Wednesday, 27 March 2019

देवी देवताओं का निलंबन और नियुक्ति ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

 देवी देवताओं का निलंबन और नियुक्ति ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

              सूचना अतिआवश्यक है , भगवान को भी व्यवस्था बदलने को करोड़ों सदियों बाद अपना तरीका अपना विधान बदलना पड़ा है। सभी धर्म की कमाई करने वालों की नई व्यवस्था लागू होते ही देवी देवता बदलने होंगे और उनकी जगह नियुक्त नये देवी देवता नये विभाग के संचालन को अपनी अपनी जगह स्थापित करने होंगे। पहली अप्रैल के बाद पहले के देवी देवता आपको कुछ भी देने को समर्थ नहीं होंगे।  ऐसा हुआ क्यों सभी हैरान हैं मगर राज़ की बात आखिर सामने आ ही जाती है। भगवान तो जाने कब से नींद का आनंद ले रहे थे और समझते थे कि इतने देवी देवता अलग अलग कार्यों का ध्यान रखने को नियुक्त कर रखे हैं सब अपना अपना काम ढंग से करते ही होंगे। नारद जी ने आकर जगाया और समझाया कि वास्तविकता कुछ और ही है।  नारद जी भी भारत की सैर करने गये और देखा चुनाव होने वाले हैं और कोई नेता गद्दी को छोड़ना नहीं चाहता इसलिए सब हथकंडे आज़मा रहा है। जिन जिन वादों पर खरा उतरना था उनकी बात करने से कतरा रहा है और जनता को लुभाने को अनहोनी को होनी कर दिखला रहा है। अच्छा समय जा चुका मगर वो वापस आता बतला रहा है। अपने को मसीहा समझता है खुदा बनना चाह रहा है हर बार कोई जाल बिछा रहा है। मन ही मन घबरा रहा है और सभी को खराब साबित कर अपने पे इतरा रहा है। देश भर में इक नशा सा छा रहा है हर नेता झूठ को सच बना रहा है जनता का भरोसा टूटता जा रहा है। सच कहीं भी नज़र नहीं आ रहा है झूठ खुद को सच बतला रहा है। नारद जी देखते रह गये सब देवी देवता वास्तव में पत्थर हो गये हैं रात दिन का अंतर नहीं रहा घंटियां बजती हैं सुनता कोई नहीं जैसे सभी सो गये हैं।

