Sunday, 28 May 2017

इक भजन सब से अलग है

       इक भजन सब से अलग है 


ये भजन मेरी माता जी हर समय गाती - गुनगुनाती रहती थी।
 मैंने फिल्मों में और सभी जगह बहुत भजन सुने हैं
मगर मुझे जो अलग बात इस भजन में लगती है।
कहीं और नहीं मिली अभी तलक।
भजन का मुखड़ा ही याद है
उसके बाद उस भजन की बात को खुद मैंने।
अपने शब्दों से सजाने का प्रयास किया है।
ये भजन अपनी प्यारी मां को अर्पित करता हूं।
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भगवन बनकर तू अभिमान ना कर ,
तुझे भगवान बनाया हम भक्तों ने।

पत्थर से तराशी खुद मूरत फिर उसे ,
मंदिर में है सजाया हम भक्तों ने।

तूने चाहे भूखा भी रखा हमको तब भी ,
तुझे पकवान चढ़ाया हम भक्तों ने।

फूलों से सजाया आसन भी हमने ही ,
तुझको भी है सजाया हम भक्तों ने।

सुबह और शाम आरती उतारी है बस ,
इक तुझी को मनाया हम भक्तों ने।

सुख हो दुःख हो हर इक क्षण क्षण में ,
घर तुझको है बुलाया हम भक्तों ने।

जिस हाल में भी रखा है भगवन तूने ,
सर को है झुकाया हम भक्तों ने।

दुनिया को बनाया है जिसने कभी भी ,
खुद उसी के है बनाया हम भक्तों ने।

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