Monday, 10 February 2014

नया मदारी , नया तमाशा ( तरकश ) डा लोक सेतिया

राजनीती के खेल में इक नया मदारी आया है। उसने आकर बातों से सब को बहलाया है , भरमाया है। कोई नई छड़ी दिखाने को लाया है , राजधानी में जादू चलाकर दिखाया है। हर तरफ धूप में आता नज़र साया है। क्या बतायें हमने क्या खोया है और क्या पाया है। खाली हाथ आया है , कहता है सब ले आया है। अब नई कानून की इक छड़ी बनानी है , बस उसी से सब को सज़ा दिलानी है। उसके पास अलादीन की कोई निशानी है , चालीस चोरों वाली नई कहानी है। खुल जा सिम सिम नहीं होगा इस ज़माने में , काम आयेगी छड़ी कोई लोकपाल लाने में। उस छड़ी से गायब सब बलायें कर देगा , और झोली सबकी मोतियों से भर देगा। बस ज़रा सी मुश्किल पेश आई है , उसने सभा बस उस जगह बुलाई है। इक तरफ कुआं है सामने और पीछे भी खाई है। मान जाओ बात उसकी इस में ही अब भलाई है। भूख नहीं लगेगी , प्यास नहीं लगेगी , उसके मंत्र से पूरी ज़िंदगी चलेगी। खेल है मदारी का नया तमाशा है , बस सभी के मुंह में दे दिया बताशा है। बिजली मिलेगी पानी मिलेगा , अब किसी का कोई भी न मीटर चलेगा। इक छड़ी बनाने दो उसे ये कहता है , कुछ कोई न सोचो क्या क्या बना जो ढहता है। हर किसी टोपी अपनी जब पहनाता है , कल का शैतान भी भगवान कहलाता है। खुद को बताया नया इक अवतार है , जय जो उसकी बोले उसकी नैया पार है। गर ना मानी तुमने सामने मझधार है। नित  कोई बिसात वो शतरंज की बिछाता है , या कोई चौसर के खेल में बुलाता है। चाहे नज़र आता कोई भी पासा है , जीत वही जाता है , ताली बजाता है। अब सभी जगह बस उसी का राज होगा , इक मदारी के सर पर ही सजा ताज होगा। पर सभी को इस बात की खबर है , पल भर को रहता हर जादू का असर है। जब भी उसका खेल देख कर बाहर सब आते हैं , फिर वही पुरानी दुनिया सामने पाते हैं। खेल हर खिलाड़ी का इक सुहाना सपना है , सब उसी के पास रहता कुछ भी न हुआ अपना है। सोचते थे लोग सब थाली मिलेगी , कौन जानता था जेब खाली मिलेगी।
( अभी बात अधूरी है , बाद में पूरी की जायेगी वादा है )