     नारदवाणी सुन भगवान की नींद उड़ गई और बारी बारी हर देवी देवता को बुलवा कर कटघरे में खड़ा कर पूछा कैसे आपने इतना अनर्थ होने दिया। धर्म स्थल भव्य बनवाने की चाहत में खोये रहे अपना काम करना था जो नहीं किया। अगर आम जनता काम नहीं करने पर दल को नेताओं को बदल देती है तो मैंने अभी तक क्यों ये शुभकर्म नहीं किया। शिक्षा की देवी अपने विद्या को बिकने का सामान बन जाने दिया , जिन देवता को सभी की सुरक्षा करनी थी अपनी महिमा सुनते रहे मगर अपनी आरती अपनी कथा को निभाने में नाकाम रहे। इस दुनिया को अमन का ठिकाना बनाना था और बना दिया आतंकवाद का महल जैसा। कोई भी सुरक्षित है नहीं। कुबेर का खज़ाना भलाई और समाज सेवा करने की जगह जंग नफरत का विस्तार करने को उपयोग होने लगा। लक्ष्मी देवी सोने चांदी से अधिक कागज़ी बनती गई और अपनी आभा खो कर काला धन की बदनामी का दाग़ माथे पर लगवा बैठी। कहां शासक गरीबों की सहायता करते थे और अपना खज़ाना समाज कल्याण पर खर्च किया करते थे मगर समझते थे कि देने वाला तो ऊपरवाला है हम तो उसका दिया आम जनता तक पहुंचाते हैं। लोग जब समझते हैं हम देते हैं तो हमारी नज़र झुक जाती है , रहीम जी का दोहा कितना सच्चा है। मगर आजकल शासक जनता की खून पसीने की कमाई छीन कर खज़ाना भर अपने आडंबर शान दिखाने और ऐशो आराम सुख सुविधा पर खर्च करने का महापाप करते हैं और दावे करते हैं हमने क्या क्या किया है। देते कुछ भी नहीं केवल देने की बात करते हैं जनता को ठगने को सत्ता पाने को। न्याय की देवी आंखों पर पट्टी का अर्थ आंखें बंद रखना नहीं समानता से न्याय की बात करना होना चाहिए मगर जब हर कोई अपनों को बार बार रेवड़ियां बांटने का अपराध करता है तब न्याय बचता कहां है। धर्म की शिक्षा देने वाले लोभी लालची और अहंकारी ही नहीं तमाम बुरे कर्म अपराध व्यभिचार करने लगे तब जिनको नियुक्त किया था जब जब अपराध बढ़ता है उसका अंत करने को धरती पर आता हूं उसको अपना वादा भी भूल गया। मुझ ईश्वर पर नहीं होने का आरोप लगने लगा है और समझने लगे हैं कि भगवान होने की बात मतलबी लोगों की अपने स्वार्थ पूरे करने की बनी बनाई बात है। आप सभी अपने अपने विभागों को सुचारु ढंग से चलाने में असफल रहे हैं बल्कि आपकी जगह जाने कैसे कैसे लोग देवी देवता का रूप धारण कर विराजमान हैं। मुझे खेद है जिस तरह आज़ाद भारत की सरकार संविधान की पालना समानता की बात को दरकिनार कर मनमानी करती रही हैं और निक्क्मी साबित हुई हैं आप सभी देवी देवता बिल्कुल उनकी तरह अच्छाई को छोड़ बुराई का साथ देते रहे हैं और चढ़ावे और अपने गुणगान के आदी होकर किसी काम के नहीं रहे हैं।

        सभी देवी देवता शर्मसार हैं विधाता के सामने और माफ़ी मांगने तक का अधिकार खो चुके हैं। निर्णय सुनाया गया है आपके सभी अधिकार वापस लिए जाते हैं और आपको पदमुक्त किया जाता है। जिस तरह भारत देश में सेवानिवृत होने पर सरकारी आवास कार और साधन छोड़ने पड़ते हैं इस महीने 31 मार्च को आपको अपना सभी छोड़ना होगा और किसी भी धर्म स्थल में आपका कोई अस्तित्व नहीं बचेगा। कोई भी आपकी पूजा आरती करेगा तो बेकार होगा और आप किसी को कोई वरदान क्या अभिशाप तक नहीं दे सकोगे। अपने खुद को पत्थर का नहीं बनाया इंसानों को भी हृदयहीन पत्थर का बनाने का काम किया है। मानवता की भावना किसी पत्थर में कैसे हो सकती है। भविष्य में मुझे ही सब कुछ फिर से ठीक करना होगा भले इसके लिए इस दुनिया को प्रलय लाकर मिटाने और इक नई दुनिया बनाने की बात करनी पड़ सकती है क्योंकि इस दुनिया को इतना बर्बाद और खराब होने दिया गया है कि इसको ठीक करने से अच्छा विनाश कर फिर इक नई दुनिया का निर्माण करना है। बस झूठ की महिमा का गुणगान करने का अंतिम समय आ गया है और किसी भी जगह झूठ को सिंहासन पर नहीं रहने दिया जा सकता है। सूरज के आसन पर अंधेरों का अधिपत्य आखिर कब तक। भगवान के कोप से देवी देवताओं का अस्तित्व मिट रहा है राख बनते जाते लगने लगे हैं और चार दिन बाद उनकी राख भी जाने किस तरफ हवाएं उड़ा कर ले जाएंगी। आप पहली अप्रैल से पुराने किसी देवी देवता की आरती पूजा अर्चना करेंगे तो बदले में बाबाजी का ठुल्लू मिलेगा।


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