Wednesday, 8 June 2016

रास्ता अंधे सबको दिखा रहे ( तरकश ) डॉ लोक सेतिया

बहुत शोर करते हैं वो जब भी उनको लगता है कोई उन्हें मनमानी नहीं करने देता। बस तभी उनको विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की याद आती है। किसी और को भी आज़ादी है कुछ कहने की ये नहीं सोचते वो कभी भी। टीवी और सिनेमा का जितना दुरूपयोग इसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किया जा रहा है उतना शायद ही सही मकसद से हुआ हो। क्या ये भी अभिव्यक्ति की आज़ादी ही है कि जब आपकी फिल्म को जैसा आपने बनाया उसी तरह अनुमति नहीं मिलने पर आप निजि आरोप लगाने लग जाओ अथवा बिना जाने समझे किसी का समर्थन करने लगो। इक अभिनेता का ब्यान देखा जिसमें उनका कहना था , मुझे इस बारे जानकारी तो नहीं है मगर सिनेमा पर कोई बंदिश नहीं होनी चाहिए। अर्थात इनको सब करने की छूट होनी चाहिए , वास्तव में यही तो है , इनसे कोई नहीं पूछता आपने क्या किया। सही या गलत। क्या दिखा रहे हैं मनोरंजन के नाम पर। महिलाओं के प्रति बढ़ती दूषित मानसिकता का प्रमुख कारण आप हैं। फिल्म ही नहीं समाज में कहीं भी किसी भी मंच पर आप औरत को मात्र इक वस्तु की तरह देखते हैं दिखाना चाहते हैं। कभी फुर्सत मिले तो सोचना आपने कैसे आदर्श प्रस्तुत किये हैं। ज़रा पुरानी फिल्मों को देखना जिन में समाज की समस्याओं पर सार्थक कहानियों की फ़िल्में बनी थीं , और फिर देखना आज की बनी फिल्में और उनका संगीत। शायद समझ आये आप कितना नीचे गिर चुके हैं। जब सफलता और बॉक्स ऑफिस सफलता ही एक मात्र ध्येय हो तब और क्या हो सकता है। फिल्म उद्योग धनवान हुआ होगा पैसे से मगर विचारों से नहीं , शायद कंगाल हो चुका है।
          वास्तव में सब कुछ पाने की भूख ने इनको विवेकशून्य कर दिया है और सही या गलत की समझ ही बाकी नहीं रही है इनको। इनको फिल्मों में अभिनय ही नहीं करना विज्ञापन भी करने हैं पैसे के लिए और विज्ञापन झूठे हैं या लोगों को नुकसान देते हैं , अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं या भर्मित करते हैं , इनको क्या मतलब। इस के बावजूद ये महान लोग हैं , कुछ भी बेचते हैं वो भी जो नहीं बिकता तो अच्छा था। अब तो इनको राजनिति भी करनी है भले राजनिति की समझ भी नहीं हो। इनको तो सांसद बनना है ताकि इक तमगे की तरह नाम के साथ ये शब्द भी जुड़ सके।
                                   रास्ता अंधे सबको दिखा रहे ,
                                   इक नया कीर्तिमान हैं बना रहे।
                                   सुन रहे बहरे बड़े ध्यान से ,
                                   गीत मधुर गूंगे जब हैं गा रहे।
                                   

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