Tuesday, 12 September 2017

अंधेर नगरी चौपट राजा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

    अंधेर नगरी चौपट राजा ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

             राजा तो कोई होता नहीं फिर भी खुद को सेवक भी कोई समझता भी नहीं। सत्ताधारी दल को शायद गर्व हो सकता है बुलेट ट्रैन की आधारशिला रखने पर , क्योंकि और तो कुछ भी अच्छा देश को मिला नहीं भाषणों के सिवा। महंगाई बेरोज़गारी अपराध बढ़ने और नेताओं की असंवेदनशीलता की कोई सीमा बची नहीं है। जनता से अधिक से अधिक पैसा लूटने का काम किया जा रहा है हर तरह से , पेट्रोल के दाम विश्व में आधे हो गए मगर सरकारी लालच कम नहीं हुआ। इक तमाशा रोज़ होता है , उत्तर प्रदेश में किसानों को दस बीस और सौ दो सौ की राशि का चेक मिलता है और कार्यकर्म में नाच गाना होता है महिला नृत्य का। जिनकी सरकार उनको मनोरंजन ज़रूरी लगता है हर अवसर पर। इधर जापान से अनुबंध कर एक लाख करोड़ की राशि से केवल दो शहरों में बुलेट ट्रैन की शुरुआत की जा रही है। आपको जानकर अचरज होगा कि ये राशि देश की स्वास्थ्य सेवा की राशि से दोगुनी है और शिक्षा की राशि से भी दोगुनी है। वास्तव में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों की राशि को मिलाकर भी इस से कम बजट खर्च करती है सरकार। देश में तीस प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और अभी भी पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य अधूरा है। गरीबों की बात करने वालों की प्राथमिकता गरीब नहीं हैं। क्या जिस मार्ग से नेता को गुज़रना हो कुछ देर को बस उसी को साफ़ सुथरा और सुंदर बनाया जाना उचित है। अगर देश वास्तव में स्वच्छ करना है तो इसको बंद करना होगा , ख़ास लोगों को भी जो वास्तविकता है दिखाई देनी चाहिए। कब तक आप केवल शोर मचाकर देश की जनता को धोखे में रख सकते हैं। विपक्ष का उपहास करना जनतंत्र के खिलाफ है जो सत्ताधारी दल के लोग करते नज़र आते हैं। इसे देखकर लगता है जैसे इतना बहुमत पाकर उनको अहंकार हो गया है , जबकि बहुमत जिन अच्छे दिनों की बात से मांगा था उनका कहीं अता पता नहीं है। काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती ये याद रखना ज़रूरी है।

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