Saturday, 1 July 2017

कलमकार की चाहत ( कविता ) डॉ लोक सेतिया

       कलमकार की चाहत (  कविता ) डॉ लोक सेतिया  

आपको किसी कवि से शायर से ,
किसी कथाकार से ग़ज़लकार से ,
हो गई है अगर मुहब्बत सच्ची ,
दर्द उसके अपने समझना ख़ुशी। 
शायद नहीं देगा वो महंगा उपहार ,
बस इक फूल देकर करेगा इज़हार ,
पर महक रहेगी उस फूल की सदा ,
आपको दिल की जगह लेगा बसा। 
उसकी कहानी शुरू तुमसे होगी ,
ग़ज़ल तुम्हीं पर कविता तुम होगी ,
हर लफ्ज़ में तुम्हारा नाम होगा ,
आशिक़ तेरा है क्यों बदनाम होगा। 
ज़माना कभी नहीं जान पाएगा राज़ ,
लिखी उसने ज़माने की बता के बात ,
नहीं आपको मौत भी खत्म कर सकती ,
हर रचना में ज़िंदा रहेगी दोनों हस्ती। 
कभी मगर नहीं इक बात करना आप ,
उसकी रचनाओं को सौतन न समझना ,
बड़ी खूबसूरत जगह है प्यार वाली ,
रहती वहीं आप ख़ुशी खशी ही रहना।


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