Sunday, 17 January 2021

हज़ारों वर्ष बाद आज की बात ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

     हज़ारों वर्ष बाद आज की बात ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया 

हम सभी नहीं होंगे न हमारा कहीं कोई नामो निशान बचा होगा मगर कुछ लोग गहरी खुदाई करेंगे पुरातन युग , ( हम तब ख़ाक बन कर मिट्टी में समाए होंगे इस युग काल के निशान ) , की जानकारी हासिल करने को और उन्हें जो मिलेगा उस से आधुनिक काल की कथा दोहराई जाएगी। कुछ तस्वीरें कुछ लिखित दस्तावेज़ कुछ वीडियो फिल्मों के टुकड़े और शायद किसी ऐसे कथाकार की शासक की महिमा के गुणगान वाली रचना से भक्त और भगवान को लेकर गीता रामायण से अधिक विश्वसनीय कथा को समझा समझाया जाएगा। उस समय की सरकार शोध और जांच करवाएगी और विशेषज्ञ लोग घोषणा करेंगे कि इस धरती पर साक्षात भगवान राजा बनकर राज करते थे। हर घर में रोज़ किसी साक्षात भगवान के दर्शन तमाम तरह की ऐप्प्स टीवी चैनल पर रेडियो पर पाकर लोग दुःख दर्द भूल जाते थे। बस इक वही शासक सबसे अच्छे सच्चे की आरती गाकर उनको मनाते थे। भगवान सत्ता पर बैठकर मौज मस्ती करते थे विश्व भर के देशों में जाकर परचम फहराते थे सभी शासक उनके सामने सर झुकाते थे वो किसी को गले लगाते थे किसी से हाथ मिलाते थे। कभी तितलियां उड़ाते कभी मोर नचाते थे गरीबी भूख बेरोज़गारी की समस्या से नहीं घबराते थे। जिन लोगों को राक्षस लुटेरा बताते थे उन्हीं से मिलकर सरकार बनाते थे उनके संगी साथी उन्हीं के साथ बहती गंगा में नहाते थे पाप अपराध से मुक्त पावन भक्त मुक्तिदान पाते थे। लोग उन्हीं के कहने से दीप जलाते तालियां बजाते थाली पिटवाते थे बड़ी से बड़ी चुनौती का यही ईलाज होता था महामारी को इसी तरह भगाते थे। 
 
भगवान बड़े शानदार लिबास हर पल बनवाते थे बस इक झलक देख कर लोग धन्य हो जाते थे। जनाब कभी कुछ कभी कुछ नज़र आते थे चाय बनाते कभी चौकीदार बनकर छा जाते थे। चौकीदार अपना वेतन किसी को नहीं बताते थे लोग हिसाब लगाकर समझाते थे करोड़ों रूपये चौकीदारी पर खर्च आते थे। कोई कोरोना राक्षस आया था जिसे उन्होंने अवसर बनाया था घर हर किसी को बिठाया था पर उनको समझ नहीं आया था खुद उन्होंने किसे बुलाया था या डर को दूर भगाया था। कोई भी नहीं जान पाया था दैत्य बनकर जो आया था सच था या उनकी कोई माया था। हाथ धुलवाना मुंह ढकना मास्क सभी को पहनाया था आपस की दूरी है ज़रूरी गीत गाकर समझाया था। किसी को राजनीती समझ आएगी हज़ारों वर्ष बाद जिन्न सामने आएगा उस भगवान की कथा लिखवाकर पढ़ना ज़रूरी कवरायेगा। जिस जगह उनके होने के निशान मिले वहीं उनका मंदिर बनेगा का जयघोष लगाकर विजयी होकर सत्ता पाएगा।
 
खोज करते समय ये राज़ सामने अवश्य आया हज़ारों साल पहले झूठ सबसे बड़ा सच था कहलाया। झूठ जाकर गंगा नहाया बाहर निकलते सच मिल गया का शोर मचाकर सच को झूठ और खुद को सबसे विश्वसनीय सत्य बताकर सच का सिंघासन पाकर इतराया। वास्तविक सत्य को झूठ ने कपोल कल्पना बतलाकर झुठलाया। विश्व भर में सबसे झूठा सच को हराकर देवता की उपाधि लेकर अच्छे दिन की सौगात का वादा कर बदहाली बर्बादी को लाया। विनाश उसके शासन में था विकास कहलाया झूठ वाला सच विनाश वाला विकास डराने लगा बनकर कोई बुरा साया। लोग पढ़े लिखे भी सोचना समझना छोड़ झूठ की महिमा बताने लगे , विवेक को ताक पर रख कर झूठ की हर बात पर ताली बजाने लगे। शिक्षा ज्ञान विज्ञान को छोड़ अंधविश्वास बढ़ाने लगे जो नहीं दिखाई देता सामने नज़र आ रहा सभी को समझाने लगे। झूठ का पक्ष सबको समझाने लगे पढ़ने के  नाम पर उल्टी पट्टी पढ़ाने लगे। सच पराजित हो चुका उसने ख़ुदकुशी कर ली साबित करने को सबूत दिखाने लगे। यही सबसे बड़ा झूठा इस युग का सच है भगवान से बड़ा भगवान बनाने लगे। झूठ का बोलबाला था उसका चलन निराला था चेहरा उसका गोरा था मन का लेकिन वो काला था। चौकीदार चोरों की खाला था चोरों को उसने पाला था अंदाज़ उसका निराला था। सच हर किसी को लगता कड़वा था झूठ चख कर जाना बड़ा मीठा था सबको मीठा पसंद आया था सच से दामन हर किसी ने बचाया था। झूठ बिना पांव तेज़ चलता है हवाओं में उड़ता रहता है उसकी अपनी कोई ज़मीन नहीं उसको लेकिन सच पर यकीन नहीं। झूठ की बात अजब है उस से बढ़कर कोई हसीन नहीं शायर कह गया है ज़रा सा तौर तरीकों में हेर फेर करो , तुम्हारे हाथ में कालर हो आस्तीन नहीं।
 
नाम अपना भी सामने आएगा ये सच भी छिप नहीं पाएगा ऐसा भी इक लेखक हुआ करता था जिसने उसको मसीहा नहीं माना था। तीखी आलोचना करता था सच बेबाक कहता लिखने से नहीं डरता था। ये भी सच्चाई होती है जिसकी बुराई होती है उसकी हर बात में बढ़ाई होती है बदनाम हुए तो भी नाम हुआ शोहरत की कमाई होती है। कोई भगवान नहीं बन सकता है जब तक उसके सामने कोई सवाल खड़े नहीं करे और ऐसा भी होता है भगवान कहलाने वाला खामोश रहता है उसके अनुयाई सवाल का जवाब नहीं देते सवाल करने पर सवाल करते हैं। हिरण्यकश्यप भी भगवान कहलाता था प्रह्लाद उसको ईश्वर नहीं समझता था होलिका से अग्नि में जलवाने को जो शाल उसकी बहन ने अपने सर पर बचाव को ओढ़ी उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आई और जलाने वाली खुद जल गई। ऐसी कथाएं काल्पनिक लगती हैं मगर आस्था उनको जीवित रखती है। जितने भी अवतार हुए अथवा मसीहा कहलाये उन सभी को उनकी ऊंचाई किसी और ने उनकी सत्ता और महानता को स्वीकार नहीं कर देने में सहयोग दिया है। लोग याद रखेंगे मैंने जो शेर कहा है। 

                             तुम ख़ुदा हो तुम्हारी खुदाई है 

                             हम तुम्हारी ईबादत नहीं करते।