Friday, 15 April 2016

अभी बाकी यही इक काम करना है ( ग़ज़ल ) डॉ लोक सेतिया "तनहा"

       अभी बाकी यही इक काम करना है ( ग़ज़ल ) 

                         डॉ लोक सेतिया "तनहा"

अभी बाकी यही इक काम करना है
हमें तकदीर को फिर से बदलना है।

चहक कर सब परिंदे कह रहे सुन लो
उन्हें हर आस्मां छूकर उरतना है।

यही इक बात सीखी आज तक हमने
न कह कर बात से अपनी मुकरना है।

न भाता आईना उनको कभी लेकिन
उन्हें सज धज के घर से भी निकलना है।

हमारी प्यास बेशक बुझ नहीं पाई
हमें बन कर घटा इक दिन बरसना है।

उसी से ज़िंदगी का रास्ता पूछा
कि जिसके हाथ से बेमौत मरना है।

नई दुनिया बसाओ खुद कहीं "तनहा"
हुआ मुश्किल यहां पल भर ठहरना है।