Wednesday, 22 July 2020

सब जानता सब कर सकता है ( अजब ग़ज़ब ) डॉ लोक सेतिया

  सब जानता सब कर सकता है ( अजब ग़ज़ब ) डॉ लोक सेतिया 

ये अपने आप पर यकीं हो न हो दुनिया भर को भरोसा करवाना जानता है कि ये कोई जादूगर है जो कुछ भी कर सकता है। बस खुद को भगवान नहीं बताता वर्ना भगवान मैं हूं कह देता तो लोग यकीन करते मान भी लेते। और उसने जब जब जो भी सोचा कर दिया नतीजा चाहे कुछ भी उसको करना था और उसने ये कब कहा था सब ठीक कर सकता है सब सही में जानता समझता है। उसने सब किया भले कुछ भी ठीक नहीं किया बस खराब ही किया परीक्षा में उसने सभी सवालों के जवाब लिखे क्या हुआ जो सही नहीं लिखे बल्कि खराब लिख दिए। अध्यापक उसको शून्य से कम नंबर कैसे दे सकता था। जादूगर ने शून्य के आगे एक और पीछे इक और शून्य बनाकर सौ बना दिया। कोई माने नहीं माने उसके नंबर सौ में से सौ हैं उसकी कही हर बात सच है। आपको कल्पना करना आता है तो आप बदहाली में ख्वाब बुन सकते हैं जन्नत में रहते हैं। उसने सभी को जन्नत का ख्वाब दिखलाया था मगर ये नहीं बतलाया था कि जन्नत मरने के बाद मिलती है और मरने के बाद कौन आकर बताएगा उसको क्या मिला है। 

आपने फिल्मों में बंदूक पिस्तौल आधुनिक गन सभी से गुंडों और पुलिस वालों को लड़ते देखा है कितने मर जाते हैं घायल हो जाते हैं लेकिन वास्तव में वही अभिनेता फिर किरदार बदल अभिनय करते हैं कोई सच में नहीं मरता है। मगर हम देखने वाले यही समझते हैं ख़लनायक का अंत हो गया , रावण हर बार जलता है अगली बार उसका कद और ऊंचा होता जाता है। किसी से हमने सुरक्षा की खातिर हथियार युक्त विमान खरीदा मगर उसको अपना राज़ बता बैठे कि इसको हमने डराने को दिखाने को खरीदा हैं हम लड़ाई नहीं करना चाहते शांति के पुजारी हैं। हमने लड़ाई नहीं लड़ाई का अभ्यास दिखावा करने का तमाशा टीवी सोशल मीडिया पर देखा दिखाया वास्तव में उसको उपयोग करना ही नहीं है ये तय है कि हमने अरबों रूपये खर्च कर परमाणु बंब दिखाने को रखे हैं उनका इस्तेमाल करना मानवता का विनाश करना होगा जानते हैं। तब ये सभी समझदार देश विनाश का सामान बनाते क्यों हैं। क्योंकि उनका कारोबार है इनको बेचना खरीदना उनको चलाना नहीं। जैसे आपको कोई खिलौने के फल या कोई खाने पीने की वस्तु देता है उस से आप खुश हो सकते हैं अपना पेट नहीं भर सकते हैं। 

आपको याद है कभी किसी नेता पर इक तोप में दलाली खाने का इल्ज़ाम लगा था और उसको सत्ता से बाहर कर दिया था मगर जिस दुश्मन को गले से लगाया था वो चुपके से हमारे घर में घुस आया था। तब उसी तोप ने अपना कमाल दिखाया था सबकी ज़ुबान पर ताला लगाया था। चोरी साबित नहीं हुई चोर कहलाया था और चोर चोर कहने वालों को खूब मज़ा आया था। चोर कौन था और कौन था जिसने चोर का शोर मचाया है। उसी जैसा कोई फिर से आया था अपनी झोली में सब है सबको नाच नचाया था। आया रे आया रे खिलोने
वाला खेल खिलौने ले के आया रे ,आओ मेरी आंख के तारो कहां गए ओ मेरे प्यारो। देखो मैंने गुड्डे की शादी है रचाई मेरी प्यारी गुड़िया की बारात है आई। संजीव कुमार फिल्म में बच्चों का दिल बहला रहे थे कोई दुनिया भर को उल्लू बनाने को खेल खिलौने से खुश करना चाहता है। सम्मोहन करना जानते हैं कुछ लोग और कोई उनकी आंखों में आंखें डालकर सम्मोहित हो कर जो वो बोलता है उसी को दोहराता है। मगर इक बात ध्यान रखनी ज़रूरी है आप कुछ लोगों को कुछ समय तक मूर्ख बना सकते हैं लेकिन सभी को हमेशा को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है। जादूगर ओ जादूगर तू है बड़ा बाज़ीगर।


1 comment:

Sanjaytanha said...

सही बात कुछ लोगों को कुछ समय तक मूर्ख बनाया जा सकता है हमेशा के लिए नहीं👌👍