Sunday, 18 October 2020

मुहब्बत की बाज़ी जीती हारी ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

   मुहब्बत की बाज़ी जीती हारी ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया 

     ये उस पुरानी कहानी का आधुनिक स्वरूप है। दो चाहने वाले किसी विवशता से साथ जी नहीं सकते और साथ साथ मौत का आलिंगन करने का निर्णय करते हैं। दोनों इक गहरी नदी में कूदते हैं लेकिन महिला को कोई डूबने से बचा लेता है और फ़िल्मी ढंग से उनका प्यार और विवाह हो जाता है। आपने राजस्थानी लोक कथा तू पी तू पी पढ़ी नहीं तो पहले उसको पढ़ लेते हैं। 
 

                               तू पी -तू पी ( लोक कथा )

     ये राजस्थानी लोक कथा है। बचपन की दो सखियां रेगिस्तान से गुज़र रही होती हैं। रास्ते में उनको एक अजीब  दृश्य नज़र आता है। हिरणों का इक जोड़ा वहां मृत पड़ा होता है और पास में थोड़ा सा पानी भी होता है। इक सखी पूछती है दूसरी सखी से भला ऐसा क्योंकर हुआ होगा , ये दोनों प्यासे कैसे मरे हैं जब यहां पानी भी था पीने को। दूसरी सखी बताती है ये दोनों इक दूजे को प्यार  करते थे , प्यास दोनों को बहुत लगी थी लेकिन पानी कम था इतना जो इनमें से एक की प्यास ही बुझा सकता था। दोनों इक दूजे को कहते रहे 
 तू पी - तू पी , मगर पिया नहीं किसी ने भी। दोनों चाहते थे कि जिसको प्यार  करते वो ज़िंदा रहे और खुद मर जायें , साथ साथ मर कर अपने सच्चे प्यार  की मिसाल कायम कर गये। सखी इसको ही प्यार कहते हैं।

                बहुत साल बीत गये और वो दोनों सखियां बूढ़ी हो गई। फिर रेगिस्तान में उनको वही दृश्य दिखाई दिया और फिर एक सखी ने कहा दूसरी से कि देख सखी वही बात आज भी नज़र आ रही है। दूसरी सखी बोली अरी सखी तू किस युग की बात करती है ये वो बात नहीं है। हालत वही थी कि दोनों प्यासे थे मगर पानी थोड़ा था जो किसी एक को बचा सकता था। ये दोनों आपस में लड़ते रहे पानी खुद पीने के लिये। दूसरे को नहीं पीने देने के लिये लड़ते हुए मर गये , किसी ने भी दूसरे को पानी नहीं पीने दिया। ये आज के आशिक़ों  के स्वार्थ की बात है सखी , अब वो प्यार कहां जो दूजे के लिये जान देते थे।
 
    अब आज की मुहब्बत की कहानी कुछ उसी तरह आधुनिक युग के बदले ढंग में। फिर दो चाहने वालों ने साथ मिलकर ख़ुदकुशी करने का निर्णय किया। नदी के पुल पर खड़े होकर महिला ने कहा कि आपको तैरना आता है इसलिए आपको गले में इक घड़ा बांधना ज़रूरी है अन्यथा आप डूबने से बच सकते हैं। पुरुष ने बात मान ली और छलांग लगाकर डूब कर ख़ुदकुशी कर ली। महिला ने बाद में जान देने का वादा किया था मगर अपने आशिक़ के डूबने के बाद उसको ये मुश्किल लगने लगा तभी उसको नदी किनारे कोई खड़ा दिखाई दिया। कसम खाई थी निभाने को नदी में कूदना भी था लेकिन मन जीने की चाहत भी कर रहा था। सोचकर महिला ने उसी के नज़दीक जाकर छलांग लगाई और साथ ही बचाओ बचाओ भी कहने लगी। किनारे खड़ा पुरुष भी उसको देख रहा था और उसने नदी में कूद कर महिला को बचा लिया। 
    
     महिला ने बचाने वाले से कहा मुझे अपने आशिक़ के साथ मरना था अब जब मुझे कोई चाहने वाला ही नहीं तब मेरा ज़िंदा रहना और मुश्किल हो जाएगा। फ़िल्मी अंदाज़ से आपने मुझे मरने नहीं दिया तो मुझे जीने को साथ साथ रहने का भी कर्तव्य निभाना चाहिए। मेरी पहली प्यार की कहानी का अंत हम दोनों की इक नई मुहब्बत की कहानी की शुरुआत होना चाहिए। पुरुष ने कहा आपने बचाओ बचाओ कहा था मुझे तब इस बात का पता नहीं था अब आपको मुझसे प्यार चाहिए तो फिर से छलांग लगानी होगी तब मैं आपको बचाने के बाद आपके साथ जीवन भर संग रहने का वादा करता हूं। पुरुष खूबसूरत था और अमीर भी महिला को लगा ये तो पहले से अच्छा विकल्प मिला है जैसे डूब कर कोई मोती खोज लाता है। 
 
      महिला ने फिर से छलांग लगाई और बचाओ बचाओ की गुहार लगाने लगी। तब उस पुरुष ने बताया कि उसे उसी ने बुलवाया था जिसके साथ आप मरने को आई थी। मैंने उस से वादा किया था आपको बचाने का जो मैंने किया भी। मगर आपसे किया वादा पूरा नहीं कर सकता क्योंकि फिर कभी यही मेरे साथ आप क्यों नहीं कर सकती हैं। आप अपने पहले आशिक़ से धोखा कर सकती हैं तो मुझे विश्वास नहीं करना चाहिए विशेषकर जो खुद मर कर भी आपके ज़िंदा रहने को उपाय कर रहा था उस से बेवफ़ाई करने वाली कभी किसी से वफ़ा नहीं कर सकती है। मुहब्बत का खेल है इस में हारने वाला जीत जाता है जीतने वाला हार जाता है। ये बाज़ी आपने खेली मगर ईमानदारी से नहीं तभी हारना पड़ा है। यहां भी दोनों मरे थे मगर एक को चालबाज़ी से मौत को गले लगाना पड़ा वर्ना वो भी बचने की कोशिश कर भी सकता था और दूसरे को उसकी खुद की चाल उल्टी पड़ने से डूबना पड़ गया।          

1 comment:

Sanjaytanha said...

सच्चे और झूठे प्यार को परिभाषित करतीं कथाओं से युक्त सीख देता लेख👍👌