Tuesday, 21 May 2019

हमारे देश समाज का आदर्श मुहब्बत है नफरत नहीं है ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

 हमारे देश समाज का आदर्श मुहब्बत है नफरत नहीं है ( आलेख )

                                       डॉ लोक सेतिया 

    दौलत के पुजारी नहीं हैं हम हमने हमेशा सच्चाई अच्छाई ईमानदारी को सबकी भलाई को ही अपनाया है। गैरों को भी अपनाया हमने जो जिस से मिला सीखा हमने , हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है। गंगा जमुनी संस्कृति हमारी पहचान है जो भेदभाव की अलगाव की नफरत की बात करते हैं हमने कभी उनको अपना आदर्श नहीं बनाया है। कुछ बात है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा। सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा इसी कारण है। शांति अहिंसा हमारे आदर्श हैं और हमारे नायक हमेशा लोक कल्याण की भावना को महत्व देने वाले लोग बने हैं। फिर ये कैसे हो रहा है कि कोई इन सभी आदर्शों के विपरीत आचरण करता है और ये भी चाहता है लोग उसको महान समझें या स्वीकार करें। बाकी सबको छोटा और खराब घोषित करने से कोई कैसे नायक बन सकता है उस समाज में जो मानता है बड़े होने पर विनम्रता आती है अहंकार नहीं और माफ़ करना गुण समझा जाता है बड़पन्न कहलाता है। देश के बड़े और जनता के दिल में बसे हुए नेताओं को लेकर तब जब उनका निधन हुए बड़ा अर्सा बीत चुका है सभ्यता को ताक पर रखकर अशोभनीय शब्दों का उपयोग करना क्या इसको अच्छे संस्कार कहा जा सकता है। आसमान की तरफ थूकने का अर्थ जानते हैं सभी लोग। कोई भी बड़ा और महान अपने अच्छे कामों से बनता है किसी को बुरा कहने से आप अच्छे नहीं हो सकते हैं। इस देश में अधिकतर समय सत्ताधारी विपक्ष को आदर देते रहे हैं और जब किसी ने ऐसा नहीं किया उस काल को इतिहास का काला अध्याय समझा जाता है। लेकिन आज बेहद खेदजनक बात होती है जब कोई विपक्ष को समाप्त करने की अलोकतांत्रिक बात कहता है ये भूलकर कि ऐसी सोच रखने वालों को देश कभी स्वीकार नहीं करता है। देश की एकता अखंडता सबसे अधिक महत्वपूर्ण है किसी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा या फिर सत्ता की चाहत से बढ़कर समाज है संविधान है और सभी को समानता का जीने का विचार व्यक्त करने का बराबरी का हक भी है। नहीं विभाजित करने वालों नफरत की बात या सोच रखने वालों को देश पसंद नहीं करता है। जो ऐसा समझते हैं उनको इतिहास की धर्म की नैतिक मूल्यों की जानकारी हासिल करने ज़रूरी है। प्यार मुहब्बत भाईचारा हमारी पहचान भी हैं और हमारी महानता भी इन्हीं से है। भौतिकता की कीमत इनसे बढ़कर कदापि नहीं समझी जा सकती है।

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