Monday, 23 March 2020

अब तो जागो भारतवासियो ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

   अब तो जागो भारतवासियो ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया 


ये आलोचना की बात नहीं है आत्मावलोकन की घड़ी है। जब अन्य देश भयानक स्वास्थ्य समस्या से मुकाबला करने को नये अस्पताल बनाने  और उपचार के ढंग और खोज जांच की बात करते हैं हमारे देश का सबसे बड़ा अस्पताल अपनी ओ पी डी बंद करने का निर्णय करता है। बड़े बड़े दावे खोखले साबित हुए हैं तमाम सरकारों के आम नागरिक को उचित स्वास्थ्य सेवाओं के उपलब्ध करवाने के। पिछले कई सालों से हर सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी ज़रूरी बुनियादी साहूलियत को निजि नर्सिंग होम या बड़े बड़े अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया है जो कम से कम देश की आधी आबादी के लिए असंभव है बेतहाशा खर्च कर हासिल करना।

हमने भी पुरानी चली आ रही धार्मिक निशुल्क चिकित्सालय या स्कूल बनाने को छोड़ अन्य तरह से धार्मिक आयोजनों पर पैसा खर्च करने का काम किया है। बड़े बड़े उद्योगपति भी अब अस्पताल या स्कूल कॉलेज गरीब नागरिकों के लिए नहीं बनाते अगर बनाते हैं तो किसी कारोबार की तरह। सबसे आपत्तिजनक बात है देश की जनता का धन और संसाधन हर देश की सरकार और राज्यों की सरकारों ने व्यर्थ के आयोजनों और अपनी महत्वांक्षाओं की पूर्ति और आडंबर अपनी शोहरत गुणगान करने पर बर्बाद कर मानवता के विरुद्ध इक अपराध किया है। जैसे हर दिन इक इक राजनेता और आलाधिकारी से तमाम पदों पर बैठे लोगों ने अपने सुख सुविधा और ऐशो आराम पर लाखों करोड़ों बर्बाद करने को अपना अधिकार समझ लिया है इस गरीबी भूख से पीड़ित देश में देशसेवा के नाम पर लूट ही है।

इनके देश विदेश के अनावश्यक सैर सपाटे और सांसदों विधायकों को मिलने वाली लाखों की राशि देख लगता है जैसे सरकार और अधिकारी वर्ग सफेद हाथी की तरह हैं। टीवी मीडिया जो कहने को बड़ी बड़ी बातें करते हैं वास्तव में देश में चलते आये सबसे बड़े घोटाले के भागीदार हैं। सरकारी विज्ञापन के नाम पर हर दिन करोड़ों रूपये ऐसे विज्ञापनों पर सरकार के तमाम विभाग खर्च नहीं फज़ूल उड़ाने का काम करते हैं।
काश ये सारा धन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाता तो आज हम इस कदर बेबस नहीं होते। आज हम सभी को घर पर रहने को कहने वाले खुद किसी राज्य में अपनी सरकार बनाने को जमा होने वाले हैं। ऐसे में उनसे संवेदशीलता की उम्मीद क्या की जाए।

हम सभी को मिलकर भविष्य में अन्य धार्मिक कर्मकांड या आयोजन की जगह सार्वजनिक स्वस्थ्य सेवाओं और शिक्षा की तरफ ध्यान देना चाहिए। किसी धार्मिक स्थल पर चढ़ावे की जगह अपना वही धन अच्छे उदेश्य की खातिर देने का चलन फिर से शुरू करना चाहिए।

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