Wednesday, 8 February 2017

सत्ता के मद में हैं जनाब ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

शायद इसकी कल्पना किसी को नहीं थी जिस तरह से सत्ता अपने मद में चूर हर किसी को अपमानित कर रही है। बेशक जिन से सत्ता छीनी है जनता ने और आपको सत्तासीन किया है उन्होंने बहुत गलत किया था , जिस की राजनीतिक सज़ा उनको चुनाव में हार के रूप में मिली है। पर आप शायद भूल गये उनके अपकर्मों की सज़ा देने को ही आपको जिताया देश की जनता ने आप पर भरोसा कर के कि आप जनता की बदहाली को दूर करेंगे। पिछली सरकार के घोटालों की जांच और कानूनी सज़ा दिलवाना आपका काम है , मगर उसी तरह जैसे निष्पक्ष न्याय किया जाता है। मगर जिस तरह आप संसद में विपक्ष को निम्न स्तर की भाषा से अपमानित करने का कार्य कर रहे  हैं उस से खुद आपके भीतर का डर दिखाई देता है। कैसी विडंबना की बात है आप ऐसा करते हुए इतिहास और नीति की बात कर रहे हैं जब की खुद उसी का पालन नहीं कर रहे हैं। सुना तो आपने भी होगा जिस पेड़ पर फल लगते हैं वो झुकता है। किसी को अपमानित करना भले वो आपका विरोधी भी हो आपका गौरव नहीं बढ़ाता है। जब आपको संसद में सवालों के जवाब देने थे तब आपने संसदीय मर्यादा की चिंता छोड़ अपनी मर्ज़ी से जनसभा में अपनी बात रखी ताकि आप पर सच या झूठ कहने  के लिये किसी नियम में संसद में कोई करवाई  नहीं हो सके। आपने भाषणों  में जिसे चाहा काले धन का समर्थक घोषित कर दिया और ये साबित करना चाहा केवल आप और आपका दल ही सच्चा देशभगत व ईमानदार है। अदालत आपकी वकील आप न्यायधीश भी आप , ये कैसा लोकतंत्र है। आपने देश को जो वादे किये थे वो अभी तलक सच हुए लगते तो नहीं। आपने कहा इतिहास को पढ़ते रहना चाहिए मगर शायद आप खुद भूल गये देश का पुराना नहीं आज़ादी के बाद का इतिहास। जिसे बुरी तरह हराया जनता ने लोकतंत्र की रक्षा की खातिर , जब देखा नये शासक सत्ता का दुरूपयोग बदले की भावना से करने लगे तब उनको भी हटाकर फिर  से उसी को चुन लिया , पांच साल भी नहीं रही वो सरकार। आज आपको अगर खुद अपने कामों पर यकीन होता कि आपने सत्ता पाकर अच्छे काम किये हैं जिन से जनता खुश है तो आप अपने काम पर वोट मांगते , जब कि आज भी आप दूसरे लोगों की गलतियों की ही बात करते हैं भाषण में। क्यों नहीं कह सकते देखो मेरी सरकार ने वास्तव  में अच्छे दिन ला दिये हैं। क्योंकि आपकी घोषित की सभी योजनाएं उसी तरह भ्र्ष्टाचार और लालफीताशाही से असफल की जा चुकी हैं। आप हर बार रावण बताकर किसी को बुरा साबित कर भी लें तब भी आप राम हैं ये साबित नहीं हो सकता। कब तक आपको केवल इसी लिये सत्ता मिलती रह सकती है कि कोई दूसरा बुरा है। आप खुद कब अच्छे बनकर दिखाओगे।
                                इक कहानी है , इक बुरा आदमी शराबी जुआरी और धूम्रपान करने वाला होता है , दूसरा जो ये सब नहीं करता और खुद को शरीफ समझता है , अन्यायी और अत्याचारी साबित होता है , जब कि पहला अत्याचार को मिटाने वाला बन नायक कहलाता है। पहले की बुराईयां सिर्फ खुद उसी को नुकसान पहुंचा रहीं थीं जबकि दूसरे की सारे समाज को।

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