Thursday, 14 September 2017

उपदेश उल्टी गंगा बहाने के ( सच्ची बात ) डॉ लोक सेतिया

    उपदेश उल्टी गंगा बहाने के ( सच्ची बात ) डॉ लोक सेतिया 

               सभी मुझे समझाते हैं , रोज़ यही सबक पढ़ाते हैं , मुझे याद रहता नहीं वो फिर फिर दोहराते हैं। तुम नकारात्मक सोचते हो सकारात्मक सोचा करो , मन को शांत कर लो। तुम नाहक परेशान होते हो कुछ भी गलत होता देख कर , और भी तो लोग हैं कोई चिंता नहीं करता है। जो होता है देश में होने दो , पहरेदारों को सोने दो। हर बात को देखने के दो नज़रिये होते हैं , गलास कितना खाली है मत देखो , कहो अभी भी कुछ बचा हुआ है ध्यान से देखो। अन्याय होने की बात क्यों करते हो , कभी कभी ऐसा भी होता है किसी आम आदमी को न्याय मिल गया और ख़ास को सज़ा हो गई। उसकी चर्चा करो , बात उसी की करते हैं जो हैरान करती है , जो हर दिन हर जगह होता उसकी बात करना बेकार है। आपके घर में नकारात्मकता बहुत है , आपको बुरा लगता है अनुचित बात का , अपने आप पर संयम रखो। गुस्सा आपकी सेहत को खराब करेगा , शांत हो जाओ , अपने मन को समझा लो यही आज का चलन है इसको स्वीकार करना होगा। बुराई को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , कौन लड़ेगा उस से। हम लोग मच्छर से लड़ते हैं उसको खत्म करना चाहते हैं , सांप से घबराते हैं , अजगर से डर जाते है और शेर के सामने सांस रोक मुर्दा बन जाते हैं। शायद मरा हुआ जानकर उसे रहम आ जाये अन्यथा समर्पण ही करना है , हम लड़कर नहीं मरना चाहते बिना लड़े जान देने को राज़ी हैं। देखो आपके घर में जितनी धूल है उसको गलीचे के नीचे छिपा रहने दो , कालीन को साफ रखना है , मन की मैल को साफ नहीं करना केवल बदन को साफ करना है और चेहरे को सुंदर बनाना है , शानदार कपड़े पहनने हैं। लोग बहुत उपाय करते हैं नकारात्मकता का अंत करने को और सकारात्मकता का दुशाला ओढ़ने को। समझदार लोग बीच का रास्ता बना लेते हैं , औरों की खराब बातों का शोर मचाते हैं और अपनी सब खराब बातों पर मानते हैं कि ये करना ज़रूरत है मज़बूरी है , नकरात्मक और सकारात्मक के बीच अचारात्मक नाम की नई जगह बना लेते सुविधा से। बाहर गर्म हवाएं चलती रहें आपको उनकी बात नहीं करनी है , आपको अपने लिए ढंडक का उपाय कर आराम से सोना है। 
                                    गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को लड़ने का उपदेश दिया था , आजकल गीता का उपदेश देने वाले अन्याय से युद्ध करने को नहीं कहते हैं। गीता पढ़ने से शांति मिलेगी मगर समझने की कोशिश की तो अशांत हो जाओगे , समझना नहीं है केवल रटना है। आज इक संदेश मिला मुझे बेटी ने भेजा व्हाट्सएप्प पर। अंग्रेज़ी में है , हिंदी में अनुवाद इस तरह है। सत्य युग में युद्ध दो अलग अलग लोक में रहने वालों में हुआ , देवता और दानव। त्रेता युग में दो देशों में शासकों में हुआ , राम और रावण। द्वापर में युद्ध एक परिवार में हुआ , कौरव और पांडव। ऐसे पाप दो अलग लोकों से , दो देशों में , फिर इक परिवार में भाईयों में पाप और पास आता गया।  अब कलयुग में पाप हमारे अंदर ही है और हमें उस से लड़ना है ताकि खत्म कर अपने भीतर के मानव को ज़िंदा रख सकें। मगर ध्यान दें अब बुराई के विरोध में कोई भाई अच्छाई की तरफ नहीं जाता , विभीषण का नाम बदनाम है , घर का भेदी लंका ढाये। अब आपके घर में कोई पापी है तो उसको बचाएं अपने मन के पाप को तो उचित ठहराएं। धर्म क्या अधर्म क्या भूल जाएं , बस मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरूद्वारे जाकर सीस झुकाएं , चढ़ावा चढ़ाएं और प्रसाद ले आएं। झूठ बोलते बिल्कुल भी नहीं शर्माएं , पाप करते कभी नहीं घबराएं। आरती गायें दीप जलाएं। नमाज़ अदा करें चादर चढ़ाएं। रविवार को मोमबत्ती जलाकर उजाले की बात करें , बाहर कितना अंधेरा है आप भूल जाएं। हर किसी को ससरिकाल बुलाकर सच कहने की बात वहीं छोड़ जाएं , झूठ से अपना काम जितना चल सकता है चलाएं। 
                     मगर मुझ से हुआ नहीं , कभी होगा भी नहीं , कि सब नकारात्मक बातों को अनदेखा करूं और सोचने लगूं कि शायद इसी में ही भलाई है। इस से भी बुरा हो सकता था। जी यही बात किसी पुलिस वाले ने मुझे समझाई थी , आप शरीफ आदमी किसी गुंडे से अपराधी से कैसे लड़ोगे। आज बुरा भला कहा उसने तो शुक्र मनाओ उसने मार पीट नहीं की। किसी गरीब की बेटी को कोई उठाकर ले गया और कदाचार कर वापस छोड़ गया तब भी पुलिस अधिकारी यही समझा उसकी शिकायत निपटा गए कि जान से तो नहीं मारा उस ने आपकी बेटी को। इसको सकारात्मकता कहते हैं , जान है तो जहान है। किसी जगह लिखा हुआ था दुनिया क्या है , बस इक कब्रिस्तान है। बात गंगा से शुरू करनी थी , गंगा कितनी मैली है की बात को छोड़ो अब गंगा की सफाई की बात करो बेशक इस बीच गंगा की गंदगी और बढ़ती गई हो। गंगा को गंदा करो और उसकी सफाई की बातें भी करो , यही सकरात्मकता है।

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