Wednesday, 18 April 2018

क्या हुआ क्यों हुआ को छोड़ो - ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया

     क्या हुआ क्यों हुआ को छोड़ो - ( आलेख ) डॉ लोक सेतिया 

        जो लोग हमेशा अनुचित कार्यों को अनदेखा करते रहे , शायद अब उनको समझ आये कि बुराई को शुरुआत में ही मिटाया जाना चाहिए। निप दि ईविल इन दि बड। बात महिलाओं के साथ अपराध तक सिमित नहीं है। समाज के हर भाग में अनुचित ढंग से काम करने पर विरोध नहीं जताना , उसको अनदेखा करते जाना , और आखिर में समाज का उसे स्वीकार कर लेना , सब तो गलत है। मैंने जब भी किसी भी बारे खुलकर विरोध किया कुछ समझदार कहलाने वाले लोगों ने हर तरह से हतोत्साहित किया। आप इस तरह से तो किसी संगठन किसी संस्था में नहीं टिक सकते , हां नहीं रहना जहां करनी और कथनी में विरोधभास हो। आप दावा कुछ करें और वास्तव में कुछ और ही मकसद हो तो उसे समर्थन देना गलत को बढ़ावा देना होगा। 
अभी भी जाग जाओ , समाजसेवा धर्म और तमाम बुद्धिजीवी लोगों के काम , शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और देश का प्रशासन तक कोई निजि स्वार्थ साधने की जगह नहीं हैं। मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को छोड़ अपनी आमदनी , अपने स्वार्थ , नाम शोहरत हासिल करने को इनका दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हर दिन देश इक बेहद भयानक डरावने भविष्य की तरफ जाता लगता है और हम खुद को देशभक्त कहने वाले खामोश हैं कुछ करना तो क्या बोलते तक नहीं हैं। इन सभी बातों ने हालत इस हद तक पहुंचा दी है। आजकल जो हो रहा है उसके लिए सरकारों अधिकारीयों और कानून और न्याय व्यवस्था के दोषी होने के साथ गंदी राजनीति और हमारे चुप चाप अनदेखा करने का भी हाथ है। बस अब अंत होना चाहिए।

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