Tuesday, 6 August 2019

कलयुग का राम-राज्य और रामायण ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया ( भाग दूसरा )

  कलयुग का राम-राज्य और रामायण ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

                                         ( भाग दूसरा ) 

   हम जो पढ़ते हैं समझते हैं और जो अर्थ बताया जाता है दिखाया जाता है समझ आने में समझते समझते पता नहीं चलता कि सच है क्या। 6 अगस्त को अदालत ने अयोध्या मामले की सुनवाईफिर से हर दिन शुरू की और लव-कुश टीवी पर सीरियल का अगला भाग दिखाया गया। राम को मानते हैं तो मर्यादा की बात होनी ज़रूरी है और मर्यादा का अर्थ जो जैसा होना चाहिए वैसा किया जाना चाहिए। गांधी राम बुद्ध क्या हिंसा और देश के कानून संविधान को दरकिनार कर कुछ करने पर खुश होते और भगवान राम जी क्या किसी मंदिर में रहते हैं या कण कण में बसते हैं दिलों में राम समाये हैं। विवाद और आपसी झगड़े से बने भवन में क्या राम का निवास हो सकता है। अदालत अभी भी विवादित ढांचा गिराने वालों की अपराधी दोषी मानती है और जो कहते थे हमने अच्छा किया बचते फिरते हैं अदालत में जाकर अपना सच कहने से और सज़ा के डर से साबित करना चाहते हैं हमने नहीं किया था। कश्मीर भारत का था सब जानते थे मानते थे विशेष दर्जा हटाना हर कोई चाहता था मगर जिस तरह छीन कर ज़ोर से ताकत से छल कपट की तरह किया गया बांटने और विभाजित करने का काम उसको बेबस बनाने और अपने अधीन करने को राज्य से राज्य का दर्जा भी छीन लेने का काम इस तरह से कश्मीर के लोगों को बिना भरोसे में लिए किसको अपना बना रहे हैं। अपनापन प्यार सहमति से मिलता है ज़बरदस्ती से अपने पराये हो जाते हैं। आम ख़ास की बात है तो पहले वीआईपी और आम लोग का खात्मा हो हम सब एक सामान देश के नागरिक हैं संविधान कहता है। लिखा है कहीं संविधान में जनता के निर्वाचित सेवक विशेषाधिकार छीनेंगे और शासक बनकर गरीब जनता से उपहास करेंगे। साहस करते अपना विशेष दर्जा मिटाने छोड़ने का सब ताम झाम हटाकर सामान्य नगरिक की तरह रहने का। लव-कुश में सीता जी के बन जाने के बाद राजा राम घोषणा करते हैं अब से वह भी जनता की सेवा करेंगे मगर राजा की तरह नहीं रहेंगे विलासिता पूर्ण जीवन त्याग कर जैसे बन में पत्नी सीता रहेगी उसी तरह रहेंगे।

क्या सत्ताधारी और विरोधी दल देश भर में असमानता को मिटाना चाहते हैं तो फिर किसी एक जगह नहीं हर राज्य में ऐसा होना चाहिए। मगर हम हरियाणवी हैं पंजाबी गुजराती राजस्थानी बिहारी यूपी वाले हिमाचली जाने क्या क्या हैं बंगाली हैं तमिल हैं और उस से आगे धर्म सम्प्रदाय के नाम पर बंटे हैं राजनेता विभाजित कर सत्ता हासिल करने को क्या नहीं करते। रोज़ कौन ऐसी सभाएं आयोजित करते हैं। देश में हरियाणा पंजाब में एक ही दल की सरकार रही तब भी भाई भाई को पानी नहीं देने की बात करता रहा पानी सरहद पार चला जाये पड़ोसी राज्य को हक नहीं देने की ज़िद है क्योंकि जनता को भड़काने की राजनीति से उनके स्वार्थ सिद्ध होते हैं मिल कर प्यार भाईचारा करने से उनकी गंदी राजनीति काम नहीं करती है। अशोक कलिंग राज्य को पाना चाहता था और घोर मानववादी था हज़ार लोगों को खिलाकर खुद खाना खाता था। कलिंग वासी समृद्ध और साहसी थे और अपनी आज़ादी कायम रखना चाहते मगर अपने पहले ही युद्ध में विजयी होकर भी खून खराबा देख उस ने फिर कभी युद्ध नहीं लड़ने का संकल्प लिया और बौद्ध धर्म अपना लिया जो आज विश्व का सबसे अधिक देशों का धर्म बन गया है। इस वीडियो को सुनते हैं।


क्या कोई अशोक को महान मानने से इनकार कर सकता है। भारत के तिरंगे पर अशोकचक्र है और भारत देश की अंकित छवि जिस पर तीन तरफ शेर का मुख है उसके नीचे भी अशोकचक्र बना हुआ है। क्या इन सबका कोई मतलब नहीं है। हम भरवासी दिल जीतने पर विश्वास करते हैं जंग जीतने के पक्ष में नहीं है और जो लोग आज किसी नेहरू की पंचशील की भावना को नहीं जानते गांधी की अहिंसा को नहीं मानते उनको गोडसे जैसे कातिल नायक लगते हैं। मगर उनकी विचारधारा देश के संविधान की भावना के विपरीत है। ऐसे लोग अदालत क़ानून का पालन नहीं करते संविधान का पालन नहीं करते मगर सत्यमेव जयते की सोच के देश में सच कहने को अपराध समझते हैं और खुद सब अनुचित करने को भी देशभक्ति बताते हैं। बहुमत या भीड़ बनकर हिंसक होकर ताकत से अपनी मर्ज़ी का इंसाफ करना अराजकता है ये जिसको धर्म या कोई भी और नाम देते हैं। मुमकिन है कल अदालत उनकी पसंद का निर्णय नहीं दे तो अदालत कानून का आदर और उनकी अकांक्षा उनके विवेक को चीन सकती है और मर्यादा पुरुषोत्तम राम का मंदिर मर्यादा की परवाह नहीं कर बनाने की ज़िद की जा सकती है। इस का अर्थ ये है इनकी मनमानी नहीं चले तो धर्म के नियम देश के कानून सब को नुकसान देकर भी मनमानी की जा सकती है। धर्म ईश्वर इनकी आस्था नहीं राजनीति करने का साधन हैं। आजकल लोग भगवान को मानते हैं का दावा करते हैं भगवान की शिक्षा को नहीं मानते हैं भगवान को बेबस कर दिया है कुछ लोगों ने जिनको ईश्वर और धर्म की जानकारी इतिहास की जानकारी उतनी ही है जितनी नासमझ अनपढ़ लोगों का सोशल मीडिया से मिला ज्ञान। कुवें के मेंढक को अपनी दुनिया समंदर लगती है।

                                       (  हरि अनंत हरिकथा अनंता )



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