Saturday, 30 March 2019

किरदार अच्छा होने का ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया - { पहली अप्रैल पर }

         किरदार अच्छा होने का ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया 

                                      पहली अप्रैल पर 

     मुझे समझदार लोगों से डर लगता है। देश समाज की भलाई नहीं अपने मतलब की चिंता करते हैं। सच तो है यही कि समझदारों को खुदगर्ज़ी की बात नहीं समझने वाले मूर्ख लगते हैं। सारी आयु मैंने यही सुन कर शराफत और अच्छाई का किरदार निभाया है भाई आप तो बहुत सच्चे अच्छे भलेमानुष हैं ईमानदार हैं। बस इसी उलझन ने बुरा होते हुए भी बुराई करने नहीं दिया कि लोग सोचते हैं ऐसा नहीं हूं तो कैसे कर सकता हूं। शायद बहुत लोग इसी तरह से बेवकूफ बनते हैं क्योंकि लोग जो कहते हैं किसी को वास्तव में समझते भी हैं लाज़मी नहीं बल्कि अधिकतर अपने मतलब की खातिर झूठी तारीफ किया करते हैं। पर मैंने अब नकली बनकर असली का आडंबर नहीं करने की निर्णय किया है। आज पहली अप्रैल का दिन कहते हैं मूर्खता करने का और मूर्ख बनाने की अवसर है वास्तव में लोग साल भर औरों को ही नहीं खुद को भी धोखा देने का काम करते हैं आओ आज मूर्खता दिवस पर मूर्खता का त्याग करने पर विचार करते हैं। ये विषय बहुत बड़ा है इसका विस्तार बहुत है और आजकल सब लोग संक्षेप में बात करना उचित समझते हैं इसलिए क्या क्या वास्तव में है क्या नहीं है मगर है इस का दिखावा करते हैं कुछ  मुख्य बातों की चर्चा करते हैं।

                 घर से सरकार तक हर इक शख्स जो है नहीं वही बनकर रहता है। कोई किसी को नहीं चाहता केवल अपने मतलब की चाहत रखता है मगर दावा हर किसी की भलाई का चाहत का करता है। सरकार और जनता का रिश्ता घोड़े और घास जैसा  है और घोडा घास से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या। चाकू और खरबूजा दोस्त बन नहीं सकते ख़रबूज़ा कटना ही है चाकू उस पर गिरे या वो चाकू पर। नेता अधिकारी बेदर्द और बेरहम होते हैं मगर दिखावा नर्मी और नेकदिली का करते हैं , कितना मुश्किल है हर घड़ी इक मुखौटे को अपना चेहरा बनाना। कमाल का अभिनय है और सभी अभिनय करते हैं। घर में हर रिश्ता इसी तरह निभाया जाता है आप कितने प्यारे हैं बताया जाता है मतलब को हर नाज़ उठाया जाता है। पति पत्नी को हर खराबी इक दूजे में दिखाई देती है फिर भी साथ रहने में भलाई समझ आती है। हर कोई खुश करने को झूठ का सहारा लेता है। दिल कुछ होंट कुछ कहते हैं बनावटी नाते निभाते रहते हैं दुनियादारी इसी को कहते हैं। सरकार की बात और होती है हाथ पकड़ती है और ठोकर लगाने की लात और होती है।

      हर कोई भगवान अल्लाह खुदा ईश्वर की बात करता है। उसके दर पर जाकर आडंबर करता है कोई नहीं ऊपर वाले से आजकल डरता है। भगवान की मूर्ति उसकी छवि के सामने क्या क्या नहीं विचार करता है बस पल भर में आंखों से ओझल होते ही जो मनमर्ज़ी करता है आस्तिकता दिखावा है भगवान है कोई नहीं भरोसा करता है। जाने कहां रहता है खुदा आसमानों में और बैठा क्या करता है उसकी कथा उपदेश आरती अर्चना से कहां कोई सुधरता है। सच की बात कौन करता है हर आदमी सच बोलने से डरता है झूठ की बात कितनी अच्छी है कितना मीठा मीठा लगता है। झूठ की महिमा सारी है हर कोई उसी पर बलिहारी है। झूठ कितने काम आता है सबसे स्थाई यही नाता है। चाहने वाले सभी हैं झूठ के देवता के नाम सच का लेते हैं ये सच सबसे बड़ा झूठ है। झूठ खुद इक पहाड़ जैसा है सच समझता है खुद को ऊंठ की तरह ऊंचा है , ऊंठ जब पहाड़ के नीचे आता है तब उसको समझ आता है। सच का कोई वजूद नहीं झूठ हर कण कण में बसता है। अब कोई अवतार आया है जो झूठ का खुदा लगता है उसके चाहने वाले कहते हैं भविष्य झूठ का है और रहेगा हमेशा बिना पांव चलना आता है जहाज़ की उड़ान भरता है आसमान की ऊंचाई छूता है अंतरिक्ष की भी बात करता है। थूक में पकोड़े तलते हैं रोज़ कोई तरकीब घड़ते हैं। धर्म वाले कमाल करते हैं जाने कितना धमाल करते हैं धर्म की दुकानदारी है झूठ का मोल सच पे भारी है। झूठ दिन भर बिकता जाता है सच का ढेर कूड़े में जाता है। हमने भी कारनामा कर दिखाया है झूठ का देवता बुलाया है उसको भवन में सजाया बिठाया है। आप भी आना आपको बुलाया है।

      झूठ के मंदिर की बात सच्ची है। मेरा शहर इक ऐसी बस्ती है जिस में सच झूठ भाई भाई हैं कौन असली कौन नकली की लड़ाई है। झूठ कल तक बेघर फिरता था जाने किस किस जगह सच बनकर रहता था अब उसका बना ठिकाना है झूठ को मिलकर हमने मनाना है। झूठ का गुणगान सभी करते हैं फिर क्यों झूठ की पूजा करने से डरते हैं। झूठ का वरदान सच होता है हर झूठा नेता महान होता है झूठ बोलने से सबका कल्याण होता है। पहला मंदिर अभी बनाया है हर झूठे को मगर बुलावा भिजवाया है , कल गांव गांव शहर शहर उसके मंदिर होंगे सच से ऊंचे बढ़कर होंगे। आपके पास कितने अवसर होंगे झूठ के देवता घर घर होंगे। झूठ का भी चलीसा होगा कोई किताब कोई पहचान होगी सबसे अलग उसकी शान होगी। झूठ कलयुगी भगवान है जो नहीं समझे बड़ा नादान है। कोई चढ़ावा नहीं चढ़ाना है झूठ कहना सुनना है सुनाना है यही सच है सबको बताना है। याद रखना आपको आना है झूठ के मंदिर पे सर झुकाना हैं शुभ महूर्त है पहली अप्रैल का याद रखना है नहीं भुलाना है।

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