Tuesday, 18 October 2016

तू कहीं मेरा ही कातिल तो नहीं ( सत्येन्द्र दुबे की आत्मा पूछती है ) आलेख डॉ लोक सेतिया





     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ,  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी  , टीवी और अख़बार वालो पत्रकारो , सच के झंडाबरदार मीडिया वालो , खुद को जनसेवक कहने वाले और देशभक्त बताने वाले नेता और आला अधिकारी , आप सभी देखो ध्यान से इन तस्वीरों को , नहीं याद आया ये चेहरा , आप सभी से सवाल करती है सत्येंद्र दुबे की आत्मा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया में इंजीनियर युवक जिसका दोष यही था कि उसने तब के देश के प्रधानमंत्री जी के कार्यालय को सूचित किया था भ्र्ष्टाचार के बारे में और वो गोपनीय जानकारी भृष्ट लोगों तक पहुंची और उसको कत्ल करवा दिया गया।

                             जन्म :-   2 7 नवंबर 1 9 7 3

                          कत्ल हुआ :- 2 7 नवंबर  2 0 0 3

     
     कोई सबक सीखा किसी ने , बिल्कुल भी नहीं। आज भी कोई शिकायत करे अगर सरकारी धन संम्पति की लूट की अपराध की तब क्या होता है जानते हैं। सत्ताधारी दल का कोई नेता आदेश देता है विभाग को अधिकारियों को जो अनुचित कार्य या गैर कानूनी काम करता उसको बचाने को। शिकायत करने वाले को जब मालूम होता है सभी देश को लूटने में शामिल हैं तब उसको क्या समझ आता है , खामोश रहो या जान से हाथ धोने को तैयार रहो। जाने कितने निर्दोष कत्ल हो रहे हैं कोई नहीं जानता किस तरह , आप ऐसे वातावरण में देश और समाज को महान और प्रगति की राह पर जाता बताते हैं। बेशक ऐसे मरने वाले की लाश पर मगरमच्छ जैसे आंसू बहाने वो भी जाते हैं जिनके कारण कत्ल हुआ।

               अब और कुछ नहीं रहा कहने को हां मेरी ग़ज़ल का इक शेर पेश है :-


                  " तू कहीं मेरा ही कातिल तो नहीं , मेरी अर्थी को उठाने वाले "

                 

No comments: