Friday, 9 November 2018

कारोबारी बाबाओं के भरोसे देश ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

   कारोबारी बाबाओं के भरोसे देश ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया 

  सवाल गंदुम जवाब अदरक हमारे बज़ुर्ग मिसाल दिया करते थे। ये होना ही था जाने क्यों किसी को पहले विचार नहीं आया। सीबीआई की समस्याओं को आर्ट ऑफ़ लिविंग वाले रविशंकर जी तीन दिवस के शिवर में हल करेंगे। शायद इसके बाद आरबीआई में आयोजन करवाना पड़ सकता है आईबी की बारी आ जाए तो भी हैरान मत होना। आपको क्यों याद होगा ये वही रविशंकर जी हैं जिन पर यमुना तट पर तमाम नियम कानून तोड़ने पर जुर्माना लगाया गया था जिस आयोजन में देश का चौकीदार भी शामिल हुआ था। तब से यमुना में कितना पानी बह गया और गंदगी भी बढ़ गई होगी स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद। विज्ञान के युग में हम अभी भी सदियों पुराने तौर तरीकों से देश को जाने किधर को धकेल रहे हैं। इक कहानी याद आ रही है मगर अभी ठीक से याद करने के बाद आगे विस्तार से लिखूंगा। उस में शासक राजा और अधिकारी इक मदहोशी का शिकार होकर बहुत अजीब बातें निर्णय और कार्य करते हैं मगर कोई होता है जो इस सब के बाद भी कोई अनहोनी नहीं होने देता है। अफ़सोस इस बात का है कि उस जैसा कोई किरदार अब संभव नहीं है और अगर हो भी तो हाशिये पर धकेला जा चुका होगा। सच्चाई ईमानदारी और देश के लिए निष्ठा ऐसे गुण हैं जो कोई माने चाहे नहीं माने विलुप्त हो चुके हैं या इनको अवगुण मान लिया गया है। 

     ( बाकी बात कल आगे लिखी जाएगी उस कहानी को याद करने के बाद )


No comments: