Wednesday, 25 March 2020

कथाओं का आधुनिक स्वरूप ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया

  कथाओं का आधुनिक स्वरूप ( हास-परिहास ) डॉ लोक सेतिया 

हर सुबह आठ बजते टीवी चैनल पर कोई भविष्य बांचने आता है। हर दिन दावा करता है हम आपके साथ हैं उपाय बताते हैं आपका कुछ भी बुरा नहीं होने देंगे। फिर राशिफल बताते है किस का दिन सप्ताह महीना साल कैसा होने वाला है। आखिर में किसी राशि का जैकपॉट खोलने का दावा करते हैं और तमाम लोग उनकी बात पर भरोसा करते हैं ये उनको चिट्ठियां मिलती रहती हैं। इसके बावजूद कोई भी नज़र नहीं आता जिसको कोई समस्या नहीं हो या उनकी सलाह से सब वास्तव में अच्छा हो गया हो। इक और हैं जो जाने क्या सोचकर जब भी कुछ कहना हो शाम को आठ बजे का समय चुनते हैं कोई राज़ छिपा हो सकता है। कई लोग घबराते हैं अबकी बार जाने क्या दूर की कौड़ी लाये हैं।

कड़ियां जोड़ना दर्शकों का काम है उनका काम ठीक समय पर हर बार नये विषय किरदार की बात निदेशक बन कर समझाना है। ये लगता है देश की सरकार और राज्यों की सरकारें सागर मंथन कर अमृत कलश की खोज करना चाहते हैं। पौराणिक कथा में पहाड़ की शिला को मथनी बनाकर देवताओं दानवों ने रस्साकशी की थी अब देश की जनता को मथनी बनाने को जकड़ा गया है और लोग खुश हैं कि उनकी सुरक्षा और भलाई को जो भी संभव है किया जा रहा है। कहने को सबको घर की लक्ष्मण रेखा में रहना है सीता माता की तरह बाहर निकलने की गलती की तो रावण जैसा कोई दैत्य गंभीर रोग का भेस धारण कर प्राण को हर ले जाएगा। जैसे कभी महिलाओं को घर की चौखट नहीं लंगने की बात समझाई जाती थी यहां तुम सुरक्षित हो। ये प्यार की रिश्तों की जंजीर पहन कर महिलाएं अपना शृंगार समझती थी। शायद सबको यकीन है इस बार बच गए तो अमर हो जाएंगे और वो सब पुरानी बातें झूठी साबित हो जाएंगी कि जब जैसे जिसकी मौत आनी है टाली नहीं जा सकती और यमराज आपको हज़ार तालों में बंद होने पर भी खोज ही लेगा।

अभी तक कोई डॉक्टर आदमी में आत्मा को तलाश नहीं कर सका है अन्यथा अगर कोई आधुनिक उपकरण ये दिखलाता कि किस किस की अंतरात्मा मर चुकी है और वो ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी से अनजान हैं। अपनी अपनी लाश का बोझ उठाए मौत का इंतज़ार करते हैं। गीता में क्या लिखा हुआ है अब किसी को याद नहीं अर्जुन को उपदेश देते हैं कृष्ण हथियार उठाओ जिनको मारने से तुम डरते हो उनको काल के मुंह में जाना ही है तुम सिर्फ माध्यम बनते हो और शरीर मरता है आत्मा जन्म लेती है जैसी जाने कितनी बातें आखिर कायरता और मोह छोड़ युद्ध करने को तैयार कर लेती हैं। अच्छे वक्ता अपनी वाणी और चतुराई से हर किसी को मोहित कर सकते हैं तभी कौरव पांडव दोनों पक्ष कृष्ण को अपना मानते हैं। कृष्ण वो शासक है जो खुद पांडवों की तरफ है और अपनी सेना कौरवों को देते हैं , इक कवि की कविता में राधा सवाल करती है कान्हा तुम अपनी सेना जो आपकी जनता थी जिसकी सुरक्षा करना आपका फ़र्ज़ था उसको अर्जुन के तीरों से कैसे मरने देते रहे। शासक बनकर लोग कितने भी समझदार हों निष्ठुर बन जाते हैं।

सागर मंथन से अमृत ही निकलेगा या विष भी निकल सकता है। और अगर विष मिलेगा तो कौन है जो शिव बनकर हालाहल पी नीलकंठ बन सकता है। सत्ता का अमृत कलश सभी की चाहत है मगर अब कोई सच झूठ को परखने की चर्चा करता है तो सभी उसको जाने क्या क्या कहने लगते हैं। विदुर जैसा महात्मा इस कलयुग में कोई नहीं है। सच तो ये है कि आजकल जितने भी नायकत्व के किरदार वाले हैं सब नकली हैं असली रामायण गीता के किरदार कहीं नहीं हैं।

