बिछड़े ही नहीं। 
 
   दोस्त वह होते हैं जिनको आपको बताना नहीं पड़ता आप खुश हैं या उदास हैं। बिना बताये आपकी दशा समझते हैं आपकी हर भावना जान लेते हैं आपकी ख़ुशी में आपसे बढ़कर खुश होते हैं और आपको उदास देख कर उनकी पलकें भीग जाती हैं। आपको इक दोस्त ऐसा चाहिए होता है जिस के पास जाकर उसके कांधे पर सर रखकर आप रो भी सकते हैं और खुश हैं तो सबसे पहले अपनी ख़ुशी बतला कर ख़ुशी को हज़ार गुणा बढ़ा भी सकते हैं। मैंने हमेशा इक ख़्वाब सजाया है कि कोई इक घर हो जो दोस्ती का मंदिर हो जहां बस दोस्त और दोस्ती की बात हो कोई दुनियादारी की रस्मो रिवाज़ की मतलब की बात नहीं हो। प्यार की अपनत्व की बात हो बेगानापन आस पास नहीं हो ऐसे घर में कोई सुविधा सुख साधन उपलब्ध नहीं होने का कोई फर्क नहीं महसूस हो जन्नत से बढ़कर लगे जो छोटा सा घर दिल में जगह बड़ी बड़ी होनी चाहिए। बड़े ही खुशकिस्मत लोग होते हैं जिनको ज़िंदगी में ऐसे अच्छे दोस्त मिलते हैं। दोस्ती फिल्म आपने देखी है पुरानी श्वेत श्याम उसके गीत क्या लाजवाब थे। कोई जब राह न पाए मेरे संग आये की पग पग दीप जलाए मेरी दोस्ती मेरा प्यार।