Tuesday, 21 February 2017

तस्वीर भारत की सच इंडिया का - डॉ लोक सेतिया

हम बुद्ध को गांधी को मानते हैं , ऐसा कहते हैं। हम धार्मिक होने का भी दम भरते हैं। हम शांति के पुजारी हैं वासुदेव कुटुम्भ को आदर्श मानते हैं। मगर अंतरराष्ट्रीय विश्व संगठन के वास्तविक आंकड़े हमारा सच बताते हैं। संसार में सब से अधिक उन्नीस करोड़ लोग जो रात को भूखे सोते हैं वो इसी भारत महान के बदनसीब हैं , जिस के राजनेता रोज़ करोड़ों रूपये के फूलों से सजे मंच से गरीबों की बात करते हैं। शायद इस से विचित्र सिथ्ति कुछ नहीं हो सकती , जनता का धन पानी  की तरह बहाकर आप दावा करें गरीब की भलाई या उसके दुःख दर्द समझने का। इसी के साथ एक तथ्य और भी है कि भारत विश्व में हथियार खरीदने वाला सब से बड़ा खरीदार है और अमेरिका हथियार बेचने और बनाने वाला सब से बड़ा सौदागर। अमेरिका किसी का दोस्त नहीं ये कोई राज़ की बात नहीं है , उसकी दोस्ती सिर्फ और सिर्फ अपने मतलब को और फायदा उठाने की है। मगर बात इतनी होती तो भी ठीक था , बात उनकी भी है जो धर्म जनकल्याण और दान पुण्य की बात करते हैं। इन जगहों पर धन दौलत के अंबार जमा हैं , सोने चांदी से सजाया गया है , उपदेश दिये जाते हैं सच्चा धर्म दीन दुखियों  की सेवा है। रोज़ इनकी सजावट भी फूलों से होती है , खूब भीड़ जमा होती है और आडंबर किया जाता है भगवान की पूजा अर्चना इबादत सतसंग जाने क्या क्या। और सब से अधिक भिखारी इन्हीं के दरवाज़े के बाहर हाथ पसारे दिखाई देते हैं , भीतर लाखों करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाने वाले इन को चंद सिक्के भी खैरात में डालते है तो हिकारत से देख कर। सारा सुना उपदेश बाहर निकलते जाने कहां चला जाता है।
        इधर चुनाव में गदहों ( गधे ) की बड़ी चर्चा हुई , टीवी वाले बता रहे कि गुजरात में उनसे कितनों की भलाई हुई है।  मगर मुझे कुछ और बताना है , जो शायद आपको ध्यान नहीं हो या पता ही नहीं हो। जिस संसद ने आज तक आम इंसानों की खातिर कोई नियम कायदा नहीं बनाया कि देश के हर नागरिक को क्या क्या मिलना ही चाहिए , उसी संसद ने वाजपेयी जी के काल में कानून बनाया था जो आपको यकीन हो या नहीं भी हो आज भी लागू है। और शायद किसी गधे ने किसी थाने में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं करवाई है कि उसको न्याय मिलना चाहिए। कानून है कि जो भी कुभ्हार या धोबी या कोई भी गधे का मालिक है , वह गधे से दिन में आठ घंटे से अधिक काम नहीं ले सकता , उसको इस तरह जंजीर से नहीं बांध सकता कि वो चल नहीं सके। उसको नियमानुसार खिलाना भी मालिक का कानूनी फ़र्ज़ तो है सप्ताह में एक दिन विश्राम भी देना होगा। आपने सुना कभी ऐसा कोई कानून गरीबों के लिए बनाया सरकार ने। उस में लेबर इंस्पेक्टर की तरह इक अधिकारी भी नियुक्त करने की बात है , ज़रूर देश के हर दफ्तर में कोई गधा कल्याण अधिकारी होगा जो अपना काम फायलों पर नियमित करता भी होगा। अगर आप भी गदहा प्रेमी हैं तो ये आपके मतलब की सूचना है , चाहें तो सूचना के अधिकार का उपयोग कर सरकार से सवाल पूछ सकते। कितना बजट इसका बना और कैसे खर्च किया गया।  कोई घोटाला नहीं है।

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