Monday, 18 November 2019

गर्दिश में सितारे ( लघु कथा ) डॉ लोक सेतिया

     गर्दिश में सितारे ( लघु कथा ) डॉ लोक सेतिया 

 साहिल की ज़िंदगी में पांच लड़कियां आईं मगर जाने क्यों किसी से भी बात जीवन भर को साथ निभाने तक नहीं पहुंची। पचास का होने पर भी अविवाहित ही है। अपनी डायरी से अपने नाकाम इश्क़ के किस्से पढ़ता रहता है। ऐसे में जब पहली बार इक महिला से कहानी अंजाम तक पहुंचने लगी तो उसने मालिनी को अपने अतीत की हर बात बताने को अपनी निजि डायरी जिसे कभी किसी को पढ़ने तो क्या छूने भी नहीं देता था दे दी और कहा शायद ये मेरा आखिरी इश्क़ है क्योंकि इस से पहले मैंने कभी किसी को ऐसे पागलपन की हद तक नहीं चाहा था। और जब भी जिसने रिश्ता नहीं निभाना चाहा मैंने स्वीकार कर लिया था कि शायद मेरे नसीब में मुहब्बत मिलना नहीं है। तुम मेरी डायरी पढ़ कर फिर सोच कर निर्णय करना कि क्या तुम भी वही पुरानी कहानी नहीं दोहरानी है। मालिनी भी साहिल को उतना ही चाहती है मगर फिर भी उसने सोचा कि यही अच्छा होगा साहिल की ज़िंदगी की वास्तविकता को जानकर ही विवाह का फैसला किया जाये। 

   अभी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की थी जब बिंदु जो पड़ोस में रहती थी उसने खुद प्यार की बात करने को पहल की थी। मगर साहिल ने अभी सोचा ही नहीं था और पढ़ाई पूरी करने के बाद विचार करने को कहा था। हंसी मज़ाक की बात होती रहती थी मगर कुछ महीने बाद बिंदु की सगाई हो गई और विषय का अंत हो गया था। कुछ समय बाद किसी रिश्तेदार ने हंसिनी से उसके दफ्तर में साहिल को ले जाकर मुलाकात करवाई और कहा जब तक साहिल की नौकरी नहीं लगती खत लिख कर संबंध रख सकते हैं। फिर साल भर बाद हंसिनी के विवाह का निमंत्रण पाकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि खत का जवाब मिलना बंद होते ही आशंका होने लगी थी। अमृता से अचानक मिलना हुआ जब एक साथ इक जगह काम करने पर साथ आना जाना पड़ा और राह चलते बात होने लगी मगर दिल की बात कह नहीं सके दोनों ही। अचानक अमृता ने दफ्तर आना बंद कर दिया और जैसे कोई खो जाता है कुछ भी बताये बिना , मगर कोई वादा नहीं हुआ था दोनों में कभी। साहिल को थोड़ा एहसास हुआ जैसे कोई दोस्त नहीं मिले कुछ दिन तो याद आती है। फिर शायद पहली बार खुद किसी ने पसंद करती हूं कह कर हैरान कर दिया था। दो साल नाता रहा और लगता है जैसे बहाने बनाकर रचना इंतज़ार करती रही साहिल के और अच्छी नौकरी मिलने का मगर जब इंतज़ार नहीं किया गया तब इक कारोबारी से घरवालों की मर्ज़ी से शादी कर ली थी। साहिल अपनी नौकरी छोड़ दूर चला आया था और दस साल से अकेला रहने लगा मन से विवाह की बात ही भुला दी थी। उर्मिला से जान पहचान हुई तो उसने शर्त रखनी चाही जो साहिल ने मंज़ूर नहीं की थी। हर नाता कुछ दिन महीने या एक साल भर बाद टूट गया था। 

  मालिनी ने साहिल की डायरी से उसके जन्म की तारीख समय स्थान देख कर लिख लिया और अपने पंडित जी को जाकर कुछ भी नहीं बता कर ज्योतिष के अनुसार साहिल को लेकर कुंडली बनवाई। पंडित जी ने बताया कि साहिल का रिश्ता जिस भी लड़की से टूटता रहा वास्तव में ऐसी पांच लड़कियों की कुंडली में विधवा होने की संभावना रही है। मगर साहिल की आयु लंबी है तभी उन से विवाह तय नहीं हुआ और वो लड़कियां विवाह के कुछ साल बाद सुहागिन नहीं रही। वास्तव में साहिल के सितारे गर्दिश में कभी नहीं थे बल्कि खुशनसीबी है जो अविवाहित रहा अभी तक। मगर तुम उनसे अलग हो क्योंकि तुम सदा सुहागिन होने के सितारे पाकर आई हो साहिल के जीवन में। और ऐसे उनका विवाह हो गया था और अब दोनों साथ साथ ख़ुशी से रहते हैं। साहिल के सितारे अच्छे हैं तभी पांच पांच बार उन कश्तियों से किनारे लगने से पहले किसी मझधार में डूबने से बचता रहा है।

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