Tuesday, 1 October 2019

विचार को बेजान पत्थर बना देना ( गांधी लाल बहादुर जेपी की बात ) डॉ लोक सेतिया

विचार को बेजान पत्थर बना देना ( गांधी लाल बहादुर जेपी की बात )

                                             डॉ लोक सेतिया

  गांधी कोई वस्तु नहीं अपने इक विचार को बेजान पत्थर बना दिया। अब उस पत्थर को बेशकीमती कह कर राजनीति के कारोबार के शोरूम में ऊंचे दाम बेचना चाहते हो। अपने कभी गांधी को पढ़ा है कभी नहीं सुना अपने गांधी की विचारधारा को समझने को कोई कार्य किया हो उनकी लिखी हुई किताबों को लोगों तक पहुंचाने को कोई पहल की हो। गांधी जी की तीन बातें बंदर वाली बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत कहो ये तो जानते हैं सभी मगर अपने बुराई देखने बुराई की बात कहने का काम हर दिन किया है। मुझे उनसे अलग नहीं किया जा सकता जिनको अपने खराब नहीं बेहद बुरा साबित करने में हर मर्यादा हर सीमा को पार कर दिया है। मुझे किसी ने एक बार क़त्ल किया था अपने मेरी आत्मा को बार बार घायल किया है। मैंने आखिरी व्यक्ति के आंसू पौंछने की बात कही मगर आपको जनता के आंसू दुःख दर्द दिखाई ही नहीं देते हैं। मैंने गरीब को नंगे बदन देख कर एक धोती पहनने का संकल्प लिया और अपने हर दिन शानदार लिबास पहनने सजने संवरने का कीर्तिमान स्थापित करने पर देश का खज़ाना लुटाया है। गांधी और आप कभी साथ नहीं हो सकते हैं एक दूजे के विरोधी हैं।

        लालबाहुदर को जानते हैं उनका भी जन्म 2 ऑक्टूबर को ही हुआ था। कद छोटा था आदमी बड़ा था और देश को आत्मविश्वास से भरा था साहस से जवान और किसान की जय का केवल नारा नहीं संदेश जन जन तक पहुंचाया था। मैंने तो कभी कोई राजनैतिक सत्ता का पद नहीं हासिल किया लालबहादुर बैठे थे इस पद को सुशोभित किया था सादगी से देश की सेवा की थी। आपको उनकी दो चार बातें बताना ज़रूरी हैं , जब दल का कामकाज किया करते थे उनको पार्टी से 25 रूपये महीना मिलते थे घर खर्च चलाने को जो वे अपनी पत्नी को दे देते थे। इक दिन इक दोस्त उनसे सहायता मांगने आये सौ रूपये की ज़रूरत थी तो उन्होंने कहा कि माफ़ करना मेरे पास तो कुछ भी नहीं है , मगर तभी किवाड़ के पीछे से पत्नी ने इशारा कर बुलाया और कहा आपको उनकी सहायता करनी चाहिए। मगर मेरे पास पैसे कहां हैं जो घर खर्च को मिलता है आपको दे देता हूं अपने पास नहीं रखता कोई पैसा। पत्नी ने बताया मैंने बचा रखे हैं जो आप देते हैं 25 रूपये उस में से 20 से गुज़ारा हो जाता है 5 रूपये बच जाते हैं और सौ रूपये हैं उनको देकर सहायता कर सकते हैं। और लालबहादुर ने ऐसा करने के बाद इक खत लिखा था पार्टी अध्यक्ष को जिस में कहा गया था भविष्य में मुझे 25 रूपये नहीं 20 रूपये मासिक भेजे जाएं क्योंकि मेरा काम उतने से चल जाता है। ईमानदारी इसको कहते हैं। रेल विभाग के मंत्री बने तो अपने कक्ष में कूलर लगा देख सवाल किया क्या बाकी डिब्बों में यही व्यवस्था है और नहीं है सुन कर कूलर को हटवा दिया था। जब प्रधान मंत्री बने तो इक दिन पत्नी ने बच्चों को स्कूल भेजने को सरकारी कार उपयोग करने की बात कही , लालबाहदुर जी ने कहा फिर आपको उसका खर्चा मेरे वेतन से लौटना होगा क्योंकि सरकारी गाड़ी निजि उपयोग को नहीं है। आज आपके कितने आयोजन देश के खज़ाने से पैसा खर्च कर होते हैं अपने कितने धार्मिक अनुष्ठान किये करोड़ों का खर्च किया आपकी आय से मुमकिन ही नहीं है बल्कि अपने अपने खुद के विज्ञापन पर कितना धन बर्बाद किया है।

     चलो गांधी लालबाहुदर से आपका कोई मेल नहीं मुमकिन आपको उनकी सोच विचारधारा नहीं मालूम मगर जेपी को तो जानते हैं वही लोकनायक जयप्रकाशनारायण जी जिन्होंने इंदिरा शासन में सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की बात की थी। कभी कोई पद नहीं लिया था और आपात्काल के बाद सभी दलों को संगठित कर तानाशाही का अंत किया था। 9 दिन बाद 11 ऑक्टूबर को उनका जन्म दिवस आपको याद नहीं रहेगा हर साल की तरह। जिनकी बदौलत आज आप लोग सत्ता में हैं उनकी ही पीठ में छुरा घौंपने वाले कौन थे जिन्होंने सत्ता और कुर्सी के मोह में देश की जनता के विश्वास से धोखा किया था। वास्तविक देश और जनता के नायक ऐसे होते हैं जो देश समाज की खातिर जीवन भर जतन करते हैं कर्तव्य समझ कर। उन्होंने कभी आपकी तरह कोई दावा नहीं किया महान देशभक्त होने का न ही अपने विरोधी को देशभक्त नहीं होने का आरोप लगाने का देश को विभाजित करने का काम किया कभी उन्होंने। हम सभी को आदर देने को हमारी विचारधारा हमारे तौर तरीके शैली को अपनाना चाहिए न कि हमारे बुत बनाने समाधि पर फूल चढ़ाने का आडंबर करते रहना चाहिए।

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