Wednesday, 30 December 2020

संकल्प नये वर्ष का ( कुछ नया ) डॉ लोक सेतिया

 संकल्प नये वर्ष का ( कुछ नया ) डॉ लोक सेतिया 

कितने साल से इक नई डायरी पर इस तरह संकल्प लिखता रहा हूं। लोग जैसे आमदनी खर्च का हिसाब रखते हैं बही खाते में मैंने उसी तर्ज़ पर हिसाब लगाया पिछले साल क्या खोया क्या पाया धन दौलत का कभी नहीं खाता बनाया दोस्ती और दोस्तों का सब अच्छा अनुभव लिखा याद रखने को और कड़वे अनुभव को दिलो-दिमाग़ से मिटाया भुलाया। बिछुड़े दोस्तों को पास बुलाया शिकवे गिले छोड़ गले से लगाया। मुकदर को हमने नहीं आज़माया तकदीर से धोखा किस ने नहीं खाया। फिर इस बार कुछ नया है दिल में आया कोई राज़ नहीं है कुछ भी नहीं छुपाया। सुने कोई समझे यही ख़्याल लेकर भरी महफ़िल में सभी को सुनाया। सबके दिलों पर दस्तक देने को मैं फिर एक बार खुद पास आपके आया। 
 
बीत गया जो उसका हिसाब देखा है मिला प्यार जितना दिया मैंने क्या उतना अभी रह गया चुकाना क्या बकाया। मनाने कोई आये चाहे नहीं आये मैंने पुरानी उन बातों को भुलाया बड़ा ही कठिन था रूठने वालों को मनाना बस कहा यार छोड़ो इस ढंग से मनाया। भला दुनिया में है कौन क्यों पराया हमने गैर को अपना हमेशा बनाया। बड़े ही प्यारे थे कुछ दोस्त जिनको खोया उनका दुनिया से चले जाना कोई बस नहीं अपना यादों में बसाया। 
 
संकल्प यही है बनाना है कोई जहां जिस में न पड़े दोस्ती पर कोई काला साया। मुहब्बत सभी से यही है ईबादत सियासत को छोड़ो जिसने सबको भटकाया। धर्म अपना बस इंसानियत है हर धर्म ने सबक जिसका पढ़ाया जो नफ़रत की बात करते हैं उनको समझ प्यार वाला कभी भी नहीं आया। बड़ा कौन है छोटा कोई नहीं है सभी को बराबर समझना पाठ पढ़ा पढ़ाया। 
 
ये सियासत वाले ये दौलत वाले ये झूठ का कारोबार करने वाले बड़े मक्क़ार हैं दिल के काले चेहरे उजाले। बिछाया फिर उन्होंने जाल अपना बिछाया मगर हमको बंद पिंजरे में रहना नहीं है हम आज़ाद पंछी सोने का पिंजरा नहीं भाया। कभी हमने खुदा इंसान को बनाया नहीं है सर अपना सत्ता की चौखट पर झुकाया नहीं है। दरबारी राग हमने तो गाया नहीं है झूठ को सच माना नहीं हमने सच से दामन बचाया नहीं है। जब तक जीना है शान से जीना मिलकर है अम्नो अमान से जीना हमारे देश की ख़ातिर जान हाज़िर है मरना यहीं और इसी हिन्दुस्तान में जीना।    

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