यमराज अपने बॉस भगवान के पास आये हैं सूचित किया है भारत सहित कई देश लॉकडाउन की घोषणा कर रहे हैं। भगवान नहीं समझे यमराज को इन बातों से क्या मतलब है। यमराज ने कहा क्यों नहीं आप मुझे भी भारत की सरकार की तरह तीन सप्ताह घर पर बैठने की अनुमति दे दें। मेरा भैंसा भी कभी तो आराम करने का हकदार है। भगवान ने कहा भला जन्म मृत्यु पर भी कोई बंदिश लगती है कभी। दुनिया में जीवन मृत्यु को कभी विराम नहीं मिल सकता है। आप तो जाते रहते हैं भारत की सरकार ने सबको घरों में रहने को आदेश दे तो दिया है मगर क्या हर नागरिक को घर मिला हुआ भी है। लोग बाहर नहीं निकलेंगे तो क्या इतने दिन कोई भी मरेगा नहीं ये नहीं जानते जन्म मरण उनकी मर्ज़ी से नहीं हो सकता है। मौत को जिसे जैसे अपनी आगोश में भरना है घर बैठे भी मुमकिन है ऊंचे महल की दीवारें भी किसी को मरने से बचा नहीं सकती हैं। आपको कोई टारगेट नहीं दिया जाता विधाता को केवल संतुलन कायम रखना होता है , जन्म लेते रहे और मौत नहीं होगी तो दुनिया की मुश्किल और बढ़ जाएगी। यमराज बोले अभी मैं इक सज्जन पुरुष को लाने गया था मुझे देख कर बोलने लगा कि जब तक लॉक डाउन है मुझे रहने दो अन्यथा मेरी अर्थी को उठाने कांधा देने कौन आएगा। किसी ईश्वरभक्त की ये दशा हो ये तो मुझे उचित नहीं लगा और मैंने उसे कुछ दिन की मोहलत अपने विशेषाधिकार उपयोग कर दे दी है।

भगवान ने अपने चक्षु बंद किये विचारमग्न होकर समस्या को समझा , फिर बोले ये बताओ अगर भारत में किसी वीवीआईपी का अंत आने वाला हो क्या तब भी ये सब नियम लागू रहेंगे। यमराज बोले भला ये भी कोई पूछने वाली बात है इस देश में खास लोगों की खातिर सब बदल जाता है। अभी देखा अमेरिका के सरकार आये तो मीलों लंबी दीवार बनाई गई गरीब बेघर बस्ती वालों को छुपाने को। ऐसे लाखों करोड़ बर्बाद करते हैं आडंबर और तमाशाओं पर उतने से कितने बेघर को घर भूखों को रोटी और रोगिओं को अस्पताल मिल सकते थे। सच तो ये है कि आज तक किसी रोग महामारी क्या दुर्घटना हादिसे से इतने लोग नहीं असमय मरे हैं जितने इन राजनेताओं और बड़े बड़े अतिविशिष्ट लोगों के सही आचरण नहीं करने और लापरवाही और मनमानी तथा अमानवीय कर्मों से मरते हैं जिनका दोष कभी कुदरत कभी भाग्य कभी विधाता को देने की बात की जाती है। भगवान ने चित्रगुप्त से जन्म मृत्यु का आंकड़ा पूछा तो उन्होंने बताया कि जैसा हमेशा से था उसी तरह सब सामान्य है अब मौत के कारण समय समय पर इंसानी फितरत को देख बदलते रहते हैं। समस्या विकट है जिनकी बारी है उनको मरना मंज़ूर नहीं मगर जिनको अभी जीना है वो खुद अपनी जान देने को व्याकुल हैं ऐसे में सरकार को कुछ नहीं सूझता क्या समस्या है और उपाय क्या है। सरकारों को जब जो करना होता है करती नहीं बाद में पछताती हैं मगर यमराज बोले हमको जो करना है किसी सरकारी आदेश से क्या रोक सकते हैं।

   कोई दार्शनिक चिंतित है कि जैसे पंछी जानवर पिंजरे में रहने के आदी हो जाते हैं तो उनको खुली हवा में आज़ाद होना घबराहट पैदा करता है। कहीं घर में बंद रहने की आदत बन गई तो हर शहर गांव गांव इक ख़ामोशी नहीं छाई रहने लग जाए। 

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